आशीष चौरसिया, ग्रेटर नोएडा। अक्सर बड़े स्तर पर खेती और प्लांट्स लगाने का काम करने वाले लोगों के सामने फसल में कीड़े लगने की अवस्था में दवा का छिड़काव कराने में आती है। इस दौरान उन्हें पूरी फसल में दवा का छिड़काव कराना होता है और ऐसे में उन्हें अधिक रकम खर्च करने के साथ समय की ज्यादा बर्बादी होती है।
इस समस्या का समाधान मणिपाल एकेडमी आफ हायर एजुकेशन मणिपाल कर्नाटक के मणिपाल इंस्टीट्यूट आफ टेक्नालाजी विभाग की मानस टीम ने ढूंढ निकाला है। टीम ने क्लियो और फ्रेया ड्रोन की जोड़ी को तैयार किया है और यह ड्रोन फसल में लगे कीटाणुओं वाले स्थान को स्कैन कर चिंहिंत करते हुए सिर्फ उसी स्थान पर दवा का छिड़काव कराएगा।
गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय में आयोजित सात दिवसीय ड्रोन अनुप्रयोग एवं अनुसंधान कार्यक्रम (निडर) में क्लियो और फ्रेया ड्रोन को मानस टीम ने प्रदर्शित किया है। टीम का नेतृत्व कर रहे असावरी कौसल ने बताया कि क्लियो फसल में लगे कीटाणुओं वाले स्थान को लाइव स्कैन कर फ्रेयो को अवगत कराएगा और फ्रेयो सिर्फ कीटाणुओं वाले स्थान पर दवा का छिड़काव करेगा।
इससे किसान का समय से साथ ही धन की बचत होगी। क्योंकि जो किसान बड़े स्तर पर खेती करते हैं, उनके लिए फसल में एंटी कीटाणु दवाओं का छिड़काव कराना एक बड़े खर्च के साथ ही मेन पावर अधिक लगानी पड़ती है और यह ड्रोन कम समय में कीटाणु वाले स्थान को स्कैन करने के साथ ही उस स्थान पर दवाओं का छिड़काव कर सकेगा।
स्कैन के साथ बताएगा दवा की मात्रा
क्लियो जब कीटाणु लगे वाले स्थान को स्कैन करेगा, उस दौरान ही वह छिड़काव करने के लिए दवा की मात्रा को लाइव बताएगा। ड्रोन से कनेक्ट किए जाने वाले एप पर दिखाई देगी। इस प्रोजेक्ट को असावरी कौशल, भुवन चंद रागनी, सम्या, अनूप कमथ, अनंत सरकार गुप्ता, मिच्छल मारिया, पार्थ, तमन राजा, सुभ केसवानी, आर्यन पगारिया की टीम ने मिलकर तैयार किया है।
हिन्दी-अंग्रेजी समेत विदेशी भाषाओं में देगा जानकारी
टीम से सदस्यों ने बताया कि जिस एप से ड्रोन को कनेक्ट किया जाएगा, उस एप पर हिन्दी, अंग्रेजी, उर्दू, गुजराती, मलयालम समेत भारत की सभी भाषाओं के अलावा अमेरिका, रूस, चीन समेत सभी देशों की भाषा में जानकारी मिलेगी। इससे किसी भी क्षेत्र का ड्रोन का उपयोग करने वाला किसान आसानी से हर जानकारी को समझ सकेगा और उसका उपयोग कर सकेगा।
देश का पहला राष्ट्रीय स्तर कार्यक्रम का हो रहा आयोजन
कार्यक्रम भारत सरकार के इलेक्ट्रानिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सहयोग से तथा ड्रोन फेडरेशन आफ इंडिया के समर्थन से किया गया है। यह देश का पहला राष्ट्रीय स्तर का कार्यक्रम आयोजित हुआ है।
यहां प्रतिभागी छात्र आपदा प्रबंधन के अंतर्गत जियोटैगिंग, आपातकालीन सामग्री की त्वरित डिलीवरी तथा सटीक कृषि के क्षेत्र में स्वचालित उड़ान और सटीक छिड़काव जैसी वास्तविक चुनौतियों पर कार्य कर रहे हैं। यहां के फाइनल विजेता को 40 लाख रुपए का नगद पुरस्कार दिया जाएगा। |