शोभित श्रीवास्तव, लखनऊ। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) अभियान के तहत प्रदेश में भले ही मतदाताओं की संख्या में बड़ी कमी दर्ज की गई हो, लेकिन इसके उलट पोलिंग बूथों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। एसआइआर के बाद प्रदेश में कुल 2.89 करोड़ मतदाता कम हो गए हैं, इसके बावजूद 15030 नए पोलिंग बूथ बनाए गए हैं। इसके पीछे मुख्य कारण प्रति बूथ मतदाताओं की संख्या का मानक बदलना है।
अब तक जहां एक पोलिंग बूथ पर अधिकतम 1500 मतदाता निर्धारित थे, वहीं नए प्रविधान के तहत यह संख्या घटाकर 1200 कर दी गई है। इसी वजह से बड़े-बड़े बूथों को विभाजित कर नए बूथ तैयार किए गए हैं। इसके परिणामस्वरूप प्रदेश में पोलिंग बूथों की कुल संख्या बढ़कर 1,77,516 हो गई है।
इनमें शहरी क्षेत्रों में 43,849 और ग्रामीण क्षेत्रों में 1,33,667 पोलिंग बूथ शामिल हैं। मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के मुताबिक नए बूथों में 400 से लेकर 1100 तक मतदाताओं को शामिल किया गया है, ताकि नए मतदाताओं के नाम जुड़ने के बावजूद एक बूथ पर 1200 मतदाताओं का मानक बना रहे। इसका लाभ यह भी होगा कि मतदान के दिन भीड़ कम रहेगी और मतदाताओं को लंबी कतारों से राहत मिल सकेगी।
जिलेवार नए बूथों के गठन पर नजर डाली जाए तो जौनपुर के मछलीशहर विधान सभा क्षेत्र में सर्वाधिक 94 पोलिंग बूथ बढ़ाए गए हैं। यहां 403 बूथों से बढ़कर अब 497 हो गए हैं। इसके बाद जौनपुर विधान सभा क्षेत्र में 92 और केराकत विधान सभा क्षेत्र में 90 नए बूथ बनाए गए हैं।
यह दर्शाता है कि जिन क्षेत्रों में मतदाताओं का घनत्व अधिक था, वहां बूथों के पुनर्गठन पर विशेष ध्यान दिया गया है। हालांकि, कुछ विधान सभा क्षेत्र ऐसे भी हैं, जहां एक भी नया पोलिंग बूथ नहीं बढ़ाया गया। इनमें मऊ, किदवई नगर, सीसामऊ और गोविंदनगर शामिल हैं। इन क्षेत्रों में पहले से ही प्रति बूथ मतदाताओं की संख्या निर्धारित मानक के अनुरूप पाई गई है।
सर्वाधिक बूथों वाले तीन विधान सभा क्षेत्र
- साहिबाबाद-1171
- नोएडा-811
- दादरी-794
सबसे कम बूथों वाले तीन विधान सभा क्षेत्र
- सीसामऊ-275
- आर्यनगर-298
- अयाहशाह-327
यह होंगे फायदे
-लंबी कतारों से राहत
-मतदान प्रतिशत बढ़ने की संभावना
-प्रबंधन और सुरक्षा हो सकेगी बेहतर
-फर्जी मतदान और गड़बड़ी पर लग सकेगा अंकुश |
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