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चंदौसी में 30 बंदरों की रहस्यमयी तरीके से मौत, पहले नाक-मुंह से आया खून, फिर तोड़ा दम

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जागरण संवाददाता, संभल। आटा गांव में हुई बंदरों की मौत के राज से अभी पर्दा भी नहीं उठा कि अब चंदौसी शहर में बंदरों की रहस्यमयी मौत का सिलसिला शुरू हो गया है। पिछले 10 दिन में 30 से अधिक बंदरों की मौत हो चुकी है। शुक्रवार को भी छह बंदरों ने अज्ञात बीमारी से तड़प तड़पकर दम तोड़ दिया।

मरने से पहले बंदरों में लगभग एक जैसे ही लक्षण दिखाई दे रहे हैं। जबकि एक दर्जन से अधिक बंदर मरणासन्न स्थिति में है और उपचार चल रहा है। सूचना पर पहुंचे सामाजिक लोगों ने मृत बंदरों को दफना दिया।

चंदौसी के सीता रोड स्थित श्मशान में शुक्रवार की सुबह छह बंदर मृत अवस्था में पड़े मिले, जबकि कुछ बंदर मरणासन्न स्थिति में थे। इसकी जानकारी लोगों को हुई तो मौके पर भीड़ लग गई। शहर के मंतेश वाष्र्णेय, विनोद शर्मा, सचिन गुप्ता, अनुभव अन्नू, रघुवीर शरण आदि लोग पहुंच गए।

उन्होंने तुंरत बंदरों की मौत की सूचना डिप्टी सीवीओ डा. अजय कुमार और वन विभाग को दी। साथ ही मरणासन्न बंदरों को संभालते हुए अलाव लगाकर राहत पहुंचाने का प्रयास किया। इसी बीच डिप्टी सीवीओ मौके पर पहुंच गए। उन्होंने बंदरों की स्थिति को देखा और तुरंत उपचार शुरू कराया।

लोगों ने बताया कि 10 दिन में 30 से अधिक बंदरों की अज्ञात बीमारी से मौत हो गई है। सभी बंदरों में मरने से पहले एक जैसे लक्षण दिखाई दे रहे हैं। डिप्टी सीवीओ प्रथम दृष्टया मौत का कारण निमोनिया होना मान रहे हैं। हालांकि बंदरों का पोस्टमार्टम नहीं कराया गया है।

उनका कहना है कि बीते दिनों गांव आटा में जो बंदर मरे थे, उनमें भी लगभग ऐसे ही लक्षण पाए गए थे। वहीं से मृत बंदर का पोस्टमार्टम कराया था। जिसकी रिपोर्ट अभी नहीं मिली है। वहां की रिपोर्ट आने पर बंदरों की बीमारी का कारण पता लगेगा।
बंदरों के नहीं कराए पोस्टमार्टम

चंदौसी में बंदरों की मौत की सूचना पर शुक्रवार की सुबह डिप्टी सीवीओ डा. अजय कुमार सीता रोड श्मशान पहुंचे थे, लेकिन उन्होंने मृत बंदरों के शव पोस्टमार्टम के लिए नहीं भेजे।

उन्होंने तर्क दिया कि जो स्थिति इन बंदरों की दिख रही है, वह बीते दिनों आटा गांव में दिखी थी। इस लिए वहां की पोस्टमार्टम रिपोर्ट से ही बंदरों की मौत का कारण पता चल जाएगा।
एक माह पहले आटा गांव में हुई थी बंदरों की मौत

बीते माह बनियाठेर थाना क्षेत्र के आटा गांव में भी 30 से अधिक बंदरों की मौत अज्ञात बीमारी से हो गई थी। लेकिन अभी तक उनकी मौत का कारण पता नहीं लगा है। ग्रामीणों के अनुसार सभी बंदरों में मरने से पहले एक जैसे लक्षण थे।

प्रशासन के संज्ञान में आने के बाद बंदरों के शव पोस्टमार्टम के लिए बरेली भेजे गए थे। आठ जनवरी को रिपोर्ट आनी थी लेकिन, अभी तक पोस्टमार्टम रिपोर्ट नहीं मिली है। पशुपालन विभाग अभी रिपोर्ट आने का इंतजार कर रहा है।
ये हैं लक्षण

चंदौसी में जिन बंदरों की मौत हुई है या बीमार है उनमें मुख्य रूप से नाक और मुंह से खून आना, दस्त लगना, शरीर बेजान होना, पूंछ गिरना और शरीर के बाल खड़े होने जैसे लक्षण दिख रहे हैं।


बदरों के बीमार होने की जानकारी गुरुवार की रात मिल गई थी। तभी उपचार शुरू करा दिया गया। प्रथम दृष्टया बंदरों की मौत का कारण निमोनिया मालूम होता है। आटा गांव में जो लक्षण बंदरों में दिखाई दिए, उसी तरह की बीमारी लगती है। अभी पोस्ट मार्टम रिपोर्ट आने पर सही कारण पता लगेगा।

- डॉ. अजय कुमार, डिप्टी सीवीओ
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