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मुजफ्फरपुर अस्पताल में प्रसूता के साथ निर्दयता, ऑपरेशन का टांका काटने के बाद चढ़ा दीं 19 सीढ़ियां

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सदर अस्पताल में प्रसूता के साथ अमानवीय व्यवहार। फोटो जागरण



जागरण संवाददाता, मुजफ्फरपुर। सदर अस्पताल परिसर के मातृ-शिशु अस्पताल में प्रसूता के साथ अमानवीय व्यवहार किए जाने का मामला सामने आया है। ऑपरेशन से प्रसव के बाद टांका काटा नहीं कि उसे जरूरी कागजात के लिए 19 सीढ़ियां चढ़ने को मजबूर कर दिया गया।

इस तरह के व्यवहार से नाराज प्रसूता के स्वजन ने अस्पताल की व्यवस्था को कोसते हुए शिकायत की। डिस्चार्ज प्रमाणपत्र लेने अधीक्षक कार्यालय पहुंचीं प्रसूता देवरिया की रागनी कुमारी ने बताया अधीक्षक कार्यालय तक पहुंचने के लिए करीब 19 सीढ़ियां चढ़नी पड़ीं। इससे उनकी हालत खराब हो गई।
सीढ़िया चढ़ने को मजबूर

प्रसूता ने बताया कि पांच जनवरी को मातृ-शिशु अस्पताल में भर्ती कराया गया था। प्रसव के बाद उन्हें सुबह 10 बजे टांका काटने के बाद डिस्चार्ज कर दिया गया, लेकिन बेड पर ही डिस्चार्ज स्लिप नहीं दी गई।

इसके बाद एंबुलेंस चालक प्रसूता को लेकर अस्पताल परिसर स्थित अधीक्षक कार्यालय पहुंचा और बताया कि ऊपर जाकर एक हस्ताक्षर कराना जरूरी है।

इस पर प्रसूता के स्वजन ने विरोध जताया और कहा अभी-अभी टांका कटे हैं। ऐसे में सीढ़ियां चढ़ना उनके लिए संभव नहीं है। इसके बाद भी उनकी बात नहीं सुनी गई। मजबूरी में दोपहर एक बजे प्रसूता सीढ़ियां चढ़ने लगीं।

9 सीढ़ियां चढ़ने के बाद जब वह थककर रुक गई तो पीछे से एंबुलेंस चालक ने जल्दी करने का दबाव बनाया। किसी तरह वह सीढ़ियां चढ़कर लेखा कार्यालय पहुंचीं, जहां तैनात कर्मी ने कागजात सौंपे।

वहां से लौटते समय प्रसूता भावुक हो गईं। कहा हालत खराब है, ऊपर चढ़ने के बाद अब फिर नीचे उतरना पड़ेगा। भगवान का नाम लेकर वह नीचे उतरीं।
कागजात के लिए किया गया परेशान

प्रसूता के साथ आए विजय कुमार ने बताया करीब तीन घंटे तक कागजात के लिए उन्हें परेशान किया गया। आरोप लगाया कि प्रसव के दौरान नेग के नाम पर खर्च करना पड़ा। अब किसी तरह घर जाने की इजाजत मिल जाए, यही काफी है। इसके बाद एंबुलेंस से वे लोग अस्पताल से निकल गए।

उधर, सदर अस्पताल के अधीक्षक डॉ. बीएस झा ने कहा किसी भी प्रसूता को सीधे बेड से घर भेजा जाना चाहिए। किसके कहने पर प्रसूता को कागजात के लिए कार्यालय भेजा गया, इसकी जांच कराई जाएगी।

यदि किसी कागजात पर हस्ताक्षर की जरूरत थी तो उसे बेड पर ही जाकर कराया जाना चाहिए था। प्रबंधक से रिपोर्ट लेने के बाद जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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