हिमाचल प्रदेश के शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर। जागरण आर्काइव
राज्य ब्यूरो, शिमला। हिमाचल प्रदेश शिक्षा विभाग में अब कोई भी शिकायत फाइलों में दफन होकर नहीं रहेगी। इनकी समय पर न केवल जांच शुरू होगी, बल्कि निस्तारण भी तय समय में होगा। विभाग हर जिला में 10-10 प्रधानाचार्यों का पैनल गठित करेगा। हर प्रधानाचार्य के साथ जांच के लिए अधीक्षक ग्रेड टू श्रेणी का एक गैर शिक्षक भी तैनात होगा।
विभाग इन्हें जांच के लिए प्रशिक्षण देगा। निदेशक स्कूल शिक्षा विभाग आशीष कोहली की ओर से इस संबंध में सभी जिलों के उपनिदेशकों के प्रधानाचार्यों के नाम इसके लिए मांगे गए हैं। पैनल बनने के बाद जिला स्तर पर जितने भी जांच के मामले लंबित हैं, उनकी जांच का जिम्मा इन्हें सौंपा जाएगा।
75 जांच के मामले लंबित
शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर के निर्देशों के बाद विभाग ने इसके लिए जांच की प्रक्रिया में बदलाव का निर्णय लिया है। हाल ही में शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में इस पर विस्तृत चर्चा की गई थी। जांच में सामने आया था कि जांच अधिकारियों के पास कुल 75 जांच के मामले लंबित हैं। इनमें कई मामले तो ऐसे हैं जो वर्षों से लंबित पड़े हैं।
शिक्षा मंत्री ने जांच मामलों की धीमी प्रगति पर असंतोष व्यक्त किया। उन्होंने निर्देश दिए कि लंबित जांच मामलों की नियमित निगरानी की जाए, ताकि सभी जांच निर्धारित समय सीमा के भीतर पूर्ण की जा सकें। चंबा, कांगड़ा, मंडी, शिमला, सोलन और सिरमौर जिला में जांच के सबसे ज्यादा मामले लंबित हैं।
किस तरह की है जांच
ज्यादातर जांच अधिकारी के अभद्र व्यवहार, वित्तीय अनियमितता बरतने, सरकारी फंड का दुरुपयोग, बजट को सही तरह से न खर्चना, एमडीएम के कार्यों में अनियमितता, विभाग की कार्यप्रणाली, शिक्षक व गैर शिक्षक के रवैये जैसी कई शिकायतें आती है। शिकायतों के यह पन्ने फाइलों में दबकर रह जाते हैं। कई महीनों व सालों तक ये धूल फांकते रहते हैं। जांच आदेश शिकायत के आधार पर निर्भर करते हैं। कुछ मामलों में शिकायत के तुरंत बाद निलंबन कर दिया जाता है। ऐसे मामलों में जांच अधिकारी को 90 दिन के भीतर जांच रिपोर्ट तैयार कर सौंपना अनिवार्य है। उसके बाद मामले में चार्जशीट, बर्खास्तगी की प्रक्रिया शुरू होती है। वहीं अन्य तरह के मामलों में भी एक से तीन माह में जांच पूरी करनी होती है।
कानूनी विवादों में भी उलझा है विभाग
करीब आठ हजार से ज्यादा मामले शिक्षा विभाग से जुड़े हैं जो विभिन्न अदालतों में चल रहे हैं। इसमें ज्यादातर मामले वरिष्ठता सूची, वेतनमान, पदोन्नति व वित्तीय लाभ से जुड़े हुए हैं। कई शिक्षक सेवानिवृत्त हो चुके हैं, लेकिन उनके मामले अभी तक चल रहे हैं। स्कूल शिक्षा निदेशालय में एक ब्रांच कानूनी मामलों को ही देख रही हैं।
यह भी पढ़ें: हिमाचल: क्या खत्म हो गया राजनीतिक टकराव? जयराम के जन्मदिन पर बधाई देने पहुंचे राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी
यह भी पढ़ें: हिमाचल में हुआ था इंदौर जैसा घटनाक्रम, दूषित पानी ने ले ली थी 32 लोगों की जान; ताजा घटनाक्रम के बाद नए निर्देश जारी |
|