बढ़ते जल प्रदूषण पर नहीं लग पा रही लगाम, जागरूकता ही मुख्य हथियार. Concept Photo
जागरण संवाददाता, फतेहपुर। 30 लाख की आबादी वाले जिले में 56 सरकारी व 250 निजी अस्पताल व डायग्नोस्टिक सेंटर में प्रतिदिन 15 हजार से अधिक मरीज ओपीडी को पहुंच रहे हैं। अहम बात यह है कि इसमें करीब 5200 मरीज जल जनित बीमारियों से ग्रसित होकर उपचार करा रहे हैं। इसका मुख्य कारण जिले का भूगर्भ व पाइप लाइन से मिलने वाला पेयजल का दूषित होना है।
दूषित पानी के सेवन से मुख्य तौर पर डायरिया, हैजा, टाइफाइड, पीलिया, पेचिस, गैस्ट्रोएंटेराइटिस व पेट में कीड़े पड़ने की बीमारियां बढ़ रही हैं। जिले में दस निकाय क्षेत्र और 816 ग्राम पंचायतों में बचाव के पुख्ता इंतजाम नहीं हैं। खुद की जागरूकता ही बचाव है।
जिले में बढ़ती बीमारियों का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि राजकीय मेडिकल कालेज में प्रतिदिन 1200 और जिला अस्पताल में दो हजार लोगों की ओपीडी हो रही है। इसके अलावा जिले में 54 और सरकारी अस्पताल ग्रामीण स्तर पर हैं, जहां उपचार दिया जा रहा है। 250 नर्सिंग होम और डायग्नोस्टिक सेंटर संचालित हो रहे हैं, जहां हर दिन मरीज पहुंच रहे हैं।
बीमारी से बचाव का मुख्य हथियार खुद की जागरूकता है। आप पानी का सेवन शुद्धता को ध्यान में रखकर करें तो अधिकांश बीमारियों की रोकथाम हो जाएगी। जनपद में मलवां, चौडगरा, हुसेनगंज व केशरीपुर ऐसे क्षेत्र हैं, जहां आज भी दूषित पानी के चलते गांव में बीमारों की संख्या बढ़ रही है।
बहुआ के ज्ञान व बिंदकी के राजेश गंवा चुके जान
दूषित पानी का सेवन कितना खतरनाक है, इसका अंदाजा आप बहुआ के ज्ञान कुमार और बिंदकी के राजेश कुमार के प्रकरण से लगा सकते हैं। बहुआ के ज्ञान कुमार पीलिया से ग्रसित हो गए थे, जबकि राजेश कुमार डायरिया का उपचार कराते हुए दम तोड़ चुके हैं। दोनों मामलों में खास बात यह है कि यह जिन टूटी-फूटी पाइप लाइन से आ रहे पानी का सेवन कर रहे थे, वह दूषित था। पहले तो इन्होंने उपचार कराया, लेकिन शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने के कारण दवाओं ने भी तेजी से असर नहीं दिखाया और दम तोड़ दिया।
रज्जाक और रन्नों हुईं शिकार, हो रहा उपचार
पनी के रहने वाले रज्जाक अहमद वर्तमान में गैस्ट्रोएंटेराइटिस व टाइफाइड से ग्रसित हैं, जबकि रन्नों देवी का कहना है कि वह भी बुखार के कारण उपचार करा रही हैं। पिछले एक महीने से दवाएं खाने के बाद भी राहत उतनी नहीं मिली है, जितनी की अपेक्षा थी। बड़ी बात यह है कि मरीजों को पता ही नहीं होता है कि वह किस स्तर का पानी पी रहे हैं और उन्हें किस तरह का पानी पीना चाहिए। हां, बीमार होने पर लोग अस्पतालों में लाइन लगाते हैं।
80 प्रतिशत बीमारियों का मुख्य कारण दूषित पानी : डा. केके पांडेय
जिला अस्पताल के चिकित्सक डा. केके पांडेय बताते हैं कि पानी पृथ्वी पर उपलब्ध सबसे आवश्यक संसाधनों में एक है। सभी उद्देश्यों के लिए स्वच्छ पानी की आवश्यकता होती है। पीने, खाना पकाने, स्नान करने आदि के लिए भी पानी अच्छा होना चाहिए। बढ़ती आबादी के कारण सभी के पास साफ व शुद्ध पानी उपलब्ध होगा, इसकी गारंटी नहीं है। हर साल पानी से होने वाली बीमारियों के कारण अनेक लोगों की मौत जिले में ही होती है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट पर गौर किया जाए तो 80 प्रतिशत बीमारियां दूषित पानी के कारण जन्म लेती हैं। सेंट्रल ब्यूरो आफ हेल्थ इंटेलिजेंस इंडिया की रिपोर्ट बताती है कि हैजा, टाइफाइड, वायरल, हेपेटाइटिस और डायरिया रोग दूषित पानी के कारण बढ़ रहे हैं। दूषित पानी मुख्य रूप से लिवर और आंतों के इंफेक्शन को फैलाता है। संक्रामक रोगों का मुख्य कारण है। पीलिया और दस्त की समस्या आम बात है। कई बार मरीज को वजन कम होना और खून की कमी होना भी यही कारण से होता है। स्किन रोग, खूनी पेचिस भी हो सकती है।
दूषित पानी से बचाव के घरेलू उपाय
- पानी उबाल कर छानकर रख लें और इस्तेमाल करें
- खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थों का सेवन कम से कम करें
- जल स्रोत को शुद्ध रखने का इंतजाम करें, ताकि दूषित पानी न मिले
- हैंडपंप या जल स्रोत के पास गंदे पानी का जल भराव न होने दें
- अगर फिल्टर या आरओ का उपयोग कर रहे हैं तो समय पर सर्विस कराएं
- अगर संभव हो तो पानी में डिटाल डालकर स्नान करें, इससे सुरक्षा होगी
- बासी खाना व लंबे समय से रखा खाना कतई न खाएं
- हाथ अच्छे से कम से कम 20 सेकंड तक साबुन से धोए
अनेक बीमारियां दूषित पानी से होती हैं, यह शत-प्रतिशत सच्चाई है। बरसात के दिनों में दूषित पानी जल स्रोतों में मिल जाता है तो गांव का गांव बीमारी की चपेट में आ जाता है। पिछले वर्षा सीजन में 240 कैंप लगाकर सवा लाख लोगों को उपचार दिया गया। यह प्रत्येक वर्ष होता है। हम तो जल स्रोतों के पानी को शुद्ध करने के लिए क्लोरीन की गोलियां भी बांट रहे हैं। - डा. राजीव नयन गिरि, सीएमओ
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