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राज्य ब्यूरो, लखनऊ। प्रदेश के बेसिक और माध्यमिक विद्यालयों में शैक्षिक गुणवत्ता सुधार को लेकर एक नई पहल शुरू हो गई है।
प्रदेश में स्कूल क्वालिटी असेसमेंट एंड एक्रेडिटेशन फ्रेमवर्क (एसक्यूएएएफ) लागू करने की तैयारी तेज कर दी गई है। इस फ्रेमवर्क का उद्देश्य स्कूलों की वास्तविक स्थिति का आकलन कर उनमें चरणबद्ध सुधार सुनिश्चित करना है।
फ्रेमवर्क को स्कूलों के लिए एक प्रभावी आत्म मूल्यांकन उपकरण के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसके माध्यम से विद्यालय अपनी कमियों की पहचान कर सकेंगे और उन्हें दूर करने के लिए ठोस कार्ययोजना बना पाएंगे।
इससे स्कूलों को वैश्विक गुणवत्ता मानकों के अनुरूप ढालने में मदद मिलेगी। हाल ही में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यशाला में जिला विद्यालय निरीक्षक, बेसिक शिक्षा अधिकारी, डायट प्रवक्ता, खंड शिक्षा अधिकारी, प्रधानाचार्य और शिक्षक शामिल हुए।
सुझावों और मंथन के आधार पर फ्रेमवर्क का प्रारंभिक ड्राफ्ट दस्तावेज तैयार कर लिया गया है। फ्रेमवर्क के अंतर्गत स्कूलों का मूल्यांकन छह मुख्य डोमेन पर किया जाएगा।
इसमें अवसंरचना, मानव संसाधन, शिक्षण पद्धति, लर्निंग आउटकम, छात्र विकास, स्कूल संस्कृति को शामिल किया गया है। इन मानकों के आधार पर विद्यालयों की रेटिंग तैयार होगी, जिससे सुधार की दिशा स्पष्ट होगी। शासन की योजना के अनुसार फरवरी से मार्च में पायलट स्टडी कराई जाएगी।
इसके परिणामों के आधार पर आवश्यक संशोधन कर फ्रेमवर्क का अंतिम ड्राफ्ट जारी किया जाएगा। शिक्षा अधिकारियों का मानना है कि यह व्यवस्था लागू होने से प्रदेश के स्कूलों में गुणवत्ता सुधार की प्रक्रिया को ठोस दिशा मिलेगी और विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षण वातावरण उपलब्ध होगा।  |
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