लवलेश कुमार मिश्र, अयोध्या। रामजन्मभूमि परिसर के सात पूरक मंदिरों व सप्तर्षि मंदिरों में भी फरवरी माह से दर्शन सुलभ हो जाएगा। श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने इसके लिए तैयारी प्रारंभ कर दी है। वर्तमान में परकोटे में चल रहा निर्माण से जुड़ा कार्य जनवरी तक समाप्त हो जाने की संभावना है, इसलिए दर्शन के साथ श्रद्धालु परिक्रमा भी कर सकेंगे।
यह अलग बात है कि अभी छह पूरक मंदिरों के शिखर पर धर्म ध्वजा का आरोहण नहीं हो सका है। ट्रस्ट पदाधिकारियों का कहना है कि ध्वजारोहण का दर्शन से कोई साम्य नहीं है। मंदिरों में पूजन-अर्चन तो प्राण प्रतिष्ठा के उपरांत से ही कराया जा रहा है। कुछ मंदिरों पर वर्ष प्रतिपदा तो कुछ पर रामनवमी के दिन ध्वजारोहण हो सकता है।
ट्रस्ट ने राम मंदिर के चहुंओर बने साढ़े सात सौ मीटर लंबे परकोटे के मध्य पंचायतन पद्धति के अनुसार छह देवी-देवताओं के पूरक मंदिरों और सात रामायणकालीन ऋषियों-मुनियों के मंदिरों का निर्माण कराया है। परकोटे के बाहर व राम मंदिर के दक्षिण-पश्चिम में शेषावतार लक्ष्मण मंदिर भी बना है। सभी 14 मंदिरों का निर्माण पूर्ण हो गया है। सातों पूरक मंदिरों में प्रतिमाएं भी स्थापित हैं।
सीएम योगी ने की थी मंदिरों की प्राण प्रतिष्ठा
गत वर्ष पांच जून को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राम मंदिर के प्रथम तल पर राम परिवार को प्रतिष्ठित करने के साथ इन मंदिरों की भी प्राण प्रतिष्ठा की थी। तभी से ट्रस्ट की ओर से इनमें नियमित रूप से पूजन-अर्चन भी किया जा रहा है, परंतु पूरक मंदिरों के सम्मुख कोर्टयार्ड (प्रांगण) निर्माण, हरित विकास, फिनिशिंग व साफ-सफाई का कार्य शेष होने से इनमें दर्शन नहीं आरंभ हुआ है। गत वर्ष 25 नवंबर को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने राम मंदिर के स्वर्ण शिखर पर ध्वजारोहण किया, तब भी इन पर धर्म ध्वजा नहीं फहराई जा सकी।
बाद में प्रतिष्ठा द्वादशी के दिन 31 दिसंबर को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने माता अन्नपूर्णा मंदिर के शिखर पर ध्वजारोहण किया, लेकिन छह पूरक मंदिरों (भगवान शिव, गणेश, सूर्य, मां दुर्गा, हनुमान जी व शेषावतार) पर अभी ध्वजारोहण शेष है। यद्यपि अब कोई भी कार्य नहीं बचा है तो परकोटे की अपूर्णता बाधक बन रही है।
गत दिनों मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने कार्यों की समीक्षा की थी तो समस्त कार्य पूर्ण मिले थे, इस कारण ट्रस्ट ने अब पूरक मंदिरों में दर्शन आरंभ कराने का विचार किया है। ट्रस्ट के सदस्य डा. अनिल कुमार मिश्र ने बताया कि फरवरी के प्रथम सप्ताह से दर्शन शुरू कराने की योजना है। उनका कहना था कि दर्शन में ध्वजारोहण की कोई बाधा नहीं है। ऐसे कई मंदिर हैं, जिनमें धर्म ध्वजा बाद में फहराई गई और दर्शन पहले शुरू हो गया। |
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