cy520520 • 2026-1-9 19:56:54 • views 1017
फाइल फोटो।
जागरण संस, चाकुलिया। झारखंड में नगर निकाय चुनावों की सुगबुगाहट तेज होते ही चाकुलिया नगर पंचायत में राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई है। राज्य सरकार द्वारा आरक्षण की स्थिति स्पष्ट किए जाने के बाद अब अध्यक्ष का पद अनुसूचित जनजाति (ST) की महिला के लिए आरक्षित कर दिया गया है। ट्रिपल टेस्ट के बाद बदले समीकरणों के बीच अब मैट्रिक परीक्षाओं के बाद चुनाव होने की संभावना है। चाकुलिया नगर पंचायत का गठन और शुरुआती सफर काफी उतार-चढ़ाव वाला रहा है। जब पहली बार चुनाव हुए, तो ग्रामीणों ने नगर पंचायत बनाने का पुरजोर विरोध किया था। आलम यह था कि नामांकन करने वाले 95 में से 92 प्रत्याशियों ने नाम वापस ले लिए थे। केवल तीन उम्मीदवार मैदान में बचे, जिसके कारण उपाध्यक्ष और दो वार्ड सदस्य निर्विरोध चुन लिए गए थे।
2013 और 2018 के समीकरण: 2013 में श्रीनाथ मुर्मू अध्यक्ष बने, जबकि 2018 में भाजपा की संध्या रानी सरदार ने जीत दर्ज की थी। 2018 में पहली बार उपाध्यक्ष पद के लिए सीधा मतदान हुआ था, जिसमें सुमित लोधा विजयी हुए थे।
ढाई साल बाद खत्म हुआ इंतजार पिछड़ा वर्ग आरक्षण और \“ट्रिपल टेस्ट\“ के कानूनी पेंच के कारण चुनाव पिछले ढाई वर्षों से अधर में लटके थे। न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद अब चुनावी मार्ग प्रशस्त हुआ है। चाकुलिया के 12 वार्डों में ओबीसी सर्वे का काम पूरा हो चुका है। वर्तमान आंकड़ों के अनुसार, यहां अत्यंत पिछड़ा वर्ग (OBC-1) की आबादी 5126 और पिछड़ा वर्ग (OBC-2) की आबादी 4670 दर्ज की गई है। क्षेत्र के दावेदार अब वार्ड स्तर पर अपनी पैठ बनाने में जुट गए हैं। अध्यक्ष पद एसटी महिला के लिए सुरक्षित होने से महिला राजनीति में नए चेहरों के उभरने की उम्मीद है।
चाकुलिया निकाय चुनाव: एसटी महिला के लिए आरक्षित हुआ अध्यक्ष पद, जानें 2008 के उस विद्रोह की कहानी जब 92 लोगों ने नाम वापस लिए। |
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