कैसे हुआ कौरवों का जन्म? (Image Source: AI-Generated)
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। महाभारत की सबसे हैरान करने वाली कथाओं में से एक है 100 कौरवों के जन्म की कहानी है। अक्सर लोग सोचते हैं कि क्या वाकई एक महिला 100 बच्चों को जन्म दे सकती है? पौराणिक ग्रंथों के अनुसार, कौरवों का जन्म कोई साधारण जन्म नहीं था, बल्कि इसके पीछे एक गहरा रहस्य और ऋषि व्यास का वरदान था। आइए जानते हैं इस रोचक कहानी के बारे में।
ऋषि व्यास का वरदान
जब महर्षि वेदव्यास हस्तिनापुर आए थे, गांधारी ने उनकी बहुत सेवा की। जिससे प्रसन्न होकर ऋषि व्यास ने उन्हें 100 शक्तिशाली पुत्रों की माता होने का वरदान दिया। गांधारी और धृतराष्ट्र इस वरदान से बहुत खुश थे।
दो साल का लंबा इंतजार
वरदान मिलने के बाद गांधारी गर्भवती हो गईं, लेकिन हैरानी की बात यह थी कि वह 2 साल तक गर्भवती रहीं और फिर भी किसी संतान का जन्म नहीं हुआ। इसी बीच पांडु की पत्नी कुंती ने युधिष्ठिर को जन्म दे दिया। यह सुनकर गांधारी को बहुत दुख और ईर्ष्या हुई। घबराहट और गुस्से में आकर उन्होंने अपने पेट पर जोर से प्रहार किया, जिससे उनका गर्भपात (Miscarriage) हो गया।
मांस का लोथड़ा और ऋषि व्यास की युक्ति
गर्भपात के बाद गांधारी के गर्भ से किसी शिशु के बजाय मांस का एक कठोर लोथड़ा (पिंड) निकला। गांधारी बहुत दुखी हुईं और ऋषि व्यास को याद किया। तब व्यास जी ने अपनी दिव्य शक्ति से उस स्थिति को संभाला। उन्होंने गांधारी से कहा कि वह 101 घी से भरे हुए मटके (कुंड) तैयार करवाएं।
व्यास जी ने उस मांस के लोथड़े को ठंडे जल से सींचा, जिससे उसके 101 टुकड़े हो गए। उन्होंने उन टुकड़ों को अलग-अलग मटकों में रख दिया और उन्हें सुरक्षित स्थान पर रखवा दिया। व्यास जी ने गांधारी को निर्देश दिया कि इन मटकों को दो साल बाद ही खोला जाए।
कौरवों और दुशाला का जन्म
समय पूरा होने पर सबसे पहले जो मटका खुला, उससे दुर्योधन का जन्म हुआ। कहा जाता है कि दुर्योधन के पैदा होते ही अपशकुन होने लगे। इसके बाद धीरे-धीरे बाकी 99 भाई और एक बहन दुशाला का जन्म हुआ। इस तरह ऋषि व्यास के वरदान और एक प्राचीन \“टेस्ट ट्यूब बेबी\“ जैसी तकनीक से 100 कौरवों का जन्म हुआ।
गांधारी को मिला था कर्मो का फल
महाभारत में इस बात का वर्णन है कि गांधारी ने अपने पिछले जन्म में जीव की हत्या की थी और पाप कमाया था। जिसकी वजह से उन्हें संतान प्राप्ति के काफी देरी हुई। उसी का फल उन्हें द्वापरयुग में मिला। वहीं, एक अन्य कथा यह भी बताती है कि पिछले जन्म में गांधारी ने 100 कछुओं को मारा था, जिसके कारण उसके 100 पुत्र मारे गए थे।
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