डीयू में एईबीएएस पर छिड़ा घमासान। फाइल फोटो
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय में शिक्षकों पर आधार आधारित बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली (एईबीएएस) को अनिवार्य किए जाने और जनवरी 2026 से वेतन रोके जाने की चेतावनी को लेकर असंतोष गहराता जा रहा है।
ऑल इंडिया अकादमिक्स फार डेमोक्रेटिक टीचर्स एसोसिएशन (डूटा) ने 8 जनवरी 2026 की अधिसूचना पर कड़ा ऐतराज जताते हुए इसे शिक्षकों के अधिकारों और गरिमा पर सीधा हमला बताया है।
उपस्थिती को वेतन से जोड़ना न्याय के खिलाफ
डूटा का कहना है कि जब बायोमेट्रिक हाजिरी का प्रस्ताव कार्यकारी परिषद के एजेंडा से हटाया जा चुका था, तब प्रशासनिक आदेशों के माध्यम से इसे लागू करना भ्रामक और अस्वीकार्य है। संगठन ने आरोप लगाया कि उपस्थिति को वेतन से जोड़ना जबरन और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विरुद्ध है।
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शिक्षकों की उपस्थिति और दायित्व पहले से ही यूजीसी नियमों, विश्वविद्यालय अध्यादेशों और अकादमिक उत्तरदायित्व व्यवस्था से नियंत्रित हैं।
संघ ने विश्वविद्यालय की ओर से कालेजों को इकाई कहे जाने पर भी आपत्ति जताई और इसे संस्थागत स्वायत्तता के क्षरण का संकेत बताया। डूटा ने मांग की है कि शिक्षकों पर लागू अधिसूचना तत्काल वापस ली जाए, किसी भी शिक्षक का वेतन या सेवा शर्तें प्रभावित न की जाएं तथा सेवा संबंधी सभी निर्णय केवल वैधानिक निकायों में चर्चा और शिक्षकों के प्रतिनिधि संगठनों से संवाद के बाद ही लिए जाएं।
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