पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट।
राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने सोमवार को एक अंतरिम आदेश पारित करते हुए पंजाब के मुख्यमंत्री के हेलीकाप्टर के उपयोग को लेकर इंटरनेट मीडिया पर उठाए गए सवालों के आधार पर दर्ज एफआईआर में आगे की जांच पर रोक लगा दी है। अदालत ने इस मामले में पंजाब सरकार को नोटिस जारी करते हुए जवाब दाखिल करने के लिए 23 फरवरी की तारीख तय की है।
यह आदेश जस्टिस विनोद एस भारद्वाज ने माणिक गोयल व अन्य की एफआईआर रद्द करने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया। याचिका एक ला स्टूडेंट आरटीआई एक्टिविस्ट तथा तीन पत्रकारों द्वारा दायर की गई थी, जिनके खिलाफ मुख्यमंत्री के हेलीकाप्टर के उपयोग को लेकर इंटरनेट मीडिया पोस्ट और उससे उपजे सार्वजनिक विमर्श के कारण आपराधिक मामला दर्ज किया गया था।
याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत को बताया गया कि यह पूरा आपराधिक मामला एक जनहित के प्रश्न से उत्पन्न हुआ है, जिसमें सार्वजनिक संसाधनों के उपयोग में पारदर्शिता की मांग की गई थी। याचिका के अनुसार 8 दिसंबर को मुख्यमंत्री के लिए आवंटित हेलीकाप्टर की उड़ानें दर्ज की गई, जबकि उस दिन मुख्यमंत्री भगवंत मान आधिकारिक विदेशी दौरे के सिलसिले में भारत से बाहर थे।
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वैध व सार्वजनिक रूप से उपलब्ध थी जानकारी
इसके बावजूद हेलीकाप्टर ने उसी दिन चंडीगढ़ के भीतर कई उड़ानें भरीं, उसके बाद अमृतसर गया, फिर एक अन्य स्थान पर उड़ान भरी और अंततः वापस चंडीगढ़ लौट आया। याचिका में स्पष्ट किया गया है कि यह जानकारी किसी गोपनीय या अवैध स्रोत से नहीं बल्कि फ्लाइट राडार 24 जैसे वैध और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध फ्लाइट-ट्रैकिंग प्लेटफार्म से प्राप्त की गई थी।
हेलीकाप्टर नंबर डालने पर उसकी पूरी मूवमेंट देखी जा सकती थी। याचिका में यह भी विशेष रूप से कहा गया है कि इस मामले में कोई निजी शिकायतकर्ता नहीं है और एफआईआर केवल एक पुलिस अधिकारी की शिकायत पर दर्ज की गई। किसी भी आम नागरिक ने इस संबंध में कोई शिकायत नहीं की।
अगली सुनवाई 23 फरवरी को होगी
इतना ही नहीं, एफआईआर में यह स्वीकार किया गया है कि संबंधित तिथि को हेलीकाप्टर उड़ा था और उसका उपयोग किसी संवैधानिक पद पर आसीन व्यक्ति द्वारा किया गया, लेकिन जानबूझकर उस व्यक्ति की पहचान और हेलीकाप्टर के उपयोग का कारण छुपाया गया है। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने एफआईआर में आगे की जांच पर रोक लगाने का आदेश दिया और पंजाब सरकार को नोटिस जारी करते हुए मामले की अगली सुनवाई 23 फरवरी को निर्धारित की।
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कोर्ट ने उठाए कड़े सवाल
सुनवाई के हाई कोर्ट ने कड़े सवाल उठाते हुए कहा कि देश में पुलिस राज नहीं चल रहा है। कोर्ट ने स्पष्ट टिप्पणी की कि सार्वजनिक जीवन में रहने वाले लोगों को इतना संवेदनशील नहीं होना चाहिए कि उन पर कोई सवाल ही न उठाया जा सके। सरकार की ओर से दलील दी गई कि याचिकाकर्ता की इंटरनेट मीडिया पोस्ट से कानून-व्यवस्था को खतरा पैदा हुआ और लोगों को भड़काने का प्रयास किया गया।
इस पर हाईकोर्ट ने सरकार से पूछा कि यह कैसे साबित होता है और क्या याचिकाकर्ता को इस बारे में कोई पूर्व सूचना दी गई थी। कोर्ट ने सरकारी वकील को यह भी कहा कि अनावश्यक दलील न दी जाए, अन्यथा मामला बहुत आगे तक जा सकता है। साथ ही अदालत ने स्पष्ट किया कि न्यायालय में राजनीतिक बहस की कोई जगह नहीं है।
हाईकोर्ट ने सरकार को नसीहत देते हुए कहा कि लोगों की आवाज दबाने की कोशिश न करें। नागरिकों को यह अधिकार है कि वे सरकार से सवाल पूछें और आलोचना कर सकें। अदालत ने यह भी कहा कि सरकार को अपनी आलोचना से असहज नहीं होना चाहिए और लोगों की भावनाओं से खिलवाड़ बंद करना चाहिए। लोग समझते हैं कि क्या सही है और क्या गलत।
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