राज्य ब्यूरो, लखनऊ। विधान सभा के बजट सत्र के चौथे दिन गुरुवार को प्रश्नकाल के दौरान किन्नर समाज के अधिकारों का मुद्दा उठा। समाज कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण ने कहा कि किन्नरों के अधिकारों के संरक्षण के लिए नियमावली बनाने की कार्यवाही प्रक्रियाधीन है। जल्द ही यह नियमावली बन जाएगी।
सपा के जसराना से विधायक इंजीनियर सचिन यादव के प्रश्न पर मंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार ट्रांसजेंडर समुदाय को मुख्यधारा से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाने के लिए पूरी तरह संवेदनशील और प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम 2019 के तहत ‘उत्तर प्रदेश ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) नियमावली 2026’ तैयार किए जाने की प्रक्रिया जारी है।
मंत्री ने कहा कि सबसे पहले ट्रांसजेंडर व्यक्तियों की पहचान सुनिश्चित करना आवश्यक है। सरकार द्वारा उनके पहचान पत्र बनाए जाने की पहल की गई है और आयुष्मान कार्ड से जोड़ने के लिए भी प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि उन्हें स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ मिल सके।
सदस्य ने पूछा था कि प्रदेश में ट्रांसजेंडर समुदाय को आत्मनिर्भर बनाने के लिए विशेष नीति बनाने पर सरकार क्या विचार कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में इनकी संख्या लगभग एक लाख 37 हजार है और 96 प्रतिशत लोगों को भेदभाव का सामना करना पड़ता है।
सरकार इस वर्ग की सुध नहीं ले रही है। इस पर मंत्री ने कहा, “मेरे ख्याल से पहली बार विधान सभा में ऐसा मुद्दा उठा है, हालांकि सदस्य जो कह रहे हैं वह पूरी तरह सत्य नहीं है। सरकार किन्नर समाज के लिए कई स्तरों पर कार्य कर रही है।”
ओडीओपी योजना से 3.16 लाख लोगों को मिला रोजगार
सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री राकेश सचान ने विधान सभा में सपा सदस्य आशु मलिक के प्रश्न पर कहा कि वर्ष 2018 में प्रारंभ की गई ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट’ (ओडीओपी) योजना ने प्रदेश के पारंपरिक कारीगरों और उत्पादकों को नई पहचान दी है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ दोनों उपहार में ओडीओपी के उत्पाद ही देते है। यह योजना परंपरागत उत्पादों को प्रोत्साहन देने, कारीगरों को प्रशिक्षण, टूल किट और वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने की दिशा में निरंतर प्रभावी रूप से संचालित हो रही है।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2017-18 में प्रदेश का निर्यात 86 हजार करोड़ रुपये था, जो बढ़कर 1.86 लाख करोड़ रुपये हो गया है, जिसमें लगभग 50 प्रतिशत योगदान ओडीओपी एवं हस्तशिल्प उत्पादों का है। वर्ष 2018 से अब तक इस योजना के माध्यम से 3.16 लाख लोगों को रोजगार मिला है।
मंत्री ने बताया कि पिछले वित्तीय वर्ष के बजट में 145 करोड़ रुपये का प्रविधान किया गया था, जिसमें से 135 करोड़ रुपये की मार्जिन मनी वितरित की जा चुकी है। चालू वित्तीय वर्ष में इस योजना के लिए 200 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। साथ ही प्रदेश में 79 उत्पादों को जीआई टैग प्राप्त हुआ है, जिससे वैश्विक स्तर पर ब्रांडिंग को बल मिला है।
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