सेना की यह पहल स्थानीय पशुपालकों को सशक्त कर रही है और चिकित्सा शिविर भी आयोजित किए जा रहे हैं।
विवेक सिंह, जम्मू। केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में जनवरी महीने की खून जमीने वाली ठंड में सेना आपरेशन सद्भावना से लोगों की मुश्किलाें को दूर कर उनके जीवन में गर्माहट ला रही है।
लद्दाख में विश्व के दूसरे सबसे ठंडे प्रदेश द्रास में इस समय तापमान शून्य से 25 डिग्री नीचे तक गिर रहा है। वहीं पूर्वी लद्दाख में चीन से लगती वास्तविक नियंत्रण रेखा पर भी इस समय पारा माइनस बीस डिग्री नीचे तक गिर रहा है। सेना ने पूर्वी लद्दाख में कियारी गांव को 50 सोलर लाइटों से रोशन है।
इसके साथ सेना ने लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा के करीब दुरबुक में 15,500 फुट की उंचाई पर स्थित राले इचिंग गांव में भेड़, बकरियों को ठंड से बचाने के लिए हीटिंग सुविधा से लैस आधुनिक शीप शेल्टर का निर्माण किया है।
ठंडे मौसम में मेमनों की मृत्यु दर 25 प्रतिशत तक
लेह के दूरदराज थांगथांग इलाके के दुरबुक में जनवरी महीने में तापमान शून्य से बीस डिग्री नीचे तक जा रहा है। इस क्षेत्र में विश्व प्रसिद्ध पशमीना पैदा करने वाली चांगथांगी बकरियां पाली जाती हैं। अत्याधिक ठंड मौसम में भेड़ पालकों के लिए अपने भेड़, बकरियों के बच्चों को बचाना मुश्किल हो जाता था। कुछ समय पहले तक अत्याधिक ठंडे मौसम में मेमनों की मृत्यु दर 25 प्रतिशत तक पहुंच जाती थी। अब सर्दियों में उन्हें बचाने के प्रयास हो रहे हैं।
सेना ने दुरबुक के राले इचिंग गांव में 15,500 फुट की ऊंचाई पर एक आधुनिक शीप शेल्टर का निर्माण किया गया है। आधुनिक हीटिंग सुविधाओं से युक्त यह आश्रय लद्दाख की भीषण सर्दियों में पशुधन को सुरक्षा, गर्माहट व उचित देखभाल सुनिश्चित करेगा।
यह परियोजना केवल बुनियादी ढांचे तक सीमित नहीं है। इससे स्थानीय पशुपालकों व टैंटों में रहने वाले घुमंतू चांगपा परिवारों का आर्थिक रूप में सशक्त करने, सर्दियों में पशु हानि को कम करने व पारंपरिक आजीविकाओं को संरक्षण देने की दिशा में काम हो रहा है।
लद्दाख में बहुत कठिन है सर्दियों का मौसम
लद्दाख के पीआरओ डिफेंस लेफ्टिनेंट कर्नल पीएस सिद्धू का कहना है कि लद्दाख में सर्दियों का मौसम बहुत कठिन है। दूरदराज इलाकों में सर्दियों के मौसम में अत्याधिक ठंड लोगों के जीवन को प्रभावित करती है। भारतीय सेना दूरदराज के इलाकों के लोगों की उम्मीदों व जरूरतों से भली भांति वाकिफ है।
ऐसे में आपरेशन सद्भावना के तहत सेना न सिर्फ सीमा से सटे इलाकों में लोगों की मुश्किलों को दूर किया जाता है अपितु उनका मनोबल भी बरकरार रखा जाता है। लद्दाख के लेह व कारगिल जिलों के दूरदराज इलाकों में लोगों के लिए सेना एक मजबूत सहारा साबित होती है।
इस समय लद्दाख में सेना का आपरेशन सद्भावना जोरों में हैं। जनवरी महीने में सेना की ओर से लोगों के लिए मेडिकल कैंपों के साथ उनकी मुश्किलों को दूर करने के लिए लगातार प्रयास हो रहे हैं। इन दिनों सेना ने पूर्वी लद्दाख के कियारी गांव में 50 सोलर स्ट्रीट लाइटें स्थापित की गईं।
लोगों को हर संभव सहायता प्रदान कर रही सेना
इससे दूरदराज़ क्षेत्र में स्वच्छ व सतत ऊर्जा के माध्यम से जीवन स्तर में काफी सुधार आया है। इसके साथ आपरेशन सद्भावना के सेना ने लेक कोक्शो गांव में चिकित्सा शिविर का आयोजन करने के साथ कारगिल के बटालिक सेक्टर के चुलिचांग गांव में घर-घर जाकर लोगों को चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध करवाई।
सर्दियों में लोगों को मुसीबतों से बचाने की मुहिम भी जोरों पर है। गत दिनों सेना के जवानों ने लेह के दुरबुक में सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल दो लोगों को अपनी पीठ पर उठाकर सुरक्षित निकाल कर उन्हें निकटतम चिकित्सा केंद्र तक पहुंचाया। इसके साथ कारगिल जिले के बारू मेूं रिहायशी इलाके में लगी आग लगने के बाद सेना के जवानों ने देवदूत बनकर आग को आगे फैलने से रोका दिया। |
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