आंकड़ों की प्रविष्टि से बच रहे विश्वविद्यालय से लेकर कालेजों तक के पदाधिकारी व शिक्षक। फाइल फोटो
जागरण संवाददाता, दरभंगा। LNMIU Samarth Portal News: ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय (एलएनएमयू) में भारत सरकार की महत्वाकांक्षी समर्थ पोर्टल योजना अभी तक छात्रों के लिए लाभकारी साबित नहीं हो पाई है।
विश्वविद्यालय और अंगीभूत महाविद्यालयों तक सीमित क्रियान्वयन के कारण संबद्ध महाविद्यालयों के छात्र इस डिजिटल सुविधा से वंचित हैं। स्थिति यह है कि समर्थ पोर्टल के नाम पर फिलहाल केवल शिक्षकों का प्रोफाइल और अवकाश मॉड्यूल ही सक्रिय किया गया है।
सूत्रों के अनुसार विश्वविद्यालय से लेकर कॉलेज स्तर तक के पदाधिकारी और शिक्षक आंकड़ों की प्रविष्टि से बचते नजर आ रहे हैं, जिससे पोर्टल का पूर्ण क्रियान्वयन ठप पड़ा है। छात्रों से जुड़ी अहम सुविधाएं—जैसे नामांकन, परीक्षा, वेतन, शोध अनुदान और शैक्षणिक रिकॉर्ड—अब तक समर्थ पोर्टल से नहीं जोड़ी जा सकी हैं।
संबद्ध महाविद्यालय पोर्टल से बाहर
एलएनएमयू के अधीन चार जिलों में संचालित अधिकांश संबद्ध महाविद्यालय अभी तक समर्थ पोर्टल से नहीं जुड़े हैं। जबकि विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक सभी संबद्ध कॉलेजों को इस प्लेटफॉर्म से नहीं जोड़ा जाएगा, तब तक छात्रों को इसका वास्तविक लाभ नहीं मिल सकता। समर्थ पोर्टल को उच्च शिक्षा को अधिक पारदर्शी, तकनीकी और प्रभावी बनाने के उद्देश्य से तैयार किया गया है।
बिना आधिकारिक ईमेल के बना दिए गए प्रोफाइल
विश्वविद्यालय प्रशासन पर यह भी सवाल उठ रहे हैं कि शिक्षकों का प्रोफाइल बिना विश्वविद्यालय डोमेनयुक्त आधिकारिक ईमेल जारी किए ही समर्थ पोर्टल पर बना दिया गया। कई मामलों में निजी ईमेल आईडी को ही आधिकारिक ईमेल के रूप में दर्ज कर दिया गया है, जबकि संस्थागत पोर्टल के उपयोग के लिए डोमेन ईमेल अनिवार्य होता है।
प्रोफाइल में गूगल स्कॉलर, रिसर्चगेट समेत अन्य शैक्षणिक आईडी की मांग की गई है, लेकिन आधारभूत सुविधा के रूप में आधिकारिक ईमेल अब तक उपलब्ध नहीं कराए गए।
पांच साल से ईमेल की मांग, अब भी इंतजार
गौरतलब है कि वर्ष 2020 में पैट-2019 के कई पीएचडी शोधार्थियों ने तत्कालीन कुलपति से विश्वविद्यालय डोमेनयुक्त ईमेल की मांग की थी, लेकिन पांच वर्ष बीत जाने के बावजूद इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। हाल ही में आनन-फानन में कुछ अंगीभूत और संबद्ध महाविद्यालयों को डोमेन ईमेल जारी किए गए, फिर भी अधिकांश शिक्षक और शोधार्थी अब भी इससे वंचित हैं।
तकनीकी विशेषज्ञों का कहना है कि विश्वविद्यालय डोमेनयुक्त ईमेल न केवल संस्थागत पहचान देता है, बल्कि इसे अधिक विश्वसनीय और सुरक्षित भी माना जाता है। निजी ईमेल की तुलना में इसका उपयोग शैक्षणिक और प्रशासनिक कार्यों में अधिक प्रभावी होता है।
संबद्ध कॉलेजों को जोड़ना अनिवार्य
वरिष्ठ प्रोफेसर विजय कुमार चौधरी ने कहा कि नामांकन प्रक्रिया को समर्थ पोर्टल पर लागू करने से पहले विश्वविद्यालय को सभी अंगीभूत और संबद्ध महाविद्यालयों को पोर्टल से जोड़ना चाहिए। इसके लिए शिक्षकों और कर्मचारियों को समुचित प्रशिक्षण देना भी जरूरी है।
उन्होंने कहा कि बिना प्रशिक्षण के पोर्टल संचालन में कठिनाइयां आएंगी और अंगीभूत व संबद्ध महाविद्यालयों के बीच भेदभाव कतई उचित नहीं है। समर्थ पोर्टल के पूर्ण क्रियान्वयन में हो रही देरी विश्वविद्यालय हित में नहीं है।
विश्वविद्यालय का पक्ष
इस संबंध में एलएनएमयू के मीडिया प्रभारी डॉ. बिंदु चौहान ने बताया कि भारत सरकार के निर्देशों के अनुसार समर्थ पोर्टल के क्रियान्वयन का कार्य जारी है।
उन्होंने कहा, लीव मॉड्यूल के साथ-साथ स्थायी शिक्षकों के पेरोल और पेंशनर्स के पेंशन भुगतान मॉड्यूल पर काम किया जा रहा है। |
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