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हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने हिमकेयर के पेंडिंग बिलों पर लिया संज्ञान, स्वास्थ्य सचिव को नोटिस जारी कर भुगतान का आदेश

deltin33 3 hour(s) ago views 940
  

हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट का शिमला स्थित परिसर। जागरण आर्काइव  



विधि संवाददाता, शिमला। हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश दिए हैं कि वह स्वास्थ्य संस्थानों को हिमकेयर योजना के तहत प्रदान की सेवाओं के बिलों का भुगतान 25 मार्च से पहले जारी करे। न्यायाधीश ज्योत्सना रिवाल दुआ ने याचिकाकर्ता अस्पताल मैसर्स मातृ मेडिसिटी एंड आर्थोकेयर अस्पताल ऊना और मैसर्स डा. नीना पाहवा प्रसूति गृह बीरता जिला कांगड़ा द्वारा दायर याचिकाओं की प्रारंभिक सुनवाई के पश्चात यह आदेश जारी किए।

प्रार्थियों का कहना है कि उनके बिल स्वीकृति के बावजूद जारी नहीं किए जा रहे हैं। इससे उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ रहा है। कोर्ट ने राज्य सरकार के स्वास्थ्य सचिव को नोटिस जारी कर तीन सप्ताह के भीतर जवाबतलब किया है।  
सरकार भुगतान जारी करने में विफल

प्रार्थियों का कहना है कि उनके बिल हिमाचल प्रदेश स्वास्थ्य बीमा योजना सोसायटी की वेबसाइट पर भी प्रदर्शित हैं। इसके बावजूद प्रतिवादी राज्य सरकार याचिकाकर्ताओं के विधिवत स्वीकृत बिलों/दावों का भुगतान जारी करने में विफल रही है। उनका कहना है कि विधिवत स्वीकृत बिलों/दावों का भुगतान जारी न होने से उन्हें वित्तीय कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है।

याचिकाकर्ताओं के प्रतिवादियों के अंतर्गत सूचीबद्ध स्वास्थ्य सेवा प्रदात्ता होने के कारण हिमकेयर लाभार्थियों को नकद रहित उपचार प्रदान करने के लिए उनके बिल/दावे विधिवत स्वीकृत होने के बावजूद प्रतिवादियों द्वारा याचिकाकर्ताओं को भुगतान जारी न करने की कार्रवाई उचित नहीं ठहराई जा सकती।  
2018 से कैशलेस ट्रीटमेंट कवरेज

प्रार्थियों का कहना है कि 29 दिसंबर 2018 की अधिसूचना के जरिए प्रदेश सरकार ने भी हिमकेयर के तहत कैशलेस ट्रीटमेंट कवरेज देना शुरू किया था। हिमकेयर स्कीम के तहत पैनल में शामिल अस्पतालों में हर परिवार को हर साल पांच लाख रुपये तक का कैशलेस उपचार कवरेज दिया जा रहा है।  
सरकार अप्रूव बिल/क्लेम का पेमेंट जारी करने में असफल

प्रार्थियों के अनुसार, पैनल में शामिल हेल्थ केयर प्रोवाइडर्स होने के नाते वे कानूनी तौर पर हिमकेयर स्कीम के तहत लाभार्थियों को कैशलेस ट्रीटमेंट देने के लिए मजबूर हैं। स्कीम की गाइडलाइंस के मुताबिक उन्होंने अपने बिल भुगतान के लिए जमा किए हैं और सभी बिल/क्लेम मंजूर हो गए हैं। इसके बावजूद राज्य सरकार द्वारा उनके सही तरीके से अप्रूव बिल/क्लेम का पेमेंट जारी करने में असफल रही है।

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