deltin33 • The day before yesterday 06:56 • views 251
श्वेतांक शंकर उपाध्याय, लखीमपुर। मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने के लिए लंबे समय से प्रस्तावित दुधवा-किशनपुर कॉरिडोर की याद आई है। दैनिक जागरण लगातार प्रकाशित समाचारों के बाद वन विभाग के अधिकारियों ने दुधवा नेशनल पार्क और किशनपुर के बीच ग्राम समाज की जमीनों की तलाश शुरू कर दी है, ताकि कॉरिडोर की योजना को मूर्त रूप दिया जा सके। यह कार्य युद्धस्तर पर चल रहा है। तहसील प्रशासन से ग्राम समाज की जमीनों का आंकड़ा मांगा जा रहा है।
दरअसल दुधवा नेशनल पार्क और किशनपुर सेंचुरी के बीच सड़क मार्ग की 25 किलोमीटर की दूरी है। दुधवा नेशनल पार्क में 25 के मुकाबले किशनपुर में बाघों की संख्या 35 है। इस 25 किलोमीटर की दूरी में अक्सर बाघों का मूवमेंट रहता है और मानवों से मुठभेड़ होती रहती है।
इससे मुक्ति पाने के लिए इस 25 किमी में कॉरिडोर विकसित करने की योजना पर अधिकारी लगातार चर्चा करते रहे, लेकिन कभी कॉरिडोर अपने स्वरूप में नहीं आ सका। इस कारिडोर से बाघों को एक-दूसरे जंगल में जाने में आसानी होगी और बाघ बफरजोन की आबादी की तरफ कम आएंगे, जिससे संघर्ष की घटनाओं में कमी आएगी।
दुधवा टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर डा. एस राजामोहन कहते हैं कि पूरी रूपरेखा तैयार कर ली गई है। विश्व प्रकृति निधि (डब्ल्यूडब्ल्यूएफ) के सहयोग से कृषि, राजस्व, ग्राम्य विकास के अधिकारियों संग गांवों में बैठकें कराई जाएंगी। गोष्ठियों में ग्रामीणों को जागरूक करने, ग्राम समाज की जमीनों को जोड़कर कारिडोर के किशनपुर सेंचुरी से लेकर दुधवा तक पौधारोपण करने, वन्यजीवों के जलश्रोत के लिए जगह-जगह जलाशय खुदवाने के साथ ही ग्रामीणों की सुरक्षा को भी ध्यान में रखा जाएगा।
कॉरिडोर की चौड़ाई जमीन की उपलब्धता पर निर्भर है। वर्षों से इस कारिडोर को विकसित करने की जरूरत बताई जा रही थी। अगस्त 2022 में तराई हाथी रिजर्व विकसित करने की अनुमति मिली तो अधिकारियों ने उस समय किशनपुर-दुधवा कॉरिडोर को भी विकसित करने पर मंथन किया था, लेकिन योजना मूर्तरूप नहीं ले सकी।
अधिकारियों का कहना है कि दुधवा-किशनपुर में हर वर्ष एक नवंबर से पर्यटन सत्र शुरू होता है और 15 जून को दुधवा के गेट सैलानियों के लिए बंद होते हैं। यह इलाका सैलानियों के साथ खेतों में काम करने वाले लोगों से भरा रहता है। बाघ और अन्य वन्यजीव कॉरिडोर न होने के अभाव में आबादी क्षेत्रों से होते हुए एक दूसरे जंगलों में आते-जाते रहते हैं। जहां, इंसानों से मुठभेड़ की घटनाएं होती रहती हैं, लेकिन दुधवा-किशनपुर के बीच कारिडोर विकसित होने से मानव-वन्यजीव की घटनाओं पर रोक लगेगी। |
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