बेहद जरूरी है काम और जिंदगी के बीच संतुलन (Picture Courtesy: Freepik)
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी और \“हमेशा कनेक्टेड\“ रहने वाली डिजिटल संस्कृति में वर्क-लाइफ बैलेंस बनाए रखना एक बड़ी चुनौती बन गया है। काम के बढ़ते दबाव और पर्सनल जिम्मेदारियों के बीच बैलेंस खोने से न केवल मानसिक तनाव बढ़ता है, बल्कि इसका सीधा असर हमारे शारीरिक स्वास्थ्य और रिश्तों पर भी पड़ता है।
इसलिए वर्क-लाइफ बैलेंस बनाना काफी जरूरी है। हालांकि, इसका मतलब काम को पूरी तरह छोड़ना बिल्कुल नहीं है, बल्कि अपने प्रोफेशनल और पर्सनल लाइप के बीच एक स्वस्थ तालमेल बिठाना है। आइए जानें कुछ असरदार तरीके (Tips for Work-Life Balance), जिनसे आप बेहतर वर्क-लाइफ बैलेंस बना सकते हैं।
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प्रायोरिटी सेट करें और \“ना\“ कहना सीखें
हर काम को एक ही समय पर पूरा करना मुमकिन है। दिन की शुरुआत में ही अपने कामों की एक सूची बनाएं और उन्हें जरूरी और सामान्य कैटेगोरी में बांटें। सबसे जरूरी काम पहले निपटाएं। साथ ही, अपनी क्षमताओं को पहचानें, अगर आपके पास पहले से बहुत काम है, तो विनम्रता के साथ नए कामों के लिए \“ना\“ कहना सीखें।
वर्कप्लेस और पर्सनल टाइम की बाउंडरी सेट करें
वर्क फ्रॉम होम के दौर में काम और घर के बीच की रेखा धुंधली हो गई है। इसे ठीक करने के लिए काम शुरू करने और खत्म करने का एक समय तय करें। छुट्टी के दिन ऑफिस के ईमेल या मैसेज चेक करने से बचें। घर में एक अलग कोना बनाएं जिसे आप केवल ऑफिस के काम के लिए इस्तेमाल करें।
डिजिटल डिटॉक्स अपनाएं
तकनीक ने काम को आसान बनाया है, लेकिन इसने हमें हर समय \“उपलब्ध\“ रहने पर मजबूर कर दिया है। रात को सोने से कम से कम एक घंटा पहले और सुबह उठते ही फोन से दूरी बनाएं। सोशल मीडिया और काम के नोटिफिकेशंस को बंद करना आपके दिमाग को शांत रखने में मदद करेगा।
स्वास्थ्य को सबसे पहले रखें
अगर आप शारीरिक रूप से स्वस्थ नहीं हैं, तो आप अपना बेस्ट परफॉर्मेंस कभी नहीं दे पाएंगे। इसलिए नियमित एक्सरसाइज करना जरूरी है। योग या केवल 30 मिनट की सैर भी आपके तनाव को कम कर सकती है। साथ ही, 7-8 घंटे की गहरी नींद दिमाग की काम करने की क्षमता को बढ़ाती है। कैफीन और जंक फूड के बजाय पौष्टिक खाने पर ध्यान दें।
खुद के लिए और अपनों के लिए समय निकालें
अक्सर हम काम की व्यस्तता में उन हॉबीज को भूल जाते हैं जो हमें खुशी देते हैं। चाहे वह पेंटिंग हो, संगीत सुनना हो या कोई किताब पढ़ना, हफ्ते में कुछ घंटे अपनी हॉबीज के लिए जरूर निकालें। साथ ही, परिवार और दोस्तों के साथ बिताया गया \“क्वालिटी टाइम\“ आपको इमोशनली मजबूत बनाता है।
छोटे ब्रेक लें
लगातार घंटों तक स्क्रीन के सामने बैठने से प्रोडक्टिविटी घटती है। हर एक-दो घंटे में 5-10 मिनट का ब्रेक लें। थोड़ा टहलें, पानी पिएं या बस गहरी सांसें लें। ये छोटे इंटरवेल आपको दिमागी रूप से रीचार्ज कर देते हैं।
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