Delhi HC
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। दिल्ली के अस्पतालाें में स्वास्थ्य सुविधाओं के मामले पर दिल्ली हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा है कि सभी सरकारी अस्पतालों की सूची और वहां मौजूद एक्स-रे, एमआरआई और सीटी स्कैन जैसी डायग्नोस्टिक और रेडियोलाॅजिकल सुविधाओं में से कितनी काम कर रही हैं। अदालत ने सरकार को स्थिति रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। न्यायमूर्ति प्रतिबा एम सिंह व न्यायमूर्ति मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा की पीठ ने दिल्ली सरकार से यह बताने को कहा कि क्या इन अस्पतालों में डायग्नोस्टिक मशीनें काम कर रही हैं और 2025 में वहां कितने मरीजों के परीक्षण हुए।
रेडियोलाॅजिकल रिपोर्ट में देरी क्यों?
2017 में सरकारी अस्पतालों में सुविधाओं से जुड़े मामले का स्वत: संज्ञान लेकर शुरू किए गए मामले पर विचार करते हुए अदालत ने रिकाॅर्ड पर लिया कि रेडियोलाॅजिकल टेस्ट की रिपोर्ट काफी देरी से मिलती हैं और दिल्ली सरकार से इस पहलू पर गौर करने और एक रिपोर्ट दाखिल करने को कहा।
पीठ ने आदेश दिया कि दिल्ली सरकार द्वारा एक चार्ट तैयार किया जाए और रिकाॅर्ड पर रखा जाए। सुनवाई के दौरान दिल्ली सरकार ने अदालत को सूचित किया कि अगर सरकारी अस्पतालों में एमआरआई, सीटी स्कैन और अन्य रेडियोलाॅजिकल सेवाओं के लिए वेटिंग पीरियड तीन दिन से ज्यादा है, तो 35 पैनल में शामिल डायग्नोस्टिक सेंटर हैं जहां मरीज मुफ्त सेवाएं ले सकते हैं। यह भी कहा कि इन 35 सेंटरों में से कुछ में रेडियोलाॅजिकल सेवाएं उपलब्ध हैं और पिछले साल इन सेंटरों को 80 करोड़ रुपये दिए गए थे।
हालांकि, पीठ ने कहा कि अदालत सरकार के रुख से संतुष्ट नहीं है क्योंकि इस बात पर कोई स्पष्टता नहीं है कि ये 35 डायग्नोस्टिक सेंटर अल्ट्रासाउंड, एक्स-रे, एमआरआई और सीटी स्कैन जैसी रेडियोलाॅजिकल सेवाएं देने में सक्षम हैं या नहीं, जबकि यह मरीजों के लिए बहुत बुनियादी सेवाएं हैं। इसके साथ ही अदालत ने सभी 35 डायग्नोस्टिक सेंटरों और वहां उपलब्ध सेवाओं के प्रकार के साथ-साथ सरकारी अस्पतालों से रेफर किए जाने के बाद रेडियोलाजिकल सेवाओं का लाभ उठाने वाले मरीजों की संख्या का विवरण देने को कहा।
अब पांच लाख तक मिलेगा निश्शुल्क इलाज
अदालत ने रिकाॅर्ड पर लिया कि सरकारी अस्पतालों और रियायती जमीन पर बने निजी अस्पतालों में नि:शुल्क इलाज पाने के लिए आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) की आय सीमा को 2.25 लाख रुपये से बढ़ाकर पांच लाख रुपये सालाना कर दिया गया है। अब इस मामले की सुनवाई 13 फरवरी को होगी।
अदालत द्वारा पारित किए गए अहम निर्देश
- संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) और दिल्ली अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड (डीएसएसएसबी) को अस्पतालों में विशेषज्ञों, नर्सिंग और पैरा-मेडिकल स्टाफ की भर्ती की प्रक्रिया में तेजी लाने और यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि इस प्रक्रिया में और देरी न हो।
- दिल्ली सरकार और राष्ट्रीय सूचना केंद्र (एनआईसी) इस डेटा को मोबाइल एप्लिकेशन पर रियल-टाइम आधार पर उपलब्ध कराने की संभावना का अध्ययन करें ताकि ऐसी दुर्घटनाओं का सामना करने वाले मरीजों व इससे निपटने वाले पुलिस कर्मियों के लिए एम्बुलेंस प्रोवाइडर्स, प्राइवेट अस्पतालों आदि के लिए आसानी से उपलब्ध हो सके। इस पहलू पर अगली तारीख पर एक स्थिति रिपोर्ट पेश की जाए।
- भविष्य में जब भी कोई एमएस व एमडी या अस्पतालों के डायरेक्टर रिटायर होने वाले हों, तो दिल्ली सरकार समय पर पदों को भरने के लिए पहले से ही उचित कदम उठाए।
- पीएमजेएवाई और पीएम-एबीएचआइएम योजनाओं को कुशल और मजबूत तरीके से लागू किया जाए, ताकि सभी हकदार नागरिकों को इनका लाभ मिल सके।
- लोक नायक अस्पताल में काम पूरा करने के संबंध में लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) और दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग के अधिकारियों के बीच एक बैठक आयोजित की जाए। क्योंकि इस प्रोजेक्ट में पहले ही 550 करोड़ रुपये से ज़्यादा का बड़ा खर्च हो चुका है, इसलिए इस अस्पताल को जल्द से जल्द पूरा किया जाना चाहिए ताकि इसे चालू किया जा सके।\“
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