जागरण संवाददाता, जमशेदपुर। प्रकृति की मार का सबसे ज्यादा असर भारतीय रेल के पहियों पर पड़ा है, जिसकी बानगी रविवार को टाटानगर रेलवे स्टेशन पर देखने को मिली। उत्तर भारत में छाए घने कोहरे के कारण नई दिल्ली और अन्य दूर-दराज के इलाकों से आने वाली ट्रेनों का परिचालन बुरी तरह चरमरा गया है।
टाटानगर स्टेशन पर स्थिति यह थी कि अपनी मंजिल तक पहुंचने की आस में यात्री घंटों प्लेटफार्म पर टकटकी लगाए रहे। स्टेशन के पूछताछ केंद्र पर भीड़ का आलम यह था कि पैर रखने की जगह नहीं थी, और हर कोई बस अपनी ट्रेन की सही स्थिति जानने को बेताब था। कोहरे की सफेद दीवार ने लोको पायलटों को गति धीमी करने पर मजबूर कर दिया है, जिससे सुपरफास्ट ट्रेनें भी पैसेंजर गाड़ियों की तरह रेंगती हुई स्टेशन पहुंच रही हैं।
देरी से चल रही प्रमुख ट्रेनें और यात्रियों की परेशानी
नई दिल्ली से पुरी जाने वाली पुरुषोत्तम एक्सप्रेस अपने निर्धारित समय से लगभग सात घंटे की देरी से टाटानगर पहुंची। इसी तरह हरिद्वार से आने वाली कलिंग उत्कल एक्सप्रेस भी कोहरे के चक्रव्यूह में फंसकर पांच घंटे विलंब से आई।
जम्मू तवी-टाटा एक्सप्रेस का हाल तो और भी बुरा रहा, जो करीब नौ घंटे की देरी से चल रही थी। हावड़ा-मुंबई मेल और आजाद हिंद एक्सप्रेस जैसी महत्वपूर्ण ट्रेनें भी तीन से चार घंटे की देरी से पहुंचीं। ट्रेनों की इस लेटलतीफी ने यात्रियों के धैर्य की परीक्षा ले ली।
प्लेटफार्म नंबर एक पर अपने परिवार के साथ बैठी साकची निवासी अनिता दास ने बताया कि उन्हें कटक जाना था और छोटे बच्चों के साथ ठंड में पांच घंटे से इंतजार करना पहाड़ जैसा लग रहा है। वेटिंग रूम पूरी तरह भरे होने के कारण बुजुर्ग यात्री फर्श पर चादर बिछाकर बैठने को मजबूर दिखे।
वहीं, दिल्ली से सफर करके आए राकेश कुमार ने अपना दर्द साझा करते हुए कहा कि कानपुर के बाद ट्रेन की रफ्तार इतनी धीमी हो गई कि सफर कभी न खत्म होने वाला लगने लगा। ठंड और भूख-प्यास ने सफर का मजा किरकिरा कर दिया। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षा के लिहाज से कोहरे में ट्रेनों की गति कम रखना अनिवार्य है और फिलहाल मौसम साफ होने तक यह स्थिति बनी रहने की आशंका है। |