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ट्रेड डील को लेकर जल्दबाजी में नहीं भारत।
राजीव कुमार, नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौता कब होगा, इसे लेकर किसी के पास कोई ठोस उत्तर नहीं है। वाणिज्य मंत्रालय से लेकर निर्यातक तक यही बताते हैं कि व्यापार समझौता कल भी हो सकता है या फिर अगले कई साल तक भी नहीं हो सकता है। दरअसल अमेरिका जिस तरह दबाव बनाने की रणनीति पर उतरा है, उसमें भारत ऐसा कोई कदम नहीं उठाना चाहता है जिससे दबाव और बढ़ जाए।
व्यापार समझौते को अंजाम देने के लिए भारत अमेरिका की कई शर्तों को मान चुका है और अब इससे अधिक भारत झुकने को तैयार नहीं होगा। अमेरिकी राष्ट्रपति बनने के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने खुद पिछले साल फरवरी में भारत के साथ द्विपक्षीय व्यापार समझौता (बीटीए) करने का एलान किया था और पिछले साल अक्टूबर-नवंबर तक बीटीए के पहले चरण का पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया था।
भारत कितना करता है निर्यात?
अमेरिका सबसे बड़ा बाजार होने के नाते भारत के लिए यह अच्छी खबर थी और भारत इस समझौते को गंवाना नहीं चाहता था। अमेरिका के बाजार में भारत 90 अरब डालर का वस्तु निर्यात करता है। 50 प्रतिशत से अधिक का साफ्टवेयर निर्यात भी अमेरिका के बाजार में किया जाता है। पिछले साल मार्च में अमेरिका पारस्परिक शुल्क की बात कर रहा था और उस हिसाब से विभिन्न देशों पर शुल्क लगा रहा था।
भारत पर 25 प्रतिशत का शुल्क लगाया गया, लेकिन अगस्त में रूस से तेल खरीदने के जुर्माने के तौर पर भारत पर और 25 प्रतिशत का शुल्क लगा दिया गया। पिछले 10 महीनों में अमेरिका के साथ व्यापार समझौते को अंजाम देने के लिए भारत की तरफ से हर कोशिश की गई। जानकार बता रहे हैं कि अब इससे ज्यादा अमेरिका के लिए भारत कुछ नहीं कर सकता है।
पिछले साल पेश बजट में सरकार दे चुकी है कई रियायत
अमेरिका से व्यापार समझौते की उम्मीद में पिछले साल फरवरी में पेश बजट में भारत ने अमेरिका से आने वाले कई औद्योगिक आइटम पर भारत ने शुल्क घटा दिया था। डिजिटल टैक्स हटा दिया। अमेरिकी उद्योगपति एलन मस्क की स्टारलिंक्स को भारत में संचालन की मंजूरी दे दी गई।
टेस्ला का भारत में शो-रूम खुल गया। यहां तक कि रूस से कम दाम में मिलने वाले कच्चे तेल की खरीदारी भारत ने कम कर दी और अमेरिका से तेल की खरीदारी बढ़ा दी गई। हाल ही में वाणिज्य मंत्रालय के अति वरिष्ठ अधिकारी ने कहा था कि अब हमने रूस से तेल खरीद घटा दी है और अमेरिका से इस खरीदारी को बढ़ा दिया है जो व्यापार समझौते की दिशा में सकारात्मक संकेत है।
भारत में सोयाबीन और मक्के की बिक्री के लिए दबाव बना रहा अमेरिका
दरअसल, अमेरिका भारत पर अपने सोयाबीन और मक्के के साथ अन्य अनाज की बिक्री के लिए भी दबाव बना रहा है। अमेरिका भारत में डेरी आइटम भी बेचना चाहता है। किसानों के हित जुड़े होने से ये सारे आइटम भारत के लिए संवेदनशील है और इन सेक्टर को भारत अमेरिका के लिए नहीं खोल सकता है।
अमेरिका की इच्छा बार-बार बढ़ती जा रही है और सभी इच्छा की पूर्ति नहीं की जा सकती है। आस्ट्रेलिया, संयुक्त अरब अमीरात, ब्रिटेन, ओमान जैसे देशों के साथ होने वाले व्यापार समझौते से इन आइटम को दूर रखा गया है। अमेरिका को इजाजत देने पर भारत को अपने कृषि बाजार को अन्य देशों के लिए भी खोलना होगा।
भारत ने शुरू किए निर्यात में भरपाई के प्रयास
पिछले साल अगस्त के बाद से ही भारत अमेरिका के बाजार में प्रभावित होने वाले निर्यात की भरपाई के प्रयास शुरू कर दिए और तभी इस साल ब्रिटेन, ओमान और न्यूजीलैंड से व्यापार समझौता किया गया। इस माह के आखिर तक यूरोपीय यनियन से यह समझौता हो सकता है।
इजरायल, पेरू, चिली जैसे देशों के साथ भी समझौता संभव है। भारत यह भी जानता है कि ट्रंप का कार्यकाल तीन साल बाद समाप्त हो जाएगा और उसके बाद व्यापार की वैश्विक दिशा बदलेगी। यही वजह है कि अब दोनों देशों के बीच कूटनीति स्तर पर बात हो रही है, लेकिन व्यापारिक स्तर पर कोई बातचीत नहीं हो रही है।
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