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स्मार्ट सिटी कहे जाने वाले नोएडा में पानी दे रही बीमारी, कई सेक्टरों में टीडीएस 2000 के पार

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प्रवेंद्र सिंह सिकरवार/अजब सिंह, नोएडा। स्मार्ट सिटी का तमगा लगे नोएडा शहर में खराब पानी की समस्या से सिर्फ ग्रामीण आबादी ही नहीं शहरी लोग भी बुरी तरह प्रभावित हैं। नोएडा प्राधिकरण 12 महीने शुद्ध पेयजल की वसूली कर डेढ़ महीने हाई टीडीएस (टोटल डिसाल्व साल्वेंट) या खराब गुणवत्ता के पानी की आपूर्ति करता है। यह स्थिति ग्रेटर नोएडा क्षेत्र में भी है। यह स्थिति शहर में काफी पुरानी है। नोएडा में कुल 167 सेक्टर हैं। प्राधिकरण की ओर से लगभग सभी में बेहतर पानी आपूर्ति का दावा किया जाता है।

नोएडा में प्रतिदिन 400 एमएलडी के सापेक्ष 260 एमएलडी गंगाजल और बकाया रेनीवेल और भूजल से आपूर्ति होती है। कई सेक्टरों में टीडीएस 1500 से अधिक है। गंगाजल की आपूर्ति प्रभावित होने पर इस क्षेत्रों में टीडीएस 2000 से अधिक पहुंच जाता है। अलग-अलग सोसायटियों सेक्टर-78 की द हाइड पार्क, सेठी मैक्स रायल, सेक्टर-75 की फ्यूटेक गेटवे, सेक्टर-128 में जेपी विशटाउन, सेक्टर-121 की होम्स-121 सोसायटी की पड़ताल की गई तो पानी की टीडीएस सामान्य से अधिक मिला।

डेढ़ दशक में यहां स्वच्छ जल मुहैया नहीं हो सका है। ग्रेटर नोएडा की सोसायटियों में भी लोगों को दूषित पानी पीने से बीमार होने का डर सताने लगा है। दूषित पानी पीने से पिछले एक साल में 18 सौ से अधिक लोग बीमार हुए। बीते दिनों गौर सौंदर्यम सोसायटी में 40 लोग उल्टी,दस्त व पेट दर्द का शिकार हो गए थे। सुपरटेक ईकोविलेज-1 सोसायटी में जीवाणु युक्त पानी की आपूर्ति होने से सैकड़ों लोग बीमार पडे। पता यहां गंदे पानी की आपूर्ति पंचशील हाइनिश और अरिहंत आर्डन सोसायटी में भी पहुंची। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने कैंप लगाए तो दूषित पानी से बीमार होनी की हकीकत सामने आई।
खराब पानी के हाॅटस्पाॅट

सेक्टर 70-79, 110-120, एक्सप्रेसवे वाले (128-135, 137, 150-151), ग्रेटर नोएडा वेस्ट, डेल्टा-1, गामा-2 और ओमिक्रान जैसे इलाकों में टीडीएस सबसे अधिक है। इन सेक्टरों में लाखों की आबादी रहती है।
खराब पानी से बढ़ रहीं बीमारियां

रूखी और खुजली, बाल झड़ना, पेट दर्द, उल्टी-दस्त, किडनी स्टोन, हार्ट और लिवर से संबंधित परेशानियों पानी की गुणवत्ता खराब होने से बढ़ रहीं हैं। बच्चों और बुजुर्गों में डिहाइड्रेशन, स्किन एलर्जी जैसी परेशानी आम हो गईं हैं। घरेलू उपकरण वाशिंग मशीन, गीजर जल्दी खराब हो रहे हैं।
एसटीपी चलाओ या न चलाओ देना होगा रुपया

शहर में 100 से अधिक सोसायटियां हैं। यहां पर हर जगह एसटीपी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) का संचालन होना जरूरी है। शहरी विकास के मुताबिक प्रति व्यक्ति 90 लीटर पानी संबंधित प्राधिकरण या निकाय को उपलब्ध कराना होता है। 35 लीटर पानी एसटीपी से शोधित कर फ्लश या गार्डनिंग के उपयोग में लेना हाेता है। नोएडा में एसटीपी का संचालन नहीं होने से प्रतिदिन 1.75 करोड़ लीटर पानी बिना शोधित किए नाले में बहाया जा रहा है। संबंधित प्राधिकरण और प्रदूषण बोर्ड की ओर से निरीक्षण के दौरान वसूली की जाती है। एसटीपी चलने पर सैंपल फेल करने का डर बनाया जाता है।
पेयजल में पहुंच जाता है सीवर का पानी

शहर में सीवर और पानी की पाइपलाइन संग डाली हुईं हैं। दोनों में से किसी एक लाइन के लीकेज होने पर दोनों का पानी मिक्स हो जाता है। इस स्थिति में लोगों के बीमार होने का डर रहता है। पूर्व में इस तरह की घटनाएं शहर में हुईं हैं।
प्राधिकरण ने नहीं दिया कनेक्शन भूजल पर निर्भरता

सेक्टर-75 की फ्यूटेक गेटवे सोसायटी में 550 से अधिक परिवार रहते हैं। बिल्डर और प्राधिकरण के बीच चल रही आपसी तकरार के चलते यहां जल कनेक्शन नहीं है। बोरवेल से आपूर्ति हो रहे पानी की टीडीएस 2000 से अधिक है। आरओ और वाटर साफ्टनर सिर्फ पानी की कठोरता कम करने में सक्षम हैं। पानी के टीडीएस को यह कम नहीं कर पाते हैं।
2100 परिवारों के स्वास्थ्य पर संकट

सेक्टर-78 की द हाइड पार्क सोसायटी में 2100 से अधिक परिवार रहते हैं। यहां पर प्राधिकरण से आपूर्ति हो रहे पानी की टीडीएस 1900 से अधिक दर्ज हुआ। यहां पड़ोस की अन्य सोसायटियों में टीडीएस का स्तर कम है। प्राधिकरण की ओर से यहां आपूर्ति हो रहे खराब गुणवत्ता के पानी की जांच नहीं की गई।
30 साल पुरानी पाइपलाइन के भरोस पेय आपूर्ति व्यवस्था

ग्रेटर नोएडा वेस्ट की सोसायटियों में पानी आपूर्ति की जिम्मेदारी प्राधिकरण की है। सेक्टर व सोसायटियों की बसावट के दौरान करीब 30 साल पहले पानी की पाइपलाइन डाली। पाइपलाइन के साथ ही सीवर की लाइन भी डाल दी गई। जंग लगने के कारण अब पाइपलाइन क्षतिग्रस्त होने लगी है। पाइपलाइन में सीवर का दूषित पानी मिश्रित होकर घरों तक पहुंच जाता है। प्राधिकरण की ओर से आपूर्ति करने वाले यूजीआर और सोसायटी प्रबंधन की ओर से आंतरिक यूजीआर और ओवरहेड टैंकों की सफाई में लापरवाही से कई बीमारी के कई मामले सामने आए हैं।
नोएडा में आपूर्ति की यह हिस्सेदारी

नोएडा में प्राधिकरण से प्रतिदिन 260 एमएलडी गंगाजल, 120 से 125 एमएलडी रेनीवेल और करीब 40 एमएलडी भूजल आपूर्ति का दावा किया जाता है। यह तीनों मिलाकर घरों में आपूर्ति होती है और टीडीएस 500 से कम होने का दावा किया जाता है।
दूषित पानी पीने से ग्रेटर नोएडा वेस्ट में बीमार होने के आए मामले

  • 8 अप्रैल 2025 : ग्रेटर नोएडा वेस्ट की अजनारा होम सोसाइटी में दूषित पानी की आपूर्ति से सैकड़ों लोग बीमार हो गए। प्राधिकरण ने बिल्डर प्रबंधन पर 25 लाख रुपए का जुर्माना लगाया
  • 20 अप्रैल 2025 : ग्रेटर नोएडा वेस्ट स्थित गौर सौंदर्यम सोसायटी में दूषित पानी पीने से 40 से अधिक लोग बीमार।
  • 7 अक्टूबर 2025 : ग्रेटर नोएडा वेस्ट की दिव्या टावर सोसायटी में गंदे पानी की सप्लाई से कई निवासी बीमार
  • 6 फरवरी 2025 : ग्रेटर नोएडा वेस्ट की अरिहंत गार्डन सोसायटी, इको विलेज एक, हवेलियां वेलेंसिया और पंचशील हायनिश सोसायटी में पानी पीने से दो सौ से अधिक लोग बीमार हुए। जांच में ईकोली वायरस मिलने की पुष्टि हुई।
  • 16 दिसंबर 2025 : ग्रेटर नोएडा वेस्ट की अजनारा होम सोसायटी में 100 से अधिक लोग बीमार

ग्रेटर नोएडा में आपूर्ति की स्थिति

  • 109 नलकूप ग्रेटर नोएडा वेस्ट में
  • 209 नलकूप ग्रेटर नोएडा ईस्ट
  • 976 किमी पेयजल पाइपलाइन
  • 592 किमी ग्रेनो वेस्ट में पेयजल पाइपलाइन
  • 60 से 70 एमएलडी गंगाजल
  • 210 एमएलडी भूजल


सेक्टर में पानी की परेशानी लंबे समय से है। सुनवाई कोई नहीं है। आज भी टीडीएस की जांच की गई तो 900 से अधिक है। परेशानी है लेकिन हल किसी के पास नहीं है।

-राजीव गर्ग, सेक्टर-27

पास की अन्य सोसायटी में टीडीएस थोडा कम है। हमारे यहां 2000 से अधिक टीडीएस की आपूर्ति है। शिकायत पर कहा जाता है हमारी ही आपूर्ति में खोट है।

-अमित गुप्ता, द हाइड पार्क सोसायटी, सेक्टर-79

पानी पीने में नमकीन लगता है। सभी घरों में आरओ लगा हुआ है। यहां कई मकान निर्माणाधीन हैं। कामगार आपूर्ति का पानी पीते हैं उनके स्वास्थ्य को अधिक खतरा है।

-भगत सिंह तोंगड़, सेक्टर-144

प्राधिकरण ने गंगाजल की आपूर्ति एक महीने से शुरू की है। इसका कोई खास असर नहीं है। विशटाउन के एक लाख लोगों को 1200 टीडीएस तक का पानी मिल रहा है।

-डाॅ. पुनीत सेठी, निवासी जेपी विशटाउन

सोसायटियों में पानी की आपूर्ति की जिम्मेदारी प्राधिकरण की है। पाइपलाइन क्षतिग्रस्त होने की वजह से कई बार सीवर का मिश्रित पानी आ चुका है। टीडीएस 497 है। जिससे पीना तो दूर अब तो नहाने में भी डर लगने लगा है।

-अनीता प्रजापति गौर सिटी एवेन्यू-6

सोसायटी में पाइपलाइन के जरिये आने वाली पानी का टीडीएस 480 के करीब है। जो पीने योग्य तो बिल्कुल नहीं है। मेरा खुद सोसायटियों में आरओ लगाने का काम है। एक भी सोसायटी ऐसी नहीं जहां पीने योग्य पानी हो।

-विनोद भास्कर गौर सिटी एवेन्यू-5

आसपास की सोसायटियों में दूषित पानी पीने से लोगों के बीमार होने के आएदिन मामले सामने आते रहते हैं। किसी घातक बीमारी की चपेट में न आ जाए अब तो डर बना रहता है। व्यवस्था सुधार की दिशा में कदम उठाना चाहिए।

-छाया वार्ष्णेय, समृद्धि ग्रैंड एवेन्यू

यह भी पढ़ें- गाजियाबाद की आबादी शुद्ध पेयजल को तरस रही, 28 में से 19 जगहों पर टीडीएस 500 के पार
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