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पानी की जांच करते अधिकारी
जागरण संवाददाता, बरेली। जल ही जीवन है। इस वाक्य का महत्व हर कोई जानता है। मगर, सरकारी तंत्र जब इस वाक्य को न माने तब इंदौर जैसी घटना की आशंकाएं प्रबल हो जाती हैं। शहर में दूषित पेयजल आपूर्ति की शिकायतों के बीच दैनिक जागरण समाचारीय अभियान के तहत शहर के अलग-अलग हिस्सों में पानी की वर्तमान स्थिति को प्रमुखता से प्रकाशित कर रहा है।
रविवार को रबड़ी टोला के कुरैश नगर में दूषित और काला पानी आने की शिकायत के बाद सोमवार को शहर के अलग-अलग हिस्सों में पानी की गुणवत्ता की जांच की गई।
जागरण टीम ने जलकल विभाग के अभियंताओं को साथ लेकर रामपुर गार्डन, नौमहला, श्यामगंज-कालीबाड़ी, बिहारीपुर सिविल लाइन समेत अन्य क्षेत्रों में पानी के नमूनों की जांच की। अधिकतर स्थानों पर पानी की गुणवत्ता ठीक पाई गई। इस दौरान आमजन से दूषित पानी आने की शिकायत पर तत्काल सूचना देने की अपील की गई। शहर के विभिन्न स्थानों पर जांची गई पानी की गुणवत्ता के प्रमुख अंश...।
पाश कालोनी रामपुर गार्डन में 125 टीडीएस : शहर के सबसे पाश कालोनी में शामिल रामपुर गार्डन में पानी की गुणवत्ता ठीक मिली। अग्रसेन पार्क स्थित अमित कुमार के घर नगर निगम से सप्लाई हो रहे पानी की गुणवत्ता मापी गई तो टीडीएस 125 मिला। क्लोरीन की मात्रा में 0.2 पीपीएम (पार्ट्स पर मिलियन) पाया गया।
बिहारीपुर सिविल लाइन में 115 मिला टीडीएस : नगर निगम के वार्ड-एक बिहारीपुर सिविल लाइन में भी पानी की गुणवत्ता मापी गई तो यहां टीडीएस 115 दर्ज किया गया। क्लोरीन की मात्रा थोड़ा कम 0.1 पीपीएम पाया गया।
नौमहला में डेढ़ सौ के पार मिला टीडीएस : चौपुला के पास स्थित नौमहला में टीडीएस डेढ़ सौ के पार मिला। बीकानेरी होटल के पास स्थित निहाल कुमार के घर नगर निगम की ओर से आ रहे पानी के नमूने की जांच में 157 टीडीएस दर्ज किया गया। साथ ही क्लोरीन भी 0.1 पीपीएम दर्ज किया गया।
शहर के प्रमुख बाजारों में शुमार श्यामगंज के मुकेरी मुहल्ला में भी पानी की जांच की गई। इस दौरान टीडीएस 118 पाया गया जबकि क्लोरीन की मात्रा 0.2 पीपीएम दर्ज की गई।
आदर्श टीडीएस स्तर 300, 500 तक भी गुणवत्ता ठीक
भूगर्भ जल विभाग के वरिष्ठ हाइड्रोलाजिस्ट सौरभ कुमार शाह के अनुसार एक आदर्श टीडीएस स्तर 150-300 के बीच होता है। साथ ही 500 टीडीएस तक की पानी की भी गुणवत्ता ठीक होना बताया, जिसमें आवश्यक खनिजों (जैसे कैल्शियम और मैग्नीशियम) को बना रहता है और पानी का अच्छा स्वाद भी देता है। बताया कि, भारतीय मानक ब्यूरो (बीआइएस) ने पेयजल में टीडीएस की अनुमेय सीमा 500 मिलीग्राम/लीटर निर्धारित की है।
क्या है टीडीएस और इसका महत्व
टीडीएस का पूरा नाम टोटल डिसाल्व्ड सालिड्स है। यह पीने के पानी में घुले पदार्थों की कुल सांद्रता को दर्शाता है। टीडीएस में अकार्बनिक लवणों के साथ-साथ थोड़ी मात्रा में कार्बनिक पदार्थ भी होते हैं।
धनात्मक आवेश वाले धनायन (कैल्शियम, मैग्नीशियम, पोटेशियम और सोडियम) और ऋणात्मक आवेश वाले ऋणायन अकार्बनिक लवणों (कार्बोनेट, नाइट्रेट, बाइकार्बोनेट, क्लोराइड और सल्फेट) का निर्माण करते हैं। टोटल डिसाल्व्ड सालिड्स (टीडीएस) का स्तर यह बताता है कि पानी में कुल घुले हुए ठोस पदार्थों की कितनी मात्रा मौजूद है।
पानी में टीडीएस की मात्रा मापना आवश्यक
भूगर्भ जल विभाग के विशेषज्ञ के अनुसार 500 मिलीग्राम/लीटर से अधिक टीडीएस का स्तर मानव उपभोग के लिए अनुपयुक्त है। पानी में टीडीएस का अत्यधिक स्तर कई स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है।
पानी में पोटेशियम, सोडियम और क्लोराइड की उपस्थिति टीडीएस के स्तर को बढ़ाती है। पानी में पाए जाने वाले सीसा, नाइट्रेट, कैडमियम और आर्सेनिक जैसे विषैले आयन कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकते हैं।
अधिक टीडीएस से पड़ने वाले प्रभाव
- पानी में टीडीएस का स्तर अधिक होना पानी के स्वाद को प्रभावित करता है, जो कड़वा, नमकीन या सल्फरयुक्त हो सकता है।
- उच्च टीडीएस स्तर भोजन के स्वाद को बदल सकता है।
- उच्च टीडीएस स्तर वाला पानी रसोई के बर्तनों पर भद्दे दाग, कपड़ों का रंग फीका करने, सिंक, टब और नल में गंदगी जमा कर देते हैं।
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