राज्य ब्यूरो, लखनऊ। दिव्यांगजनों के पुनर्वास के लिए स्वैच्छिक संस्थाओं को आर्थिक सहायता दी जाएगी। दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग से जारी शासनादेश के अनुसार अर्ली इंटरवेंशन सेंटर, डे केयर सेंटर/प्री प्राइमरी स्कूल, प्राइमरी स्कूल, जूनियर हाईस्कूल स्तर के विशेष विद्यालयों, कौशल विकास के अधिकतम चार और न्यूनतम दो ट्रेड, पाठ्य सामग्री विकास व पुस्तकालयों के संचालन के लिए अनुदान दिया जाएगा।
स्वैच्छिक संस्था को परियोजना के लिए प्रस्तावित धनराशि का न्यूनतम 10 प्रतिशत स्वयं के संसाधनों से व्यवस्था करनी होगी। विभाग किसी भी परियोजना के लिए अधिकतम 90 प्रतिशत की सीमा तक अनुदान देगा।
प्रत्येक परियोजना के लिए मानक भी जारी किए गए हैं। अर्ली इंटरवेंशन सेंटर में न्यूनतम 24 और अधिकतम 40 दिव्यांग होने चाहिए। डे केयर सेंटर/ प्री प्राइमरी स्कूल में न्यूनतम 36 और अधिकतम 60, प्राइमरी स्कूल और जूनियर हाईस्कूल स्तर के विशेष विद्यालयों में न्यूनतम 60 और अधिकतम 100 दिव्यांग, कौशल विकास में अधिकतम चार और न्यूनतम दो ट्रेड में न्यूनतम 24 और अधिकतम 40 प्रशिक्षणार्थी होना जरूरी होगा। पाठ्य सामग्री विकास व पुस्तकालय (भौतिक व डिजिटल लाइब्रेरी) में न्यूनतम 100 दिव्यांग सदस्य/लाभार्थी होना जरूरी होगा।
फर्नीचर के लिए पांच साल में एक बार अनुदान दिया जाएगा। संस्थान को डे केयर सेंटर पर तीन से सात वर्ष के बच्चों को लाने व ले जाने के लिए परिवहन की व्यस्था करनी होगी। छात्रावास के लिए प्रति लाभार्थी 400 रुपये अनुरक्षण व प्रयोक्ता शुल्क (यूजर फीस) 11 माह के लिए दिया जाएगा।
आवासीय दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए छात्र वेतन, भरण-पोषण अनुदान चार हजार रुपये प्रतिमाह प्रति लाभार्थी भुगतान किया जाएगा। इसके अलावा सात वर्ष से अधिक आयु के अनावासीय दिव्यांग विद्यार्थियों-प्रशिक्षुओं को मध्याह्न भोजन के साथ-साथ स्टाइपेंड/वाहन भत्ता के रूप में 500 रुपये प्रतिमाह दिया जाएगा। |
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