LHC0088 • The day before yesterday 17:26 • views 945
फाइल फोटो।
जागरण संवाददाता, जमशेदपुर। मोबाइल चोरी के आरोप में गिरफ्तार किए गए 22 वर्षीय युवक की मौत के मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने संज्ञान लेते हुए प्रकरण को दर्ज कर लिया है। आयोग ने इस मामले में इसकी जानकारी मानवाधिकार कार्यकर्ता मनोज मिश्रा को ई-मेल के माध्यम से दी है।
एनएचआरसी की इस कार्रवाई के बाद मामला और अधिक गंभीर हो गया है। मामला MG थाना क्षेत्र के गोकुल नगर निवासी जीत महतो से जुड़ा है। मनोज मिश्रा द्वारा आयोग को दी गई शिकायत के अनुसार, 29 दिसंबर 2025 को एमजीएम थाना पुलिस ने जीत महतो को मोबाइल चोरी के आरोप में गिरफ्तार किया था। स्वजनों का कहना है कि गिरफ्तारी के समय ही उसकी तबीयत खराब थी और उसकी पत्नी नौ माह की गर्भवती थी। इसके बावजूद पुलिस ने स्वास्थ्य स्थिति को गंभीरता से नहीं लिया। आरोप है कि जीत महतो को लगातार दो दिनों तक थाना में रखकर पूछताछ की गई और इस दौरान परिजनों को उससे मिलने की अनुमति नहीं दी गई। इसी अवधि में उसकी हालत लगातार बिगड़ती चली गई। जब उसकी स्थिति बेहद नाजुक हो गई, तब पुलिस द्वारा उसे सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
परिजनों के अनुसार, जिस दिन जीत की मौत हुई, उसी दिन उसकी पत्नी ने एक बच्चे को जन्म दिया। इस तरह नवजात ने जन्म लेते ही अपने पिता को खो दिया, जिससे परिवार गहरे सदमे में है। मौत के बाद पुलिस द्वारा पीड़ित परिवार को दो लाख रुपये की राशि दिए जाने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। परिजनों का आरोप है कि यह स्पष्ट नहीं किया गया कि यह राशि किस मद में और किस स्रोत से दी गई। वहीं, जमशेदपुर के एसपी ने पुलिसकर्मियों का बचाव करते हुए कहा है कि अस्पताल ले जाने से पहले जीत महतो को पीआर बांड पर रिहा कर दिया गया था और मानवीय आधार पर उसे पुलिस वाहन से अस्पताल पहुंचाया गया। मनोज मिश्रा ने एनएचआरसी को बताया कि इस मामले को लेकर राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों में भारी आक्रोश है। उन्होंने आयोग से उच्चस्तरीय जांच, पीड़ित परिवार को उचित सरकारी मुआवजा, दोषी पुलिसकर्मियों पर सख्त कार्रवाई और थानों में थर्ड डिग्री पर रोक के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाए जाने की मांग की है। |
|