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चित्रकूट कोषागार घोटाला: एक और दलाल भेजा गया जेल, दो पूर्व अधिकारियों से भी पूछताछ जारी

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जागरण संवाददाा, चित्रकूट। वर्ष 2018 से 2025 तक जिला कोषागार में हुए 43.13 करोड़ रुपये के घोटाले की जांच में पुलिस विशेष जांच दल (एसआईटी) ने एक और दलाल को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार दलाल बृजेश कुमार निवासी सुहेल थाना मऊ को न्यायालय में पेश करने के बाद जिला कारागार भेजा गया। उसने तीन पेंशनरों के साथ सांठगांठ कर अनियमित भुगतान कराकर लगभग 12 लाख रुपये कमीशन वसूला।

एसआईटी ने इसके बैंक ट्रांजेक्शन के सबूत भी जुटाए हैं। घोटाले में अब तक 25 पेंशनर, दो कोषागार कर्मी और आठ दलाल गिरफ्तार हो चुके हैं। जांच में एसआईटी ने कुल 21 दलालों की पहचान की है। साथ ही, पूर्व में तैनात वरिष्ठ कोषाधिकारी कमलेश कुमार और शैलेश कुमार को नोटिस जारी कर पूछताछ के लिए बुलाया गया।

कमलेश कुमार सेवानिवृत्त हो चुके हैं, जबकि शैलेश कुमार वर्तमान में बरेली में मुख्य कोषाधिकारी के पद पर तैनात हैं। तीन दिन पहले नोटिस जारी होने के बाद दोनों एसआईटी के समक्ष प्रस्तुत हुए और कई टीमों ने उनका बयान दर्ज किया।

एसआईटी की जांच लगभग ढाई माह से चल रही है। टीम पेंशनरों की मूल पत्रावली, बैंक स्टेटमेंट और अनियमित भुगतान में शामिल कर्मचारियों और दलालों के कनेक्शन का विश्लेषण कर रही है। प्रारंभिक जांच में पाया गया कि घोटाले में शामिल दलाल और कुछ कर्मचारी मिलकर पेंशनरों के खातों में फर्जी भुगतान कर रहे थे।

इस मामले में कुल 93 खातों में आनलाइन और चेक के माध्यम से राशि ट्रांसफर की गई। घोटाला इतना सुनियोजित था कि कई महत्वपूर्ण दस्तावेज गायब कर दिए गए थे। नियम अनुसार प्रत्येक तीन महीने में पेंशनरों का सत्यापन किया जाना था, लेकिन वरिष्ठ कोषाधिकारी रमेश सिंह की 26 सितंबर 2025 की रिपोर्ट में फर्जी पेंशन का कोई मामला नहीं पाया गया।

इसके 15 दिन बाद ही यह घोटाला उजागर हुआ। प्रयागराज से आई विशेष आडिट टीम ने ट्रेजरी एक्सेस डेटा की जांच कर 93 खातों को सीज किया और 17 अक्टूबर को वरिष्ठ कोषाधिकारी ने संबंधित खाताधारकों व चार कर्मचारियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई।  

एसआईटी की छानबीन में यह स्पष्ट हुआ कि केवल पेंशनर या कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत से यह घोटाला संभव नहीं था। इसलिए जांच का दायरा बढ़ाते हुए पांच वरिष्ठ कोष अधिकारियों और 27 कर्मचारियों को नोटिस जारी कर एक सप्ताह के भीतर जवाब देने के लिए बुलाया गया। जिसके तहत दोनों पूर्व अधिकारी सोमवार को एसआईटी के सामने पेश हुए। जांच में फर्जी भुगतान की कड़ियां चित्रकूट के साथ प्रयागराज, कौशांबी, फतेहपुर और बांदा तक पाई गई हैं।

प्रभारी पुलिस अधीक्षक सत्यपाल सिंह ने बताया कि ट्रेजरी घोटाले में संबंधित लोगों से पूछताछ जारी है और विभागीय कर्मियों को नोटिस जारी कर जांच में सहयोग करने के लिए कहा गया है। यह स्पष्ट हो गया है कि कोषागार घोटाला सुनियोजित और व्यापक स्तर का था।

सभी चिह्नित दलालों की तलाश की जा रही है। इसके साथ ही पूर्व और वर्तमान कोषागार अधिकारियों की भूमिका पर भी गहन छानबीन की जा रही है। इस पूरे मामले में एसआईटी की नजर हर स्तर पर है और आगामी दिनों में और बड़ी कार्रवाई की संभावना जताई।
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