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उत्तरकाशी में धू-धूकर जला मुखेम रेंज का जंगल, वन संपदा के साथ वन्यजीवों को भी नुकसान पहुंचने की आशंका

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मुखेम रेंज के जंगलों से उठता धुआं। जागरण



जागरण संवाददाता, उत्तरकाशी: वर्षा व बर्फबारी न होने से शीतकाल में ही वन क्षेत्र आग की चपेट में आ रहे हैं। शनिवार को मुखेम रेंज के जंगलों में आग भड़क उठी, इससे दिनभर जंगलों से धुएं का गुबार उठता नजर आया। वनाग्नि के चलते अमूल्य वन संपदा के साथ वन्यजीवों को भी नुकसान पहुंचने की संभावना जतायी जा रही है।

बता दें कि जनपद में बीते मानसून सीजन के बाद से वर्षा की बूंद नहीं गिरी है। वहीं, शीतकाल में ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी भी नहीं हुई है। इससे तापमान गर्म व जंगलों में नमी नहीं होने से वन क्षेत्र लगातार वनाग्नि की चपेट में आ रहे हैं।

इससे पहले भी मुखेम रेंज के जंगलों में आग भड़क चुकी है। वहीं, धरासू रेंज के जंगलों में वनाग्नि की घटना सामने आ चुकी है। शनिवार को मनेरा क्षेत्र के ऊपर की पहाड़ियों में अचानक जंगल की आग भड़क उठी, इससे दिनभर जंगल धू-धूकर जलता रहा।

शीतकाल में जलते जंगलों पर पर्यावरणविद् सुरेश भाई ने शीतकाल में जंगलों में लगने वाली आग वर्षा से ही बुझती है, लेकिन वर्षा नहीं हो रही है। उच्च हिमालयी क्षेत्रों तक आग पहुंच रही है। आग बुझाने के इंतजामों का भी कुछ अता-पता नहीं है। वन विभाग के पास भी पर्याप्त संसाधन नहीं है।

इधर, वन क्षेत्राधिकारी मुखेम रेंज गोविंद सिंह पंवार का कहना है कि मनेरा क्षेत्र के ऊपरी पहाड़ियों में वनाग्नि की सूचना है। सूचना पर वनकर्मी मौके पर आग बुझाने गये थे। लेकिन दुर्गम क्षेत्र होने से आग बुझाने में समस्या आ रही है। उन्होंने कहा कि कुछ क्षेत्रों में शरारती तत्व भी वन क्षेत्रों में आग लगा रहे हैं।

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