search

सीएजी ने सात वर्ष पहले ही चेताया था, इंदौर और भोपाल में दूषित पानी से बीमार हो सकते हैं आठ लाख लोग

LHC0088 2026-1-7 02:25:47 views 544
  

2018 में मप्र सरकार को दी थी पेयजल आपूर्ति व्यवस्था की ऑडिट रिपोर्ट  



जेएनएन, भोपाल। इंदौर में दूषित पेयजल से 18 लोगों की मौत और 3200 से अधिक के बीमार होने की घटना को रोका जा सकता था, यदि भारत का नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की सात वर्ष पहले की चेतावनी का राज्य सरकार और नगर निगम ने संज्ञान लिया होता।

दरअसल, सीएजी ने अप्रैल 2013 से मार्च 2018 के बीच भोपाल और इंदौर नगर निगम में पेयजल आपूर्ति व्यवस्था का आडिट किया था। इसके आधार पर सीएजी ने 31 मार्च 2018 को समाप्त वर्ष के लिए जारी रिपोर्ट में कहा था कि भोपाल और इंदौर में कम से कम आठ लाख लोग दूषित पानी से बीमार हो सकते हैं।

सीएजी ने आगाह किया था कि नगर निगम में पेयजल आपूर्ति व्यवस्था की निगरानी के लिए स्थायी तंत्र नहीं है। वजह यह कि सीएजी को स्वास्थ्य संचालनालय से मिली रिपोर्ट में पता चला था कि कालरा (हैजा) के चार रोगी भोपाल और सात इंदौर में मिले थे। हालांकि, किसी की मौत नहीं हुई थी। बीमारियों के बारे में भोपाल के तब ज्यादा बुरे हाल थे।

ऑडिट अवधि के पांच वर्षों में भोपाल में डायरिया के चाल लाख, 39 हजार और इंदौर में 40 हजार, 447 मामले सामने आए थे। टायफाइड के भोपाल में 39 हजार, 481 और इंदौर में 1462 रोगी मिले थे। अब दूषित पेयजल से फिर इंदौर में हैजा की पुष्टि हुई है।

इस घटना ने यह साबित कर दिया है कि रिपोर्ट आने के सात वर्ष हो चुके हैं, पर निगरानी का कोई तंत्र नहीं बना, जिससे लीकेज या पेयजल और सीवेज लाइन के मिलने की जानकारी मिल सके।

पेट्रोलिंग जैसी व्यवस्था भी नहीं की गई। पाइपलाइन के वाल्व खोलने वाले कर्मचारियों के जिम्मे ही यह काम वर्षों से है। ऐसे में इंदौर में दूषित पेयजल से मौतों के बाद भी खतरा अभी टला नहीं है।
बीमारी की भी जताई थी आशंका

सीएजी ने इंदौर और भोपाल में पेयजल के 54 सैंपल की जांच कराई थी, जिनमें 10 में फीकल कोलीफार्म बैक्टीरिया पाया गया था। जिन क्षेत्रों के सैंपल में बैक्टीरिया मिला, वहां कितने लोग पानी पी रहे हैं, इस आधार पर अनुमान लगाकर सीएजी ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि इंदौर में पांच लाख, 33 हजार और भोपाल में तीन लाख, 62 हजार लोग दूषित पानी पीने से बीमार हो सकते हैं।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया था कि संचालन और वितरण के स्तर पर फिल्टर प्लांट की निगरानी की कमी है। रिपोर्ट में बताया गया था कि 2013 से 2018 के बीच पेयजल के 4,481 सैंपल \“खराब\“ गुणवत्ता (बीआइएस 10500 मापदंड से नीचे) के पाए गए।
like (0)
LHC0088Forum Veteran

Post a reply

loginto write comments
LHC0088

He hasn't introduced himself yet.

510K

Threads

0

Posts

1610K

Credits

Forum Veteran

Credits
164244