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केंद्रीय सतर्कता आयोग के रडार पर दरभंगा का ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय

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यह तस्वीर जागरण आर्काइव से ली गई है।  



प्रिंस कुमार, दरभंगा। ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय निगरानी विभाग के बाद केंद्रीय सतर्कता आयोग के रडार पर भी आ गया है। इसको लेकर 15 दिसंबर 2025 को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के शिक्षा अधिकारी डा. रवींद्र कुमार ने विश्वविद्यालय के कुलसचिव को रिमाइंडर भेजा है।

विश्वविद्यालय में रेगुलेशन उल्लंघन कर पीएचडी करवाने सहित अन्य कई मामले को लेकर आठ दिसंबर 2023 को केंद्रीय सतर्कता आयोग में शिकायत दर्ज की गई है। इसकी जांच और कार्रवाई के लिए केंद्रीय सतर्कता आयोग द्वारा विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के सचिव को अधिकृत किया गया है।

यूजीसी ने पत्र में विगत दो अप्रैल 2025 को भेजे गए पत्र पर कार्रवाई कर विश्वविद्यालय द्वारा कोई भी जवाब नहीं भेजे जाने का भी जिक्र किया है। शीघ्र कार्रवाई कर जवाब भेजने को भी कहा गया है।

बता दें कि पीएचडी में रेगुलेशन उल्लंघन कर निर्धारित से 10 गुना अधिक पर नामांकन, नौकरी-पेशा वाले का मनमाने ढंग से नामांकन और बिना नियमित उपस्थिति डिग्री देने, प्रोबेशन अवधि में शिक्षक का नामांकन, पिता के पर्यवेक्षण में पीएचडी, रेगुलेशन उल्लंघन कर पैट 2020, पैट 2021-22 के आयोजन सहित पैट 2020 में कम अंक वाले का नामांकन, शिक्षक व कर्मी का कोर्स वर्क में बिना अवैतनिक अवकाश के नामांकन सहित अन्य मामले पर निगरानी विभाग में भी शिकायत दर्ज हुई है।

निगरानी विभाग का पत्र राजभवन से अग्रेषित होकर विश्वविद्यालय को चार जुलाई 2025 को ही भेजा गया है। इसके बावजूद अबतक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।

केंद्रीय सतर्कता आयोग के समक्ष शिकायत दर्ज कराने वालों का कहना है कि उन्होंने विश्वविद्यालय में विशेष रूप से पैट आवेदन से लेकर रिजल्ट तक में हो रही धांधली के अकाट्य साक्ष्य के साथ राजभवन को भी आवेदन दिया था। लेकिन उसने उसी विश्वविद्यालय को जांच कर प्रतिवेदन भेजने के लिए कहा, जिसके खिलाफ शिकायत की गई थी।

ऐसे राजभवन से हमलोग क्या उम्मीद रखें। इसी से असंतुष्ट होकर केंद्रीय सतर्कता आयोग के पास जाना पड़ा था कि मामले की निष्पक्ष जांच हो और गलत को गलत और सही को सही माना जाए। आयोग ने धीरे ही सही हमलोगों के आवेदन का संज्ञान लिया है। विश्वविद्यालय से पूरी जानकारी मांगी है।

अगर विश्वविद्यालय ने भ्रामक प्रतिवेदन दिया तो सतर्कता आयोग के अधिकारी स्वयं जांच करने के लिए कभी भी विश्वविद्यालय पहुंच सकते हैं। इस संबंध में विश्वविद्यालय की मीडिया प्रभारी डा. बिंदु चौहान से पक्ष मांगा गया, लेकिन उन्होंने कोई टिप्पणी नहीं दी।
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