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गोरखपुर में ढाई साल बाद भी सिटी सेंटर का सपना अधूरा, 50 वर्षों की आवश्यकता को ध्यान में रख हो रहा पुनर्विकास

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2027 मई तक गोरखपुर जंक्शन के नवनिर्माण कार्य पूरा करने का निर्धारित है लक्ष्य। जागरण  



जागरण संवाददाता, गोरखपुर। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सात जुलाई, 2023 को गोरखपुर जंक्शन के पुनर्विकास की आधारशिला रखी थी। पुनर्विकास कार्य मई 2027 में पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित है। ढाई साल बीत गए, लेकिन अभी तक एक भवन भी नहीं बन पाया है। निर्माण की गति ऐसी ही रही तो वर्ष 2030 तक भी कार्य पूरा हो पाना कठिन लगता है।  

यद्यपि, जंक्शन के पश्चिमी छोर पर मल्टीलेवल कार पार्किंग व फर्स्ट क्लास गेट और एस्केलेटर के बीच \“साउथ-वेस्ट बिल्डिंग\“ का निर्माण शुरू हो गया है। लेकिन, निर्माण कार्य तेजी नहीं पकड़ पा रहा। उत्तरी गेट (प्लेटफार्म नंबर नौ) पर \“नार्थ ईस्ट बिल्डिंग\“ के नाम से नया भवन बनना है। लेकिन अभी शुरुआत तक नहीं हो पाई है।

बीच वाले फुट ओवरब्रिज (एफओबी) का निर्माण तो आरंभ हो गया है, लेकिन अभी तक नींव भी पूरी नहीं हो पाई है। निर्माण कार्य पूरा करने के लिए निर्धारित लक्ष्य दिसंबर 2025 भी समाप्त हो गया है। कार्य गति को देखकर नहीं लग रहा कि पांच साल में भी निर्माण पूरा हो पाएगा। प्लेटफार्मों पर की गई बैरिकेडिंग व खोदे गए गड्ढे सिस्टम को मुंह चिढ़ा रहे हैं। बीच वाला फुट ओवरब्रिज टूट जाने से यात्रियों की परेशानी बढ़ गई है। एक से दूसरे एफओबी और तीन से आठ नंबर प्लेटफार्म तक पहुंचने में यात्रियों की सांसें फूल जा रहीं हैं।

50 वर्षों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर हो रहा पुनर्विकास
139 वर्ष बाद पहली बार गोरखपुर जंक्शन का पुनर्विकास हो रहा है। 50 वर्षों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर लगभग 500 करोड़ रुपये से गोरखपुर जंक्शन को सिटी सेंटर के रूप में विकसित किया जा रहा है। प्लेटफार्म नंबर दो व नौ के बीच लगभग 120 मीटर लंबा और बीच वाले नए फुट ओवरब्रिज (एफओबी) और पूर्वी एफओबी के मध्य लगभग 72 मीटर चौड़ा 8640 वर्ग मीटर में कानकोर्स बनाने की तैयारी है।

यह कानकोर्स एफओबी के समानांतर रेल लाइनों के ऊपर रूफ प्लाजा के रूप में बनेगा। जहां, ट्रेनों का इंतजार कर रहे यात्री लिफ्ट के माध्यम से सीधे निर्धारित प्लेटफार्म पर उतर जाएंगे। कानकोर्स पर आवागमन करने के लिए स्वचालित सीढियां (एस्केलेटर) भी होंगी। एयरपोर्ट की तर्ज पर कानकोर्स के अलावा स्टेशन परिसर में वाहनों के आवागमन के लिए तीन लेन बनेंगे।

यह भी पढ़ें- \“यात्रीगण ध्यान दें! उच्च गति की ट्रेन स्टेशन से गुजरने वाली है...\“, छोटे स्टेशनों पर बिना रुके गुजरने वाली ट्रेनों के लिए होगा अनाउंसमेंट

एक लेन से यात्रियों को छोड़ने वाले वाहन प्रवेश करेंगे। दूसरे लेन से यात्रियों को स्टेशन से ले जाने के लिए वाहन प्रवेश करेंगे। तीसरा लेन पैदल यात्रियों के आवागमन के लिए होगा। एयरपोर्ट की तरह सभी उच्चस्तरीय सुविधाएं यहां उपलब्ध होंगी। प्रतिदिन एक लाख 80 हजार यात्री आवागमन कर सकेंगे।

जंक्शन परिसर में ही मल्टीलेवल कार पार्किंग, कमर्शियल कांप्लेक्स, बजट होटल और सिनेमा हाल की सुविधाएं उपलब्ध होंगी। मेट्रो ट्रेन स्टेशन के साथ बस स्टेशन तक हैंगिंग ब्रिज का भी निर्माण होना है। पूर्वोत्तर रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी पंकज कुमार सिंह का कहना है कि निर्माण कार्य प्रगति पर है।

नंबर गेम

  • 17900 वर्ग मीटर में होगा मुख्य स्टेशन भवन।
  • 8640 वर्ग मीटर में होगा एनईआर के सबसे लंबे कानकोर्स का निर्माण।
  • 7400 वर्ग मीटर में होगा द्वितीय प्रवेश द्वार।
  • 3,500 व्यक्ति एक साथ बैठ कर कर सकेंगे प्रतीक्षा।
  • 300 वर्ग मीटर में टिकट खिड़कियां बनाई जाएंगी।
  • 6,300 वर्ग मीटर में बनाया जाएगा वेटिंग एरिया।
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