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रूबेल नागी को मिला प्रतिष्ठित ग्लोबल टीचर पुरस्कार 2026, कश्मीर में खोलेंगी स्किल सेंटर

Chikheang 3 hour(s) ago views 1057
  

दुबई में आयोजित विश्व सरकारी सम्मेलन में मिला सम्मान, 10 लाख डॉलर का पुरस्कार



राज्य ब्यूरो, जम्मू। शिक्षाविद्, कलाकार और सामाजिक कार्यकर्ता रूबल नागी को प्रतिष्ठित ग्लोबल टीचर पुरस्कार 2026 सम्मानित किया गया है। उन्होंने घोषणा की है कि पुरस्कार राशि के रूप में मिले 10 लाख अमेरिकी डॉलर का उपयोग वह कश्मीर में एक अत्याधुनिक स्किल एवं लर्निंग सेंटर स्थापित करने में करेंगी। यह सम्मान उन्हें दुबई में आयोजित विश्व सरकारी सम्मेलन के दौरान प्रदान किया गया।

दुबई के क्राउन प्रिंस ने उन्हें यह पुरस्कार सौंपा। ग्लोबल टीचर प्राइज एक वार्षिक अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार है, जिसे वारकी फाउंडेशन ने युनेस्को के सहयोग से शुरू किया था। यह पुरस्कार शिक्षण पेशे में असाधारण योगदान देने वाले शिक्षकों को दिया जाता है।
जम्मू-कश्मीर में विभिन्न सामाजिक पहल चला रही है नागी

इस वर्ष 139 देशों से प्राप्त 5000 नामांकन और आवेदनों में से नागी का चयन किया गया। श्रीनगर में पत्रकारों से बातचीत में नागी ने बताया कि उनका सपना कश्मीर में एक ऐसा संस्थागत स्किल-कम-लर्निंग सेंटर खोलने का है, जहां बच्चे, युवा और महिलाएं एक ही छत के नीचे आकर शिक्षा और कौशल प्रशिक्षण प्राप्त कर सकें।

उन्होंने कहा कि मैं कश्मीर में एक बेहतरीन स्किल एवं लर्निंग सेंटर खोलना चाहती हूं, जहां अलग-अलग जगहों पर सीख रहे लोग एक मंच पर आ सकें। नागी की रूबल नागी आर्ट फाउंडेशन जम्मू-कश्मीर में विभिन्न सामाजिक पहल चला रही है। हाल ही में उन्होंने उत्तरी कश्मीर के कुपवाड़ा जिले के तंगधार सेक्टर के एलओसी गांव अमरोही का दौरा किया।

वहां उन्होंने जरूरतमंद परिवारों को कंबल वितरित किए और विद्यार्थियों से मुलाकात की। उन्होंने कहा कि एलओसी से सटे गांवों में भी अधिक लर्निंग सेंटर खोलकर महिलाओं और युवाओं को सशक्त बनाया जाएगा।
इतनी बड़ी वैश्विक पहचान के साथ जिम्मेदारी भी बढ़ती है

नागी ने कहा कि उनकी संस्था पहले से देश के विभिन्न हिस्सों में शिक्षा और कौशल केंद्र संचालित कर रही है और यह कार्य आगे भी जारी रहेगा। अगर हम पहले 10 काम करने की सोच रहे थे, तो अब 15 कर पाएंगे। यह पुरस्कार हमारे पूरे टीम और सभी शिक्षकों के लिए है। पुरस्कार मिलने पर उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी वैश्विक पहचान के साथ जिम्मेदारी भी बढ़ती है।

उन्होंने कहा कि यह पुरस्कार किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि सभी शिक्षकों और बच्चों का है, जो इस अभियान का हिस्सा रहे हैं। इससे देश में शिक्षकों के सम्मान को और मजबूती मिलेगी। उन्होंने विकसित भारत के विजन को आगे बढ़ाने के लिए सभी से मिलकर काम करने की अपील की और कहा कि हर बच्चे तक शिक्षा पहुंचाना सबसे जरूरी है।   
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