जेएनयू में वामपंथियों का प्रदर्शन। वीडियो ग्रैब
लोकेश शर्मा, नई दिल्ली। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) परिसर में एक बार फिर वामपंथी गुटों द्वारा किए गए विरोध प्रदर्शन को लेकर सियासत गरमा गई है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) दिल्ली इकाई ने आरोप लगाया है कि हालिया प्रदर्शन के दौरान वामपंथी संगठनों ने देशविरोधी मानसिकता का खुला प्रदर्शन किया और हिंसा को उकसाने वाली भाषा का प्रयोग किया।
अभाविप ने इसे विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गरिमा के खिलाफ बताते हुए कड़ी निंदा की है। एबीवीपी के अनुसार, सर्वोच्च न्यायालय द्वारा उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिकाएं खारिज किए जाने के बाद वामपंथी गुटों ने न्यायिक निर्णय का सम्मान करने के बजाय उग्र नारेबाजी की।
प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री, गृहमंत्री, आरएसएस और एबीवीपी के खिलाफ आपत्तिजनक और हिंसा को बढ़ावा देने वाले नारे लगाए गए। अभाविप ने कहा कि यह कोई नई घटना नहीं है, बल्कि 2016 से चली आ रही उसी विचारधारा की निरंतरता है, जो पहले भी देश की एकता-अखंडता पर सवाल उठाती रही है।
एबीवीपी ने स्पष्ट किया कि सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय स्वतंत्र और निष्पक्ष न्यायिक प्रक्रिया का परिणाम है, जिसे किसी भी तरह के दबाव या सड़क पर होने वाले प्रदर्शनों से प्रभावि त नहीं किया जा सकता। संगठन ने कहा कि लोकतंत्र में असहमति का अधिकार है, लेकिन उसके नाम पर हिंसा और घृणा फैलाना स्वीकार्य नहीं है।
प्रदेश मंत्री सार्थक शर्मा ने कहा कि जेएनयू परिसर में देशविरोधी गतिविधियों को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन से दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त और त्वरित कार्रवाई की मांग की, ताकि परिसर में शांति और शैक्षणिक वातावरण बना रह सके।
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