तुर्कमान गेट के पीछे गली में गश्त करते अर्धसैनिक बल के जवान। चंद्र प्रकाश मिश्र
नेमिष हेमंत, नई दिल्ली। आसफ अली मार्ग स्थित तुर्कमान गेट के सामने 50 वर्ष बाद मंजर दोहरा रहा है। जहां बुलडोजर गरज रहा है और कर्फ्यू जैसा माहौल है। दरगाह फैज इलाही का अतिक्रमण तोड़ने के बाद से तुर्कमान गेट के आसपास का माहौल तनावपूर्ण है। पुरानी दिल्ली का यह इलाका अनिश्चितता और आशंका से घिरा हुआ है।
मुख्य मार्ग से लेकर गलियों तक में भारी संख्या में सुरक्षा बल तैनात है। जगह-जगह बैरिकेडिंग, वाहन और ठेले खड़े कर वाहनों के आवाजाही के साथ ही लोगों के आने-जाने पर पाबंदी लगा दी गई है।
तुर्कमान गेट व हज मंजिल के पास बैरिकेड लगाकर तैनात अर्द्धसैनिक बल के जवान। फोटो- हरीश कुमार
आसफ अली मार्ग, तुर्कमान गेट मुख्य बाजार, चितली कबर, तिराहा बैरम खां, गधे वालान जैसे बाजार के साथ दुकानें बंद है तो लोग घरों में दुबके हुए हैं। कहीं लोग जमा हो रहे हैं तो उन्हें तुरंत हटने को कहा जा रहा है।
घरों में दुबके सहमे लोग
स्थानीय लोग मामले में कुछ बोलने से परहेज कर रहे हैं, जबकि, अफवाहों का बाजार गर्म है। अच्छी बात यह रही है कि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के साथ ही प्रशासन द्वारा यह स्पष्ट कर दिया गया कि यह कार्रवाई मस्जिद पर नहीं बल्कि उससे सटे निर्माण पर हुई है। हालांकि, जो तनाव और अनिश्चितता है उसमें कुछ दिनों तक यहां के हालात ऐसे ही रह सकते हैं।
तुर्कमान गेट के पीछे गली में तैनात आरएएफ के जवान। हरीश कुमार
आपातकाल में भी चला था बुलडोजर
करीब 50 वर्ष पूर्व आपातकाल के दौरान भी तुर्कमान गेट के आस-पास बुलडोजर ने घरों-दुकानों को निशाना बनाया था। वर्ष 1976 में 19 अप्रैल को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के पुत्र संजय गांधी के आदेश पर यहां बुलडोजर कार्रवाई हुई थी और करीब 700 मकानों को तोड़ा गया था।
जिसका स्थानीय लोगों ने भरपूर विरोध किया था। स्थानीय लोग बताते हैं कि तब पुलिस से झड़प में पांच से अधिक लोगों की मौतें हुई थी, जबकि 50 से अधिक लोग घायल हुए थे। बाद में सैकड़ों लोगों को गिरफ्तार किया गया था।
मस्जिद कमेटी ने खुद तोड़ा था अवैध निर्माण का कुछ हिस्सा
मस्जिद कमेटी के लोगों का कहना है कि दो सप्ताह पूर्व उन्होंने एमसीडी द्वारा चिन्हित अतिक्रमण का कुछ हिस्सा तोड़ा भी था। वहीं, जिस हिस्से पर एमसीडी की कार्रवाई हुई है, उसका मामला हाई कोर्ट में चल रहा है।
ऐसे में उसके निर्णय का इंतजार था कि यह कार्रवाई हो गई। कमेटी से जुड़े नजमुद्दीन चौधरी ने दावा किया कि जहां अतिक्रमण बताकर कार्रवाई हुई, वह वक्फ की जमीन है।
वर्ष 1990 के बाद से है अवैध निर्माण
स्थानीय निवासियों के अनुसार, जिस हिस्से को ढहाया गया है, उसका निर्माण वर्ष 1990 के बाद से है। उसके पूर्व यह कब्रिस्तान थी। साथ ही एक दंगल था। बाद में मस्जिद कमेटी ने चारदीवारी खड़ी कर बारात घर का निर्माण किया गया था।
वहीं, वर्ष 2000 में दरगाह फैज इलाही का सुंदरीकरण हुआ था। दरगाह फैज इलाही के बारे में बताया जाता है कि यह सैकड़ों वर्ष पुरानी है।
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