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प्रतीकात्मक चित्र
जागरण संवाददाता, बरेली। मुहर्रम के दौरान फरीदपुर के गौसगंज में मानक से ऊंचा ताजिया बनाकर निकाला गया जो हाईटेंशन लाइन की चपेट में आया तो आग लग गई। इस मामले में एसएसपी अनुराग आर्य ने उस वक्त हल्का इंचार्ज अशोक कुमार को निलंबित किया था। साथ ही ताजियादारों के विरुद्ध प्राथमिकी भी लिखाई गई थी।
मामले की विभागीय जांच एसपी नार्थ को दी गई जिसमें तीन दारोगा समेत पांच पुलिसकर्मियों की लापरवाही सामने आई। एसएसपी ने सभी को बेड एंटी दी है। इसके बाद अब उनका एक साल का प्रमोशन और बोनस रुक गया है। घटना छह जुलाई 2025 की है। फरीदपुर के गांव गौसगंज के ताजिया नहर रोड से होते हुए हाईवे पर पुलिया तक जाते हैं।
किसी भी अनहोनी की आशंका को लेकर पुलिस ने सभी ताजियादारों को हिदायत दी थी कि कोई भी ताजियादार 12 फीट से अधिक ऊंचा ताजिया नहीं बनाएगा। ऐसा न हो इसके लिए संबंधित हल्का इंचार्ज की भी जिम्मेदारी थी मगर उन्होंने लापरवाही की जिसकी वजह से ताजियादारों ने 25 फीट ऊंचा ताजिया बना लिया।
यह ताजिया जब गौसगंज नहर किनारे पहुंचा तो वहां हाईटेंशन लाइन चपेट में आ गया और आग लग गई। घटना की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी ने तत्काल ही हल्का इंचार्ज अशोक कुमार को निलंबित किया और पूरे प्रकरण की विभागीय जांच के लिए एसपी नार्थ मुकेश मिश्रा को नियुक्त किया। इसके अलावा ताजियादारों के विरुद्ध प्राथमिकी भी लिखी थी।
एसपी नार्थ मुकेश मिश्रा ने मामले की जांच पूरी की जिसमें पता चला कि सिर्फ एक ही नहीं बल्कि कुछ अन्य ताजिया भी मानक से ऊंचे बने थे। इस मामले में उन्होंने फरीदपुर थाने के दारोगा शोभित कुमार, जसवीर सिंह व अशोक कुमार, हेड कांस्टेबल महावीर सिंह और कांस्टेबल विनय कुमार को दोषी बनाया।
एसएसपी ने एसपी नार्थ की रिपोर्ट पर एसएसपी ने दंड दिया। उन्होंने सभी की चरित्र पंजिका पर परिनिंदा प्रविष्टि (बैड इंट्री) दर्ज की है। एसएसपी के मुताबिक, इस कार्रवाई के बाद संबंधित पुलिसकर्मियों का एक साल का प्रमोशन और बोनस रुक जाता है।
ताजिया में आग लगने के प्रकरण में एसपी नार्थ को जांच सौंपी गई थी। उन्होंने अपनी रिपोर्ट में तीन दारोगा समेत पांच पुलिसकर्मियों को दोषी ठहराया है। सभी के विरुद्ध परिनिंदा प्रविष्टि की कार्रवाई की गई है।
- अनुराग आर्य, एसएसपी
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