मातृ वंदन के लाभार्थियों तक मदद पहुंचाने के लिए लागू हुआ फेस रिकग्नाइजेशन सिस्टम (सांकेतिक तस्वीर)
जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। प्रधानमंत्री की फ्लैगशिप स्कीम प्रधानमंत्री मात्र वंदन योजना (पीएमएमवीवाई) को और अधिक सुगम, पारदर्शी और योजना का लाभ वास्तविक लाभार्थियों तक पहुंचना सुनिश्चित करने के लिए महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने कई कदम उठाए हैं।
वास्तविक लाभार्थियों को ही सहायता राशि मिले इसके लिए फेस रिकग्नाइजेशन सिस्टम यानी चेहरे से पहचान की व्यवस्था लागू की गई है। साथ ही शिकायत निवारण तंत्र स्थापित कर शिकायतों की रियल टाइम ट्रैकिंक और 30 दिन में समाधान की व्यवस्था भी लागू की गई है।
प्रधानमंत्री द्वारा प्रगति समीक्षा बैठक में पीएमएमवीवाई योजना को और सुगम व पारदर्शी बनाने के दिए गए सुझाव के बाद मंत्रालय ने फेस रिकग्नाइजेशन सिस्टम की ये नयी व्यवस्था शुरू की है।
प्रधानमंत्री मात्र वंदन योजना में पहले बच्चे के लिए 5000 और दूसरा बच्चा यदि बेटी है तो 6000 रुपये की आर्थिक मदद दी जाती है। यह राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में डायरेक्ट बेनीफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के जरिए भेजी जाती है।
यह योजना एक जनवरी 2017 से लागू है और इसकी शुरुआत से लेकर आठ जनवरी 2026 तक इसके तहत 4.26 करोड़ लाभार्थियों को कुल 20060 करोड़ की मातृत्व सहायता दी जा चुकी है।
वित्त वर्ष 2025-26 में आठ जनवरी 2026 तक 59.19 लाख लाभार्थियों को कुल 2022.08 करोड़ की सहायता राशि प्रदान की गई। यह यह योजना महिला एवं बाल विकास मंत्रालय चलाता है।
उच्च पदस्थ सूत्र बताते हैं कि प्रधानमंत्री ने पिछली प्रगति मीटिंग में इस योजना को और अधिक पारदर्शी और सुगम व वास्तविक लाभार्थियों को लाभ सुनिश्चित करने के लिए अतिरिक्त उपाय करने के सुझाव दिए थे। इसके अलावा प्रधानमंत्री ने मंत्रालय से एक शिकायत निवारण तंत्र स्थापित करने और शिकायतों का त्वरित समाधान के उपाय करने को भी कहा था।
मंत्रालय ने प्रगति बैठक में प्रधानमंत्री द्वारा दिये गए सुझावों को ध्यान में रखते हुए योजना में फेस रिकग्नाइजेशन की नयी व्यवस्था लागू की है। मालूम हो कि प्रधानमंत्री नियमित रूप से प्रगति मीटिंग करते हैं जिसमें विकसित भारत के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए विभिन्न मंत्रालयों की लागू योजनाओं की समीक्षा की जाती है।
मंत्रालय के सूत्र बताते हैं कि प्रगति मीटिंग के बाद प्रधानमंत्री मात्र वंदन योजना के तहत सभी नये नामांकनों के लिए 21 मई 2025 से चेहरे की पहचान (फेस रिकग्नाइजेशन) के माध्यम से अनिवार्य बायोमेट्रिक सत्यापन शुरू किया गया है।
इसके लिए पोषण ट्रैकर पर उपलब्ध फेस रिकग्नाइजेशन सिस्टम का उपयोग किया जाता है जिससे दोहरी सत्यापन प्रक्रियाओं की आवश्यकता नहीं रहती। यदि पोषण ट्रैकर पर फेस रिकग्नाइजेशन सिस्टम उपलब्ध नहीं है तो आधार फेसआरडी ऐप के माध्यम से यूआइडीएआइ-आधारित चेहरे की पहचान की अतिरिक्त सुविधा भी उपलब्ध है।
फेस रिकग्नाइजेशन प्रणाली को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने व्यापक रूप से स्वीकार किया है। इस व्यवस्था के लागू होने के बाद से आठ जनवरी 2026 तक कुल 23.60 लाख लाभार्थियों का नामांकन किया जा चुका है। प्रक्रिया को सुगम बनाने के लिए मंत्रालय ने राज्यों के साथ विभिन्न प्रशिक्षण सत्र आयोजित किये।
इसके अलावा जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं तक पहुंचने के लिए मंत्रालय ने वीडियो ट्यूटोरियल भी उपलब्ध कराए हैं। फेस रिकग्नाइजेशन आधारित नामांकन सुनिश्चित करता है कि मातृत्व लाभ केवल पात्र लाभार्थियों को ही मिले।
इसके अलावा मंत्रालय ने योजना को लेकर शिकायतों के निपटारे के लिए एकीकृत शिकायत निवारण प्रणाली भी लागू की है। इसमें पीएमएमवीवाई पोर्टल में एकीकृत शिकायत मॉड्यूल उपलब्ध है जिसमें शिकायत दर्ज कराने के बाद आवेदक को टिकट नंबर के साथ एसएमएस भेजा जाता है और शिकायत करने वाला ऑनलाइन ट्रैकर में अपनी शिकायत की स्थिति भी देख सकता है।
इसके अलावा एक हेल्पलाइन नंबर 1515 भी शुरू किया गया है इसमें भी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। दर्ज शिकायतों को सीधे राज्य या केंद्र शासित प्रदेशों में संबंधित अधिकारियों को भेजा जाता है और उन्हें 30 दिनों के भीतर शिकायतों का समाधान करने का निर्देश दिया गया है। आठ दिसंबर 2025 तक मिली 60000 से अधिक शिकायतों में से 85 प्रतिशत का समाधान औसतन 19 दिनों में हुआ है। |
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