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सांकेतिक तस्वीर।
विकास गुसाईं, जागरण, देहरादून: प्रदेश में विभिन्न विभागों में सेवाएं दे रहे हजारों संविदा कर्मियों को सरकार बड़ी राहत दे सकती है। अब इनके नियमितीकरण की कट आफ डेट को वर्ष 2018 से बढ़ाकर वर्ष 2022 तक किया जा सकता है। इसके लिए कार्मिक विभाग प्रस्ताव तैयार कर रहा है। इस प्रस्ताव को संविदा कर्मियों और उपनल कर्मियों के संबंध में गठित कैबिनेट की उप समिति के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।
प्रदेश सरकार ने हाल ही में संविदा कर्मियों के विनियमितीकरण से जुड़ी नियमावली में संशोधन करते हुए वर्ष 2018 तक दस वर्ष की निरंतर सेवा पूरी करने वाले कर्मियों को नियमित करने का प्रविधान किया है।
इस निर्णय के क्रम में विभिन्न विभागों में नियमितीकरण की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। सरकार के इस निर्णय से बड़ी संख्या में ऐसे संविदा कर्मी इससे बाहर रह गए, जिन्होंने वर्ष 2019 के बाद दस वर्ष की सेवा पूरी की है। अब इन्हीं कर्मियों को राहत देने के लिए सरकार समय-सीमा बढ़ाने पर विचार कर रही है।
दरअसल, संविदा कर्मियों के नियमितीकरण के लिए वर्ष 2013 में जो नियमावली बनाई गई थी। उसमें इसी अवधि तक पांच वर्ष की सेवा पूरी करने वालों के नियमित करने की व्यवस्था की गई थी। इस दौरान बड़ी संख्या में संविदा कर्मियों ने इसका लाभ लिया लेकिन कुछ विभागों की लापरवाही की वजह से इनमें कार्यरत संविदा कर्मी नियमित होने से रह गए थे।
वर्तमान में जो संशोधित नियमावली जारी की गई है उसमें भी वर्ष 2008 तक संविदा कर्मी के रूप में सेवा देने वालों को ही लाभ मिल रहा है। इसके बाद संविदा में तैनात होने वाले इस दायरे में नहीं आ रहे हैं। ऐसे कार्मिकों की संख्या हजारों में है।
इसे देखते हुए अब सरकार के निर्देश पर कार्मिक विभाग इन कार्मिकों को भी नियमित करने के लिए प्रस्ताव तैयार कर रहा है। यद्यपि, इसमें कट आफ कितनी होगी, इस पर अंतिम निर्णय नहीं लिया जा सका है।
सचिव कार्मिक शैलेश बगौली ने बताया कि संशोधित नियमावली की व्यवस्था के अनुसार ही कैबिनेट की उप समिति को अगला प्रस्ताव सौंपा जाएगा।
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