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सरकारी तंत्र से तंग आकर किसानों की पहल, फसल बचाने को चंदा कर बेसहारा गोवंशियों से ऐसे पा रहे निजात

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किसानों द्वारा खेतों से खदेड़ खाली प्लाट में एकत्र किए गए बेसहारा गोवंशी। जागरण  



संवादसूत्र, अयाना(औरैया)। खेतों में गेहूं व सरसों की फसलों को बेसहारा मवेशियों से बचाने के लिए किसानों ने प्रशासन से कोई मदद न देख खुद से पहल की। एकजुटता के साथ ही चंदा कर एक हजार 300 रुपये एकत्र किए। मवेशियों को खेतों से खदेड़ते हुए खाली प्लाट में एकत्र किया। किराए के लोडर से 28 गोवंशियों को रविवार दोपहर सिखरना स्थित गोशाला में पहुंचा राहत की सांस ली। खंड विकास अधिकारी आदित्य तिवारी ने बताया कि ग्राम प्रधान व सचिव के स्तर से यह कार्य क्यों नहीं हुआ? इस दिशा में जांच कराई जाएगी।


सदर ब्लाक की ग्राम पंचायत ऐमा सेंगनपुर के किसानों ने गोवंशियों से अपनी गेहूं की फसल को बचाने के लिए अनोखा कदम उठाया। गोवंशियों के लगातार फसल को नुकसान पहुंचाए जाने से किसान परेशान थे। किसानों ने ग्राम प्रधान और पंचायत सचिव से कई बार शिकायत की, लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हुई। इसके बाद कोके दुबे, बल्लू त्रिपाठी, छोटू त्रिपाठी, रविकांत और वैभव सहित कई किसानों ने मिलकर लगभग 28 गोवंशियों को एक खाली प्लाट में एकत्र किया। किसानों ने बताया कि मवेशियों के कारण उनकी गेहूं की फसल बर्बाद हो रही थी। बार-बार गुहार लगाने के बावजूद स्थानीय प्रशासन की ओर से कोई समाधान न मिलने पर उन्होंने अपनी समस्या का हल खुद निकालने का फैसला किया।

  

गोवंशियों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने के लिए लोडर का खर्च निकालने के लिए आपसी चंदा इकट्ठा किया। इस चंदे से प्राप्त धनराशि का उपयोग करके ग्राम पंचायत सिखरना स्थित गोशाला में सुरक्षित रूप से मवेशियों को पहुंचाया। घटना प्रशासनिक उदासीनता और स्थानीय लोगों के सक्रिय प्रयासों को दर्शाती है। ग्राम प्रधान इरफान खान व सचिव अर्पित यादव का कहना है कि किसानों से कहा गया था कि वह मवेशियों को गोशाला में भिजवा देंगे। किसानों द्वारा किए गए कार्यों के संबंध में जानकारी कराई जाएगी।
इधर, डीएम की चेतावनी के बावजूद होती मनमानी

वर्चुअल बैठक में डीएम डा. इन्द्रमणि त्रिपाठी द्वारा अधिकारियों को खासतौर पर गोवंशियों की दिशा में निर्देश दिए जाते हैं। प्रत्येक ब्लाक के अधिकारियों को सजग
किया जाता। पशु चिकित्साधिकारी से लेकर अन्य से बार-बार यही बात कही जाती कि गोशालाओं में मवेशियों को सुरक्षित कराते हुए देखरेख नियमित तौर पर हो। सड़क, हाईवे व अन्य मार्गों से बेसहारा मवेशियों को पकड़ा जाएगा। इसके लिए अभियान चलाने को कहा जाता है। निकायों के साथ ही ब्लाक स्तर पर कोई काम नहीं दिखता। जबकि, बिधूना, अजीतमल बाबरपुर, अटसू, बेला, फफूंद, अछल्दा, भाग्यनगर, सहार, ऐरवाकटरा, सहायल समेत अन्य क्षेत्रों में मवेशियों से किसान ज्यादा परेशान हैं।
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