search

सनातन धर्मावलंबी कर रहे पवित्र सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के दिव्य दर्शन, 14 जनवरी तक NCR के 28 क्षेत्रों में होंगे अनुष्ठान

deltin33 5 day(s) ago views 508
  



शालिनी देवरानी, दक्षिणी दिल्ली। दिल्ली समेत एनसीआर के भक्तों को अब पवित्र सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के दिव्य दर्शन और अर्चन के लिए गुजरात नहीं जाना होगा। आर्ट आफ लिविंग वैदिक धर्म संस्थान की ओर से देशभर में चल रही सोमनाथ ज्योतिर्लिंग लाइव दर्शन यात्रा दिल्ली पहुंच चुकी है। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 14 जनवरी तक दिल्ली सहित एनसीआर के विभिन्न स्थानों पर धार्मिक अनुष्ठानों के साथ सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के दिव्य लाइव दर्शन कराए जाएंगे।  

दिल्ली के मेजर ध्यानचंद स्टेडियम में आयोजित ‘शब्दोत्सव’ कार्यक्रम में रविवार को इस दर्शन यात्रा का भव्य शुभारंभ हुआ। बड़ी संख्या में श्रद्धालु आस्था और उत्साह के साथ कार्यक्रम में शामिल हुए। ‘हर हर महादेव’ के जयकारों से माहौल गूंज उठा।

ऑर्ट ऑफ लिविंग वैदिक धर्म संस्थान के ट्रस्टी स्वप्रकाश महाराज की उपस्थिति में वैदिक मंत्रोच्चारण और रुद्राभिषेक के साथ विशेष दर्शन कार्यक्रम संपन्न हुआ। इस अवसर पर श्रद्धालुओं को सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के लाइव दर्शन का सौभाग्य प्राप्त किया।

28 स्थानों पर कराए जाएंगे दर्शन

सोमनाथ मंदिर सनातन धर्म के 12 ज्योतिर्लिंग में प्रथम और अत्यंत पवित्र तीर्थ माना जाता है। आर्ट आफ लिविंग की ओर से दिसंबर में इस लाइव दर्शन यात्रा की शुरुआत की गई थी। अब तक मध्य प्रदेश और राजस्थान में दर्शन यात्रा आयोजित की जा चुकी है।

दिल्ली पहुंचने के बाद 14 जनवरी तक दिल्ली, नोएडा, फरीदाबाद, गुरुग्राम और गाजियाबाद के कुल 28 निर्धारित स्थानों पर श्रद्धालुओं को सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के दिव्य दर्शन कराए जाएंगे। श्रद्धालुओं के लिए जगह और समय की जानकारी वेबसाइट vaidicpujas.org/somnath पर उपलब्ध है।
आस्था और इतिहास की जीवंत गाथा

इस अवसर पर बताया गया कि सोमनाथ ज्योतिर्लिंग की कहानी आस्था और इतिहास की निरंतरता का प्रतीक है। मान्यताओं के अनुसार सतयुग में चंद्रदेव द्वारा निर्मित सोमनाथ मंदिर का शिवलिंग भूमि को स्पर्श नहीं करता था। सन् 1026 में महमूद गजनवी के आक्रमण के दौरान शिवलिंग खंडित हो गया, जिसके अवशेष अग्निहोत्री पुरोहितों ने छोटे वाण शिवलिंगों के रूप में सुरक्षित रखकर पीढ़ियों तक गुप्त रूप से पूजन किया।

बाद में कांची कामकोटि पीठ के शंकराचार्य के निर्देश पर संरक्षक पुरोहितों ने ये शिवलिंग श्रीश्री रवि शंकर को सौंपे। वैज्ञानिक भी आज तक इस ज्योतिर्लिंग की रासायनिक संरचना और चुंबकीय गुणों को स्पष्ट नहीं कर पाए हैं, जो इसकी दिव्यता को और रहस्यमय बनाता है।



सोमनाथ मंदिर पर हुए आक्रमण के दौरान खंडित हुए शिवलिंग के अवशेष आज भी सनातन परंपरा की अविनाशी शक्ति के साक्षी हैं। यह दर्शन यात्रा उसी आस्था का प्रतीक है, जो बताती है कि सनातन धर्म कभी नष्ट नहीं होता। एक शिवलिंग खंडित होने पर भी अनेक रूपों में पुनःप्रकट होता है। जहां स्वयं प्रभु श्रीराम और श्रीकृष्ण ने तपस्या कर वंदना की, उस पावन ज्योतिर्लिंग के दर्शन भक्तों तक पहुंचाना ही इस यात्रा का उद्देश्य है।


-

-स्वप्रकाश महाराज, ट्रस्टी, वैदिक धर्म संस्थान
like (0)
deltin33administrator

Post a reply

loginto write comments
deltin33

He hasn't introduced himself yet.

1510K

Threads

0

Posts

4610K

Credits

administrator

Credits
460033

Get jili slot free 100 online Gambling and more profitable chanced casino at www.deltin51.com