यमुना एक्सप्रेसवे पर यात्रियों को अवैध बस स्टॉप का सहारा लेना पड़ रहा है।
जागरण संवाददाता, जेवर। नियमों के मुताबिक, एक्सप्रेसवे पर बस स्टैंड नहीं बनाए जा सकते, लेकिन अवैध बस स्टॉप पर यात्रियों को चढ़ाया और उतारा जा सकता है। यह कहानी है ग्रेटर नोएडा से आगरा तक 165 किलोमीटर लंबे यमुना एक्सप्रेसवे की। ग्रेटर नोएडा से आगरा तक यमुना एक्सप्रेसवे पर यात्रियों के लिए कोई बस स्टैंड नहीं बनाया गया है।
हालांकि, एक्सप्रेसवे पर चलने वाली सरकारी और प्राइवेट बसें इन अवैध स्टॉप पर यात्रियों को चढ़ाती और उतारती हैं। ये अवैध बस स्टॉप ज़्यादातर मुख्य सड़कों के अंडरपास पर बने हैं, जहाँ महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को चढ़ने-उतरने में दिक्कत होती है।
यमुना एक्सप्रेसवे पर बस स्टैंड न होने के बावजूद, ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन की बसों का ग्रेटर नोएडा से जेवर, टप्पल, बाजना, वृंदावन, मथुरा और आगरा तक सभी जगहों के लिए किराया तय है, और बस टिकट भी बाकायदा जारी किए जाते हैं। लेकिन बस से यात्रा करने वालों के लिए यमुना एक्सप्रेसवे पर सफर किसी बुरे सपने से कम नहीं है। ज्यादातर अवैध बस स्टॉप मुख्य सड़कों के अंडरपास पर बने हैं जो यमुना एक्सप्रेसवे के नीचे से गुजरते हैं।
प्राइवेट और रोडवेज (सरकारी) बस ड्राइवर इन जगहों पर यात्रियों को चढ़ाते और उतारते हैं। हर दिन हज़ारों यात्री यमुना एक्सप्रेसवे पर यात्रा करते हैं, लेकिन न तो एक्सप्रेसवे अथॉरिटी और न ही ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन उनके लिए कोई सुविधा दे रहा है। अंडरपास तक जाने वाले कच्चे रास्तों पर चढ़ते-उतरते समय यात्री अक्सर गिर जाते हैं और घायल हो जाते हैं।
अंडरपास पर चढ़ने-उतरने के दौरान यात्रियों के घायल होने की वजह से सामाजिक और किसान संगठन दस साल से सीढ़ियां बनाने की मांग कर रहे हैं, लेकिन अधिकारी नियमों का हवाला देकर मना कर देते हैं।
मैं दस साल से दिल्ली में दिहाड़ी मज़दूरी करता हूँ, और एक्सप्रेसवे पर चढ़ने-उतरने के लिए सीढ़ियां बहुत ज़रूरी हैं। एक्सप्रेसवे के नियमों के मुताबिक, अगर एक्सप्रेसवे पर बस स्टैंड नहीं बन सकते, तो रोडवेज बसें यात्रियों को क्यों ले जाती हैं? अगर अवैध बस स्टॉप के लिए नियम आड़े नहीं आते, तो यात्रियों के लिए सीढ़ियां बनाने में क्यों आते हैं?
-अरुण कुमार शर्मा
खुर्जा अंडरपास से महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों के लिए बस पकड़ना आसान नहीं है। यहां बस में चढ़ते-उतरते समय अक्सर हादसे होते रहते हैं, और बारिश के मौसम में यह समस्या और बढ़ जाती है। या तो बस स्टॉप हटा दिया जाए, या सीढ़ियां बनाना बहुत जरूरी है।
-जोगेंद्र सिंह छोंकर |