राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली। यमुना में प्रदूषण का एक बाड़ा कारण इसमें गिरने वाले नाले हैं। नदी को स्वच्छ बनाने के लिए यह आवश्यक है इसमें गिरने वाले नालों को साफ किया जाए। इनमें नजफगढ़ सहित कई नाले पड़ोसी राज्यों की गंदगी यमुना में डाल रहे हैं।
समस्या के समाधान के लिए दिल्ली जल बोर्ड पूरे वर्ष यमुना में गिरने वाले नालों का अध्ययन करेगा। इसकी रिपोर्ट के अनुसार नदी की सफाई के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।वज़ीराबाद और ओखला के बीच यमुना नदी का 22 किलोमीटर हिस्सा नदी का सबसे प्रदूषित भाग है। इस बीच 75 छोटे बड़े नाले नदी में गिरते हैं।
नदी में सबसे अधिक लगभग 70 प्रतिशत प्रदूषण नजफगढ़ नाले से होता है। यह गुरुग्राम की गंदगी लेते हुए दिल्ली में प्रवेश कर यमुना में मिल जाता है। इसी तरह से गाजियाबाद की गंदगी शाहदरा नाले के माध्यम से नदी में पहुंच रहा है।
पड़ोसी राज्यों से आने वाले नालों से हो रही समस्या
पड़ोसी राज्यों से बहकर आने वाले कई अन्य नालों से भी यह समस्या हो रही है। नजफगढ़ नाला, शाहदरा नाला और सप्लीमेंट्री ड्रेन जैसी बड़े नालों के साथ ही हरियाणा और उत्तर प्रदेश से आने वाले नालों का भी पूरे वर्ष अध्ययन किया जाएगा। इनमें मंगेशपुर नाला, बुपनिया चुडानिया नाला, नरेला सीमा के पास नाला संख्या 6, अलीपुर लिंक नाला शामिल है।
इन नालों के माध्यम से शहरों की गंदगी के साथ औद्योगिक इकाइयों का अवशिष्ट भी नदी में पहुंच रहा है। इनके पानी की मात्रा के अध्ययन के लिए फ्लो मीटर लगाने की तैयारी है। इससे पता चलेगा कि कितना गंदा पानी यमुना में गिर रहा है।
अधिकारियों ने बताया कि इसके लिए टेंडर की प्रक्रिया चल रही है। अध्ययन रिपोर्ट के आधार पर आवश्यकतानुसार सीवेज उपचार संयंत्र (एसटीपी) और विकेंद्रीकृत सीवेज उपचार संयंत्र (डीएसटीपी) बनाने का निर्णय लिया जाएगा।
अभी नजफगढ़ नाले में गिरने वाले छोटे नालों पर 27 डीएसटीपी लगाने की प्रक्रिया शुरू की गई है। दिल्ली सरकार द्वारा नदी की समग्र सीवेज उपचार क्षमता बढ़ाने के लिए सभी घरों को सीवेज उपचार अवसंरचना से जोड़ा जा रहा है। अगले तीन वर्षों में उपचार क्षमता को दोगुना करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। |
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