डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। ईरान में जारी विरोध-प्रदर्शन वहां के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गई हैं। पिछले दो हफ्तों से जिस तरह से यहां प्रदर्शन देखने को मिल रहा है, वह बेहद असाधारण है।
जैसे-जैसे प्रदर्शनकारी रात-दर-रात ईरान की सड़कों पर आ रहे हैं, वैसे-वैसे क्षेत्र और दुनिया भर के नेता यह उम्मीद लगा रहे हैं कि इस्लामी गणराज्य का पतन हो जाएगा।
वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के बाद ट्रंप अब ईरान को भी चेतावनी दे चुके हैं कि वे वहां हो रहे प्रदर्शनकारियों के साथ हैं। इससे यह संकेत मिलता है कि ईरान में अमेरिका सत्ता परिवर्तन के प्रयासों में फिर से जुट गया है।
क्या इस्लामी गणराज्य को उखाड़ फेंका जा सकता है?
ईरान में जारी प्रदर्शन को लेकर दुनिया भर के नेता इस संभावना से जूझ रहे हैं कि इस्लामी गणराज्य को उखाड़ फेंका जा सकता है। अगर ऐसा होता है तो यह घटना वैश्विक भू-राजनीति और ऊर्जा बाजारों को बदल देगी। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि इससे इस इस्लामी शासन का अंत हो जाएगा। उनका मानना है कि संकट गंभीर जरूर है, लेकिन उसका अंतिम रास्ता अभी तय नहीं है।
बढ़ती महंगाई, गिरती मुद्रा और बेरोजगारी को लेकर 28 दिसंबर को ईरान में शुरू हुए विरोध प्रदर्शन अब मौलवी सिस्टम में पूरी तरह बदलाव की मांग तक पहुंच गए हैं, जिसने 1979 की क्रांति में राजशाही को सत्ता से हटाने के बाद से ईरान पर शासन किया है।
लगातार कार्रवाई
ईरान के अधिकारी प्रदर्शनकारियों के खिलाफ लगातार कार्रवाई कर रहे हैं। मानवाधिकार समूहों के मुताबिक, इस कार्रवाई में सैकड़ों लोगों की मौत हुई है। पेरिस में साइंसेज पो सेंटर फॉर इंटरनेशनल स्टडीज की प्रोफेसर निकोल ग्राजेव्स्की का कहना है कि यह संकट किस दिशा में जाएगा, यह अभी साफ नहीं है। खामनेई शासन को लेकर उन्होंने कहा कि यह साफ तो नहीं है कि विरोध प्रदर्शनों से लीडरशिप हटेगी या नहीं, लेकिन इस बातचीत में वो ईरान के दबाने वाले सिस्टम की गहराई और मजबूती की ओर इशारा किए।
ईरानी शासन पहले से अधिक कमजोर
वहीं ओटावा विश्वविद्यालय के प्रोफेसर थॉमस जूनो ने सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की सरकार के पतन को लेकर कहा कि मुझे अभी भी नहीं लगता कि शासन का पतन होने वाला है। हालांकि, मुझे इस आकलन पर पहले की तुलना में कम भरोसा है। क्योंकि, ईरानी शासन आज घरेलू और वैश्विक दोनों स्तरों पर पहले से कहीं अधिक कमजोर है।
ट्रंप की चेतावनी
ईरान को ट्रंप की बार-बार दी गई चेतावनी कि अगर वह शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की हत्या करता है तो अमेरिका हमला करेगा। रविवार को ट्रंप ने कहा कि वह ईरान की स्थिति पर बारीकी से नजर रख रहे हैं। हम इस पर बहुत गंभीरता से विचार कर रहे हैं। सेना भी इस पर नजर रख रही है और हम कुछ ठोस विकल्पों पर विचार कर रहे हैं।
ईरान में अब तक क्या-क्या हुआ?
ईरान की राजधानी तेहरान में बीते 28 दिसंबर को शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन कुछ ही दिनों में राजधानी समेत अन्य बड़े शहरों में पहुंच गया। इससे पहले ईरान में 2022-2023 बड़ा विरोध प्रदर्शन हुआ था। सितंबर 2022 में धार्मिक मामलों की पुलिस ने ईरानी महिला महसा अमीनी को गिरफ्तार किया था। उससे पहले 2009 में भी विवादित चुनावों के बाद बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए थे।
46 साल बाद ऐसा प्रदर्शन
गौरतलब है कि 1979 में इस्लामिक क्रांति के जरिये अयातुल्ला खोमेनी ने शाह रजा पहलवी को हटाकर ईरान की सत्ता पर कब्जा किया था। खोमैनी के निधन के बाद से खामेनेई ने सर्वोच्च नेता पद पर काबिज हैं। वह इस पद लाइफटाइम रहने वाले हैं। बीते 46 वर्षों से ईरान के लोग इस शासन को झेल रहे हैं। अब वे बदलाव चाहते हैं। वे देश में पंथ निरपेक्ष लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था चाहते हैं। 46 साल बाद यहां ऐसे प्रदर्शन हो रहे हैं, जिसमें लग रहा है कि खामनेई की सत्ता जा सकती है।
खुमैनी की मौत के बाद खामनेई को मिली सत्ता
ईरान में 1979 में हुई क्रांति के अगुवा रुहोल्लाह खुमैनी की मौत के बाद से खामनेई ने यह जिम्मेदारी संभाली है। खामनेई हमेशा की तरह सख्त लहजे में विरोध-प्रदर्शनों की निंदा की। ईरानी पुलिस लगातार प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई कर रही है। इससे यह संकेत मिला कि सत्ता फिलहाल झुकने के मूड में नहीं है।
अब तक क्या-क्या हुआ?
विरोध प्रदर्शन 28 दिसंबर को तेहरान के बाजार में हड़ताल के साथ शुरू हुआ था, लेकिन बीते हफ्ते राजधानी और अन्य शहरों में बड़े पैमाने पर रैलियों के साथ यह सत्ता के लिए एक बड़ी चुनौती में तब्दील हो गया. इससे पहले 2022-2023 में ईरान में बड़ा विरोध प्रदर्शन हुआ था। इस बार ईरानी अधिकारियों ने पिछले कई दिनों से पूरे देश में इंटरनेट सेवा बंद कर दिया है।
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