उत्तराखंड ग्रामीण बैंक की गोपेश्वर शाखा
संवाद सहयोगी, जागरण, गोपेश्वर: उत्तराखंड ग्रामीण बैंक के गोपेश्वर शाखा में हुए तीन करोड़ 19 लाख की वित्तीय अपराध को लेकर जिन पांच खातों में घोटाले की धनराशि स्थांनातरित हुई है। उन खातों को पुलिस ने फ्रीज कर दिया है। पुलिस का मानना है कि बैंकिंग सिस्टम में सिंगल अधिकारी को आहरण वितरण के साथ लोन राशि की प्रवृष्टियां करने का अधिकार नहीं है।
उत्तराखंड ग्रामीण बैंक की तहरीर में घोटाले को लेकर तत्कालीन बैंक प्रबंधक अनुराग पुंडीर को ही आरोपित बनाया गया है। बैंक प्रबंधक ने अपने कार्यकाल में फर्जी कर्मचारी व शिक्षकों के दस्तावेज बनाकर तीन करोड़ 19 लाख की धोखाधड़ी कर धनराशि की निकासी की है।
ये निकासी की रकम बैंक की शाखा से पांच खातों में स्थानांतरित हुई है। जिसमें प्रबंधक व उसके पिता के साथ व्यापारिक फर्म व अन्य व्यक्ति शामिल हैं।
पुलिस ने जिन पांच खातों में घोटाले की धनराशि स्थानांतरित हुई है। उन्हें फ्रीज कर दिया है।इससे इन खातों में लेन देन रोक दिया गया है। पुलिस बैंक के आहरण वितरण, लोन स्वीकृत सिस्टम की भी जांच कर रही है।
बताया गया कि इन घोटालों की प्रकिया के दौरान चार अन्य अधिकारी भी पुलिस की रडार पर हैं। वे अलग-अलग समय पर इस बैंक में सहायक मैनेजर, फील्ड आफिसर, कार्यालय सहायक पद पर रहते हुए इन दस्तावेजों के मूवमेंट से जुड़े रहे हैं।
क्या कहते हैं अधिकारी
पुलिस द्वारा घोटाले को लेकर रिपोर्ट लिखाने वाले वर्तमान बैंक अधिकारी के बयान लेने के बाद वित्तीय अपराध में प्रयोग हुए पांच खातों को फ्रीज कर दिया है। बैंक में वित्तीय अपराध में लेनदेन के दौरान किन-किन कर्मचारी व अधिकारियों की संलिप्तता रही यह भी जांच का हिस्सा है। जल्द ही मामले में कार्रवाई की जाएगी।
प्रमोद कुखसाल, जांच अधिकारी वरिष्ठ उपनिरीक्षक कोतवाली गोपेश्वर
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