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हिमाचल में ड्राइविंग लाइसेंस बनाने की प्रक्रिया बदलेगी, अब शोरूम में ही मिलेगा स्थायी नंबर; सरकार के बड़े निर्णय

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हिमाचल प्रदेश के उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री। जागरण  



राज्य ब्यूरो, शिमला। हिमाचल प्रदेश में परिवहन विभाग ड्राइविंग लाइसेंस बनाने के लिए मेडिकल सर्टिफिकेट जमा करने की प्रक्रिया में बदलाव करने जा रहा है। लाइसेंस नवीनीकरण के लिए अभी आवेदक को खुद मेडिकल सर्टिफिकेट अपलोड करना होता है। विभाग इस प्रक्रिया को बदलने जा रहा है। आवेदक के बजाय प्रमाणित डाक्टर सारथी पोर्टल पर मेडिकल सर्टिफिकेट अपलोड करेंगे।

केवल पंजीकृत व अधिकृत डाक्टर ही मेडिकल सर्टिफिकेट को आनलाइन अपलोड कर सकेंगे। इससे फर्जी व अप्रमाणिक मेडिकल प्रमाणपत्रों पर रोक लगेगी। चिकित्सीय रूप से सक्षम चालकों को ही लाइसेंस नवीनीकरण की अनुमति मिल सकेगी।  
अब अस्थायी नंबर नहीं मिलेगा

उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने बुधवार को शिमला में पत्रकारों से बातचीत में यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि विभाग वाहनों के पंजीकरण में एक और बदलाव करने जा रहा है। गाड़ी जब शोरूम से निकलती है तो उसे अस्थायी नंबर मिलता है। अब ऐसा नहीं होगा और शोरूम में ही वाहनों को स्थायी नंबर मिल जाएगा। इसके लिए नई कार्यप्रणाली तैयार की जा रही है।  
टैक्सी परमिट की अवधि बढ़ी

चुनाव में टैक्सी चालकों से परमिट अवधि बढ़ाने का वादा किया था। केंद्र सरकार के समक्ष इसे मामले को उठाया गया। अब टैक्सी परमिट की अवधि 12 वर्ष बढ़कर 15 साल हो गई है। देशभर के टैक्सी आपरेटर को इसका फायदा मिला है। सरकार इसी तरह ट्रकों के नेशनल परमिट की अवधि 12 से 15 साल करने का मामला केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी के समक्ष उठाएगी।
दलालों व भ्रष्टाचार का खेल खत्म, परिवहन विभाग में डिजिटल युग की शुरुआत

उपमुख्यमंत्री ने कहा कि लोगों को परिवहन सुविधाओं के लिए आरटीओ कार्यालयों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। हिमाचल परिवहन विभाग में डिजिटल युग की शुरुआत कर दी गई है। फरवरी से गुड्स कैरिज, नेशनल परमिट, कांट्रेक्ट टूरिस्ट परमिट आनलाइन जारी करना शुरू कर दिया है। अब तक 6543 लोगों को सुविधा प्राप्त हो गई है। 20 दिन के भीतर स्वत: मंजूरी मिल जाती है।

वाहन फिटनेस सेवाओं को डिजिटल किया गया है। विभाग ने मोबाइल फिटनेस एप शुरू की है। इस एप से मोटर व्हीकल इंस्पेक्टर द्वारा सभी वाणिज्यिक वाहनों का डिजिटल फिटनेस निरीक्षण सुनिश्चित किया गया है। इसमें फोटो और जीपीएस आधारित साक्ष्य उपलब्ध होंगे। इससे पूरी प्रक्रिया पेपरलेस होगी। अब तक 14018 वाहनों को फिटनेस प्रमाणपत्र जारी किया गया है। इससे इन कार्यों में सक्रिय दलालों व भ्रष्टाचार का खेल खत्म होगा।
अप्रैल में शुरू होगा प्रदेश का पहला ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक

ड्राइविंग टेस्ट अब आरटीओ व एमवीआइ के बजाय टेस्ट ट्रैक पर होंगे। ऊना जिला के हरोली में स्वचालित ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक बनाया जा रहा है। प्रदेश का यह पहला ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक अप्रैल में शुरू हो जाएगा। पांच अन्य स्थानों पांवटा साहिब, नालागढ़, घुमारवीं, कांगड़ा और हमीरपुर में ऐसे ट्रैक बनाए जा रहे हैं। इसके बाद लाइसेंस बनाने के लिए लोगों को ड्राइविंग टेस्ट का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। विभाग प्रदेश में आटोमेटिक टेस्टिंग सेंटर स्थापित कर रहा है। ऊना के हरोली व नादौन में काम प्रगति पर है। रानीताल में 121 वाहनों की फिटनेस आटोमेटिक तरीके से कर दी गई है। इनमें दो वाहनों की फिटनेस दोबारा करने को कहा गया है। बिलासपुर, कांगू, नालागढ़ व पांवटा साहिब में आटोमेटिक टेस्टिंग सेंटर व ड्राइविंग टेस्ट सेंटर बनाए जा रहे हैं। केंद्र सरकार ऐसे दोनों सेंटर बनाने के लिए अनुदान देती है। हिमाचल में जमीन की कमी है। केंद्र सरकार से आग्रह किया है कि दोनों केंद्र अलग-अलग बनाने की अनुमति दी जाए। केंद्र ने इसे माना है। उम्मीद है जल्द हिमाचल को यह सुविधा मिलेगी। प्रदेश में अब तक 2257 वाहनों की स्क्रैपिंग हो चुकी है।  

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विंटेज वाहनों का पंजीकरण शुरू

उपमुख्यमंत्री ने कहा कि विंटेज वाहनों के पंजीकरण की शुरुआत कर दी गई है। 50 व इससे अधिक वर्ष पुराना वाहन विंटेज की श्रेणी में आएगा। वीए सीरीज में नंबर मिलेगा। 10 वर्ष का विशेष पंजीकरण दिया जाएगा। इन्हें रोजाना व व्यावसायिक उपयोग में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। इस कदम से पुराने और ऐतिहासिक महत्व के वाहनों को सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी। इनलैंड वाटरवेज अथारिटी आफ इंडिया द्वारा 23 जनवरी को कोच्चि में आयोजित बैठक में हिमाचल इनलैंड वाटर वेज अथारिटी आफ इंडिया के बीच समझौता हुआ है। राज्य में जल परिवहन और सतलुज नदी व गोबिंदसागर झील व कोल डैम क्षेत्र में जल परिवहन परियोजनाओं को तकनीकी सहयोग मिलेगा। इस समझौते के अनुरूप प्रदेश में जल परिवहन परियोजनाओं की योजना बनाने और सर्वे कराने में आसानी होगी।   
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