जागरण संवाददाता, बांदा। कालिंजर में लगभग आठ करोड़ रुपये की लागत से सात बीघे में बनने वाले अंतरराज्यीय बस स्टैंड का बुधवार को भूमि पूजन हुआ। मजे की बात यह है कि भूमि पूजन कार्यक्रम में अपनी पांच बीघा जमीन देने वाले बबेरू विधायक विशंभर यादव को ही नहीं बुलाया गया। उधर, जिन अफसरों ने उन्हें नहीं बुलाया अब वह एक दूसरे पर बुलाने की जिम्मेदारी थोप रहे हैं।
वहीं, मामले में राजनीतिक गरमा गई है। विधायक विशंभर यादव ने इस पूरे प्रकरण को अपने और अपने परिवार के सम्मान से जुड़ा बताते हुए गहरी नाराजगी जताई है। विधायक विशंभर यादव ने बताया कि कालिंजर में बस स्टैंड निर्माण के लिए उन्होंने करीब पांच बीघा भूमि दान में दी थी।
इस बस स्टैंड के भूमि पूजन कार्यक्रम में नरैनी से भाजपा विधायक ओम मणि वर्मा, ब्लाक प्रमुख नरैनी मनफूल पटेल सहित कई भाजपा के जनप्रतिनिधि और अधिकारी मौजूद रहे।
विधायक विशंभर यादव ने बताया कि कालिंजर में बस स्टैंड निर्माण के लिए उन्होंने करीब पांच बीघा भूमि दान में दी थी। यह जमीन उन्होंने विधायक बनने से पहले अपने दिवंगत बेटों की पत्नियों के नाम से रजिस्ट्री कराकर दी थी। उनका कहना है कि यह निर्णय केवल व्यक्तिगत नहीं था, बल्कि कालिंजर के विकास और उत्तर प्रदेश के साथ-साथ मध्य प्रदेश से सीधी बस सेवाओं की सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से लिया गया था।
उन्होंने कहा कि जब बस स्टैंड के लिए धनराशि पहले ही स्वीकृत होकर लंबे समय तक पड़ी रही, तब कालिंजर के तत्कालीन प्रधान ने उनसे अनुरोध किया था, कि वे अपनी जमीन उपलब्ध करा दें, ताकि परियोजना आगे बढ़ सके। इसी भावना के साथ उनके परिवार ने यह भूमि दी थी।
विधायक ने कहा कि उनकी दिवंगत बेटों कि बहुओं की भी यही इच्छा थी कि उनके पतियों के नाम से बस स्टैंड का नामकरण हो, जिससे उनकी स्मृति जुड़ी रहे। भूमि पूजन में आमंत्रण न मिलने पर विधायक ने कहा कि इससे उन्हें गहरा मानसिक आघात पहुंचा है।
उन्होंने कहा, \“यह सिर्फ मेरा अपमान नहीं है, बल्कि मेरे परिवार और दिवंगत बेटों की स्मृतियों का भी अपमान है। अगर मुझे नहीं बुलाना था, तो कम से कम मेरे बच्चों को तो बुला लेते\“।
उन्होंने आशंका जताई कि अब बस स्टैंड के नामकरण को लेकर भी उनके परिवार की भावना की अनदेखी की जा सकती है। विधायक ने स्पष्ट किया कि यह मामला किसी राजनीतिक विवाद का नहीं, बल्कि सम्मान और संवेदनशीलता से जुड़ा है, जिस पर प्रशासन और संबंधित विभागों को गंभीरता से विचार करना चाहिए।
यह बात सभी को ज्ञात है, कि विधायक विशंभर यादव ने बस स्टैंड निर्माण के लिए अपनी भूमि दी है। उन्हें कार्यक्रम में क्यों नहीं बुलाया गया, इसकी मुझे कोई जानकारी नहीं है। इस संबंध में उप जिलाधिकारी नरैनी ही स्थिति स्पष्ट कर सकते हैं, क्योंकि कार्यक्रम की समस्त व्यवस्थाएं उन्हीं के स्तर से की गई थीं।
-मुकेश बाबू, एआरएम बांदा
यह एक शासन स्तर का कार्यक्रम था, जिसमें शासन के नामित जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों को आमंत्रित किया गया था। भूमि दान के लिए विधायक विशंभर यादव के प्रति आभार व्यक्त किया गया है।
-अमित शुक्ला, एसडीएम नरैनी |