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तापमान के उतार-चढ़ाव से आलू के बाद दलहन और तिलहन पर संकट, कृषि रक्षा विशेषज्ञ ने जारी की फसलों के बचाव की एडवाइजरी

Chikheang 2026-1-7 16:26:40 views 718
  



संवाद सूत्र, बाराबंकी। वर्तमान में रबी की मुख्य दलहनी एवं तिलहनी फसलों में तापमान के उतार-चढ़ाव के कारण लगने वाले सामयिक कीट रोग के प्रकोप का संकट बढ़ गया है। कृषि रोग विशेषज्ञों ने अलर्ट घोषित कर दिया है। अब आलू के बाद दलहन ओर सरसों पर रोग का खतरा बढ़ा है। बचाव की एडवाइजरी भी जारी कर दी गई है। वहीं, घना कोहरे के साथ ही बुधवार सुबह से शीत लहर चली, जो शाम तक चलती रही है, जिससे लोग ठिठुरते नजर आए।


जिले में आलू की लगभग 24 हजार से अधिक हेक्टेयर में फसल है। जिला कृषि रक्षा अधिकारी विजय कुमार ने बताया कि मौसम में नमी एवं ठंडी बनी रहने के कारण आलू में रोग का प्रकोप बढ़ा है। ऐसे में आलू की फसल में झुलसा बीमारी के बचाव के लिए फंफूदीनाशक मैंकोजैब 75 प्रतिशत अथवा जिनेब 75 प्रतिशत दो से 2.5 किग्रा प्रति हेक्टेयर की दर से 400-500 लीटर पानी में मिलाकर रोग लगने से पहले किसान छिड़काव कर लें। फसल में झुलसा लग जाने की दशा में 500 ग्राम कार्बेंडाजिम 50 प्रतिशत को दो किग्रा मैकोंजेब 75 प्रतिशत प्रति हेक्टेयर प्रयोग करें।

तिलहन फसल में बचाव के उपाय


जिला कृषि रक्षा अधिकारी ने बताया कि राई या सरसों में आरा मक्खी के नियंत्रण के लिए डाइमेथोएट 30 प्रतिशत ईसी (650 मिली/हेक्टेयर) या क्विनालफास 25 प्रतिशत ईसी (1.2 लीटर प्रति हेक्टेयर) 700 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें। चना, मटर, मसूर में कटुआ कीट के जैविक नियंत्रण के लिए मेटाराइजियम एनिसोप्लिए (2.5 किग्रा प्रति हेक्टेयर) को 400-500 लीटर पानी में घोलकर सायंकाल किसान छिड़काव करें।

मटर की तना मक्खी के नियंत्रण के लिए लेंबड़ा सायहेलोथ्रिन 4.9 प्रतिशत सीएस (300 मिली प्रति हेक्टेयर का छिड़काव करें। किसानों को अपनी फसलों की नियमित निगरानी करनी चाहिए। विकास खंडों में स्थित कृषि रक्षा इकाइयों पर 50 प्रतिशत अनुदान पर कृषि रक्षा रसायन उपलब्ध कराई जा रही है।
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