ओखला फेज-दो में दिल्ली जल बोर्ड के टैंकर से पानी भरते लोग। विपिन शर्मा
जागरण संवाददाता, दक्षिणी दिल्ली। राजधानी दिल्ली के कई ऐसे इलाके और कॉलोनियां हैं, जहां अब तक या तो पाइप लाइन नहीं पहुंची है, यदि पहुंची भी हैं तो वहां सप्लाई नहीं है। साथ जिन इलाकों में चार-पांच दशक से सप्लाई हो भी रही है, वहां लाइनें क्षतिग्रस्त हैं। लीकेज के साथ ही गंदगी युक्त पानी आने का शिकायत भी लगातार मिलती रहती है।
ओखला फेज-दो में की बड़ी आबादी को आज तक पाइपलाइन से सप्लाई का इंतजार है। साफ पानी के लिए तरसते रहते हैं। पीने के पानी के लिए लोग जल बोर्ड के टैंकर पर निर्भर हैं, जो दो या कभी-कभी तीन दिन के अंतराल पर मिल पाता है। यहां का तो ये हाल है कि पानी का टैंकर पहुंचते ही लोग खाली बर्तन लेकर दौड़ पड़ते हैं।
25 रुपये गैलन का पानी खरीदते हैं लोग
अबुल फजल एन्क्लेव और शाहीनबाग की बात करें तो लगभग तीन लाख की आबादी यहां निवास करती है। आज तक यहां पाइपलाइन से पानी ही नहीं पहुंचा। कुछ ब्लाकों में हाल ही में लाइन है डाली गई, पर मुख्य लाइन को जोड़ा जाना अभी बाकी है। पीने के लिए लोग ठेले पर बिकने वाले 20 से 25 रुपये गैलन का पानी खरीदते हैं।
वहीं अन्य कार्यों के लिए बोरिंग का पानी इस्तेमाल होता है। यही हाल संगम विहार और देवली के भी कुल इलाकों का है। कहीं पेयजल लाइन नहीं, जहां है भी वहीं सप्लाई नहीं। टैंकर के सहारे लोग बैठे रहते हैं। साकेत, पुष्प विहार, सीआर पार्क, जीके-एक, जीके-दो, कालकाजी, ईस्ट आफ कैलाश, न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी आदि इलाकों में पानी के साथ ही सीवर लाइन भी लगभग पांच दशक पुरानी हैं।
फेडरेशन ऑफ आरडब्ल्यूए साकेत के पूर्व अध्यक्ष राकेश डबास, एनएफसी को-ऑपरेटिव हाउस बिल्डिंग सोसायटी के कोषाध्यक्ष अरुण जग्गी व ईस्ट ऑफ कैलाश आरडब्ल्यूए सदस्य पवन शर्मा के मुताबिक दोनों लाइनें पुरानी और जगह-जगह से क्षतिग्रस्त हैं।
इसके चलते जल बोर्ड के सप्लाई पानी में कई बार गंदा मिक्स होकर आता है। समय-समय पर जल बोर्ड, एमसीडी समेत जनप्रतिनिधियों से शिकायत भी की जाती है। मौके पर निराकरण भी होता है।पर जब तक सभी लाइनें नए सिरे से बदली नहीं जाएंगी, पूर्ण समाधान होना मुश्किल है।
सीआर पार्क, जीके और कालकाजी में पांच दशक पुरानी लाइनें
दक्षिणी दिल्ली के प्रमुख इलाके सीआर पार्क, ग्रेटर कैलाश, कालकाजी आदि में पेयजल के लिए दशकों पुरानी लाइनें हैं। सीआर पार्क और ग्रेटर कैलाश में लगभग चार से पांच दशक पुरानी लाइनें कई जगहों से क्षतिग्रस्त हैं।
लीकेज के चलते जहां पेयजल बर्बाद होता है, वहीं जीके-एक, दो, अलकनंदा और चिराग दिल्ली जैसे इलाकों में सीवेज का पानी मिलने का खतरा बना रहता है। लंबी शिकायतों के बाद अब दिल्ली जल बोर्ड क्षेत्र में पाइप लाइन बदलने का काम करा रहा है।
जल बोर्ड के एक अधिकारी के मुताबिक कृषि विहार से चिराग दिल्ली इलाके तक छह किलोमीटर लंबी पानी की पाइपलाइन को बदली जा रही है। ग्रेप-तीन और चार लगने के बाद काम रुक गया था। पाबंदियां हटने के बाद अब जल्द ही फिर से पाइप लाइन बदलने का काम शुरू होगा। जल बोर्ड छोटे-छोटे ब्लाक में काम कराएगा, ताकि लाल बहादुर शास्त्री मार्ग पर यातायात प्रभावित न होने पाए। |