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बेटे की मौत के बाद न्याय की जंग लड़ रहा पिता, पुलिस और जीआरपी के बीच उलझी जांच; दो महीने से घूम रही फाइल

Chikheang 2026-1-9 21:57:06 views 892
  

प्रतीकात्मक तस्वीर।



जागरण संवाददाता, गाजियाबाद। बेटे की मौत का गम, बहू पर उकसाने का आरोप और अब जांच का इंतजार। कानपुर के कशोलर गांव निवासी बुजुर्ग उमाकांत शुक्ला का दर्द पुलिस और जीआरपी के बीच फाइलों में सिमटकर रह गया है।
जांच करने से मना कर दिया

छह नवंबर को कविनगर थानाक्षेत्र में रेलवे ट्रैक पर आत्महत्या करने वाले उनके बेटे कुसुमकांत शुक्ला की मौत के बाद उन्होंने जीआरपी थाने में पुत्रवधु और अन्य ससुरालियों पर आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप लगाते हुए केस दर्ज कराया था। जीआरपी ने केस दर्ज करने के बाद दो बार जांच पुलिस को ट्रांसफर की, लेकिन दोनों ही बार पुलिस ने जीआरपी में केस दर्ज होने की वजह से जांच करने से मना कर दिया।
बेटे को प्रताड़ित करने का लगाया आरोप

बुजुर्ग उमाकांत शुक्ला का कहना है कि उनका बेटा कुसुमकांत शुक्ला गुरुग्राम की बहुराष्ट्रीय कंपनी में इंजीनियर के पद पर काम करता था। उन्होंने अपने बेटे की शादी वर्ष 2011 में गोविंदपुरम निवासी युवती से की थी। उनका बेटा अपनी ससुराल में गोविंदपुरम ही किराए पर रह रहा था। उनका आरोप है कि उनके बेटे को प्रताड़ित किया जाता था।
जांच से मना करते हुए फाइल वापस कर दी

इससे परेशान होकर उनके बेटे ने आत्महत्या कर ली। केस दर्ज हाेने बाद दो महीने हो चुके हैं, लेकिन जांच ही शुरू नहीं हुई है। क्योंकि जीआरपी ने उन्हें बताया कि उनके बेटे को गोविंदपुरम में प्रताड़ित किया गया था इसलिए जांच कविनगर थाना पुलिस को करनी है।

पुलिस के पास जब केस आया तो उन्होंने केस जीआरपी में दर्ज होने का हवाला देकर जांच से मना करते हुए फाइल वापस कर दी। जीआरपी ने दोबारा पुलिस से दिसंबर में जांच के लिए कहा लेकिन पुलिस ने 29 दिसंबर को जीआरपी को दोबारा जांच करने से मना कर दिया।
अधिकारियों के चक्कर लगाकर थक गए उमाकांत

पीड़ित उमाकांश शुक्ला का कहना है कि वह पुलिस और जीआरपी अधिकारियों से मिलकर एवं फोन पर बात कर थक चुके हैँ। वह गाजियबाद में अतिरिक्त पुलिस आयुक्त केशव चौधरी से तीन बार, एसीपी कविनगर से एक बार, कविनगर थाना प्रभारी, जीआरपी थाना प्रभारी से मिल चुके हैँ। सीओ जीआरपी से मिलने गए थे, लेकिन बात नहीं हो पाई। उनका कहना है कि एसपी जीआरपी आशुतोष शुक्ला से उनकी सात-आठ बार फोन पर बात हुई है। परेशान होकर उन्होंने एक जनवरी को पुलिस आयुक्त जे रविंदर गौड को भी पत्र भेजा है।
मुख्यालय से करेंगे पत्राचार-डीसीपी सिटी

डीसीपी सिटी धवल जायसवाल का कहना है कि केस हमारे थाने में दर्ज नहीं है, इसलिए जांच शुरू नहीं की गई। यह फाइल जीआरपी द्वारा दर्ज मुकदमे से जुड़ी है, जिसकी जांच का अधिकार जीआपी के पास है। मुख्यालय स्तर पर इस संबंध में पत्राचार किया जाएगा। ताकि अधिकार क्षेत्र को लेकर बनी भ्रम की स्थिति समाप्त हो सके।

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