search

नोएडा में स्वच्छ पानी की कमी, निवासियों ने पुरानी सीवर लाइनों को बदलने की मांग की

deltin33 1 hour(s) ago views 807
  

नोएडा सेक्टर-63 स्थित दैनिक जागरण कार्यालय में हुई पाठक पैनल की बैठक में मौजूद गौतमबुद्ध नगर के निवासी। जागरण



जागरण संवाददाता, नोएडा। गौतमबुद्ध नगर में पानी आपूर्ति की एक व्यवस्था है। इस व्यवस्था की निगरानी और सुधार कार्यों के लिए जिम्मेदारी तय है। व्यवस्था को व्यवस्थित चलाने वाले व्यवस्थापकों की गंभीर लापरवाही हैं। जिले में हर घर में स्वच्छ जल मुहैया नहीं हो पा रहा है।

सोमवार को दैनिक जागरण कार्यालय में आयोजित चर्चा में नोएडा-ग्रेटर नोएडा के निवासी जुटे। दोनों शहर इंदौर नहीं बनें इस पर चर्चा हुई। बेहतर पानी की आपूर्ति पर सुझाव दिए। कई बिंदुओं पर नोएडा और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की कमियां उजागर हुईं। जिले की 70 फीसदी आबादी अभी भी स्वच्छ जल से वंचित है। घरों में किस गुणवत्ता का पानी पहुंच रहा है इसकी जानकारी उपभोक्ता को नहीं है।

नोफा (नोएडा फेडरेशन ऑफ अपार्टमेंट आनर्स एसोसिएशन) अध्यक्ष राजीव सिंह कहा कहा नोएडा अपनी स्थापना के 49 वर्ष पूरा कर चुका है। यह 50वां होगा। यहां घरों में आपूर्ति हो रहे पानी की कठाेरता कम नहीं हुई। प्राधिकरण के यूजीआर से घरों में पहुंच रहे पानी की गुणवत्ता की रिपोर्ट सार्वजनिक करनी चाहिए।

  

घरों में पहुंचने से पहले जिन जगहों पर पानी स्टोर होता है वहां से पानी की गुणवत्ता रिपोर्ट प्रतिदिन निवासियों के साथ साझा होनी चाहिए। फोनरवा अध्यक्ष योगेद्र शर्मा ने कहा कि सीवर और पानी की लाइन पुरानी हैं। यह बदले जाने चाहिए। प्राधिकरण को शहर में डब्ल्यूटीपी से पानी ट्रीट कर आपूर्ति करना चाहिए। जर्जर पाइप लाइन बदलने का मुद्दा कई बार उठाया भी गया है।

नोफा महासचिव सुराेजित दास गुप्ता ने कहा कि यूजीआर समेत पानी आपूर्ति की लाइन का आडिट होना चहिए। यह रिपोर्ट पारदर्शिता के लिए निवासियों के साथ साझा करनी चाहिए। सोसायटी में बने टैंक के सफाई के मानक तय कर प्राधिकरण से तय होने चाहिए। कोनरवा अध्यक्ष पीएस जैन ने कहा कि प्राधिकरण को भूजल को ट्रीट कर यूजीआर में लेना चाहिए।

इसके बाद घरों तक मुख्य आपूर्ति करनी चाहिए। यूजीआर की सफाई कब हुई इसकी जानकारी संबंधित को देनी चाहिए। भरत वलेचा ने कहा कि पुराने सेक्टरों में सीवर लाइन कंक्रीट की है। यह पुरानी हो चुकी है। पाइप लाइन कई जगह से लीकेज होती है। सीवर का पानी इसमें मिल जाता है। दोनों लाइन को बदला जाना चाहिए।

सेक्टर-50 ब्लाक-एफ आरडब्ल्यूए अध्यक्ष राजेश सिंह ने कहा एक बोरवेल का पानी कई किमी लंबी लाइन के माध्यम से कई सेक्टरों में आपूर्ति होती है। हर सेक्टर में एक बाेरवेल से आपूर्ति होगी तो पाइप लाइन छोटी होगी। खराबी होने छोटे हिस्से में आसानी से खोजा जा सकेगा।

दूषित पानी की आपूर्ति लंबे हिस्से में नहीं हो सकेगी। नोएडा सिटीजन फोरम की कार्यकारी अध्यक्ष शालिनी सिंह ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद-21 के तहत नोएडा के नागरिकों को स्वच्छ पानी देना प्राधिकरण का दायित्व है।40 वर्षों में प्रत्येक नागरिक को स्वच्छ जल मुहैया नहीं हुआ। इस तरह नोएडा वर्ल्ड क्लास सिटी नहीं बन सकेगा।

फोरम की मांग है कि नोएडा के हर नागरिक को स्वच्छ पानी की उपलब्धता ना हो जाए तब तक हर बोर्ड बैठक में प्राधिकरण इसको अपने एजेंडा में सर्वोच्च प्राथमिकता पर दर्ज करे। सेक्टर-27 के आरडब्ल्यूए अध्यक्ष राजीव गर्ग ने कहा कि पानी की आपूर्ति की जांच के लिए एक निगरानी समिति बननी चाहिए।

सेक्टर-36 की आरडब्ल्यूए अध्यक्ष अनीता सिंह ने कहा कि नोएडा में आज भी योजनाएं औद्योगिक शहर की तरह हैं। आवासीय क्षेत्रों में सुविधाओं की पूर्ति में ध्यान नहीं है। विसकित की उम्मीद में आकर नोएडा को अविकसित शहर नहीं देखना चाहते। नोवरा (नोएडा विलेज रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन) रंजन तोमर ने कहा कि नोएडा क्षेत्र में सबसे पहले सिटीजन चार्टर था।

यहां दर्ज शिकायतों का निस्तारण और उनकी जवाबदेही तय होती थी। यह अब नहीं है। यह शुरू होना चाहिए। पानी की आपूर्ति और जांच से संबंधित एक पैनल होना चाहिए। प्राधिकरण की बोर्ड बैठक से पूर्व लोगों से बैठक कर सुझाव लिए जाएं। सोहरखा निवासी रवि यादव ने कहा कि गांव में सीवर लाइन डाल दी गई है। कनेक्शन नहीं दिया गया।

लोगों ने खुद कनेक्शन जोड लिए। अब सीवर लाइन लीक होकर सड़कों और नालियों में बह रही है। जमीन से रिसकर सीवर का पानी बोरवेल से घरों में पहुंच रहा है। गांव मे कनेक्शन देकर सीवर लाइन को मुख्य लाइन से जोड़ने का कार्य करना चाहिए। हरौला निवासी वेद प्रधान ने बताया कि नोएडा में आपूर्ति के लिए सबसे पहली टंकी सेक्टर-5 में बनकर तैयार हुई।

आज हरौला गांव में 90 फीसदी लोगों को पानी की आपूर्ति नहीं हैं। जहां आपूर्ति हो रही है वहां लाइन की सफाई भी ठीक से नहीं होती है। हरौला निवासी सतीश प्रमुख ने कहा कि गांव की पानी लाइन पुरानी हैं। यह व्यवस्थित कार्य नहीं करतीं। लाइनों को बदलकर आबादी के अनुसार डाला जाना चाहिए।

एनसीएफ से अंकित अरोडा ने कहा कि गंगाजल की आपूर्ति बाधित होने पर कोई वैकल्पिक इंतजाम नहीं हैं। टीडीएस की मानीटरिंग होनी चाहिए और इसकी रिपोर्ट प्रतिदिन निवासियों के साथ साझा करनी चाहिए। जल संरक्षण को लेकर अभियान और वीडियो फोटो के माध्यम से व्यापक स्तर पर जागरूकता अभियान चलने चाहिए।
शिकायतों को दबाया नहीं हल किया जाए

बीते दिनों ग्रेटर नोएडा में दूषित पानी से दर्जनों लोग बीमार हुृए। प्राधिकरण की ओर से यहां आपूर्ति होती है। ग्रेटर नोएडा के सेक्टर अल्फा-2 भी इससे प्रभावित हुआ। आरडब्ल्यूए अध्यक्ष सुभाष आबादी ने बताया कि सेक्टर में आबादी भी अधिक नहीं है। जगह भी है। प्राधिकरण की ओर से यहां स्वच्छ जल की आूपूर्ति नहीं हो सकी।

शिकायत पर शिकायतकर्ता को ही दबाया जाता है। अधिक शिकायत पर आपूर्ति बंद कर दी जाती है। यह तानाशाही रवैया नहीं चलेगा। प्राधिकरण के वरिष्ठ अधिकारियों को कार्य के लिए धरातल पर उतरना होगा। नेफोवा अध्यक्ष अभिषेक सिंह ने बताया कि पानी की आपूर्ति के लिए प्राधिकरण से लेकर सोसायटी प्रबंधन तक की जवाबदेही तय होनी चाहिए।

दूषित या खराब पानी की आपूर्ति पर दोनों एक दूसरे पर जिम्मेदारी टालते हैं। पानी हर नागरिक का अधिकार है। दीपांकर कुमार ने बताया कि खराब पानी की आपूर्ति में भ्रष्टाचार सबसे बडी वजह है। खराब पानी को भी अच्छी गुणवत्ता का बताकर लोगों को पिलाया जाता है। बीमार होने के जिम्मेदारों की जांच कराई रिपोर्ट ठीक होती है।

वहीं, बीमार अपने स्तर से जांच कराता है तो तमाम कमियां उजागर होतीं हैं। ग्रीनआर्क के एओए अध्यक्ष नवल सिंह नूे बताया कि सोसायटी, बडी कंपनी और फैक्ट्रियों में 90 प्रतिशत एसटीपी और ईटीपी नहीं चलते हैं। इनको प्रभावी रूप से शुरू कराना चाहिए। अशोधित पानी को नदी और नालों में छोडा जा रहा है।

यह भूजल में मिल रहा है। भूजल से फिर घरों तक पहुंच रहा है। एसटीपी और ईटीपी संचालित होने से पानी को बचाया जा सकता है और भूजल की गुणवत्ता को सुधारा जा सकता है। नेकी के डिब्बा के संस्थापक गिरीश शुक्ला ने कहा कि पानी गंभीर मुद्दा है। इसकी आपूर्ति में पारदर्शिता होनी चाहिए।

इरोज संपूर्णम सोसायटीवासी और नगर संघचालक दुर्गेश खंडेलवाल ने कहा कि सोसायटी में प्राधिकरण की एक ही मोटर से आपूर्ति होती है। यहां कोई वैकल्पिक इंतजाम नहीं है। खराबी होने पर बैकल्पिक मोटर का भी यहां इंतजाम होना चाहिए।
शिकायत और सुझाव के लिए करें ईमेल

शहर की किसी भी शिकायत और सुझाव के लिए mynoida@nda.jagran.com पर ईमेल करें।
like (0)
deltin33administrator

Post a reply

loginto write comments
deltin33

He hasn't introduced himself yet.

1510K

Threads

0

Posts

4610K

Credits

administrator

Credits
460646

Get jili slot free 100 online Gambling and more profitable chanced casino at www.deltin51.com