मंत्री इरफान अंसारी का पुतला दहन करते मुस्लिम समाज के लोग। (फोटो जागरण)
जागरण संवाददाता, जामताड़ा। \“मौलाना है तो घर से निकालो, आदिवासी है तो घर के अंदर बैठाओ और चाय पिलाओ…\“ झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री एवं जामताड़ा के विधायक इरफान अंसारी का यह बयान जैसे ही सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, वैसे ही क्षेत्र के उलेमाओं में उबाल आ गया।
स्वास्थ्य मंत्री के विधानसभा क्षेत्र जामताड़ा के लखनूडीह मोड़ पर मंगलवार संध्या मुस्लिम समुदाय के लोग एकत्र हुए और मंत्री के खिलाफ नारेबाजी करते हुए उनका पुतला दहन किया। पुतला दहन कार्यक्रम का नेतृत्व कर रहे लोगों ने एक स्वर में कहा कि जिनके वोट से डॉ. इरफान अंसारी विधायक से लेकर मंत्री बने हैं, उन्हें ही वे इज्जत देना नहीं जानते।
लोगों ने आरोप लगाया कि यदि कोई मौलाना उनके आवास पर किसी काम से जाता है तो उसे दुत्कार दिया जाता है। आखिर उन्हें यह हक किसने दिया कि क्षेत्र की जनता के लिए अपमानजनक शब्दों का चयन किया जाए। आदिवासी हों, मुस्लिम हों या हिंदू-सभी का वोट बराबर होता है। ऐसा नहीं होना चाहिए कि आदिवासी मतदाता को सिंहासन दिया जाए और मुस्लिम मतदाता को घर से निकाल दिया जाए।
मौके पर मौजूद लोगों ने कहा कि मंत्री की इस करतूत ने मुस्लिम समुदाय के दिलों को गहरी ठेस पहुंचाई है। उन्होंने कहा कि वे लोग सच्चे दिल से मंत्री के समर्थक रहे हैं, लेकिन उनके समर्थन का इस तरह अपमान किया गया है। हम इतने बुजदिल नहीं हैं कि जो वे करेंगे, उसे चुपचाप स्वीकार करते चले जाएं।
लोगों ने यह भी कहा कि सोशल मीडिया पर प्रसारित यह वीडियो किसी और ने नहीं, बल्कि इरफान अंसारी की ही आइडी से देखा गया है। आज भले ही स्वास्थ्य मंत्री इसे क्रॉप किया हुआ वीडियो बता रहे हों, लेकिन ईमानदारी से वे इसे गलत नहीं कह सकते।
उन्होंने कहा कि आज बड़े ओहदे पर बैठे मंत्री के पास यदि कोई मौलाना या मुस्लिम समुदाय का व्यक्ति जाता है, तो वह किसी आवश्यक कार्य से ही जाता है। तभी वे उनके दफ्तर या आवास तक पहुंचते हैं। ऐसे में मंत्री को अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि उन्हें मंत्री बने रहने का कोई अधिकार नहीं है। समाज के लोगों ने मंत्री की इस करतूत की घोर निंदा की। मौके पर पूर्व मुखिया मो. शाहिद, मुस्तफा, मनीरुद्दीन, जहूर, जियाउल समेत विभिन्न गांवों के लोग मौजूद थे। |