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चाबहार पोर्ट की चिंता बढ़ी (फाइल फोटो)
जयप्रकाश रंजन, नई दिल्ली । अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ कारोबार करने वाले देशों पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाने का ऐलान कर वैश्विक व्यापार में नई हलचल मचा दी है। भारत भी इस नई धमकी से चिंतित है लेकिन ट्रंप के नये कदम से उसके कारोबारी हितों पर कोई खास असर पड़ने की संभावना नहीं है।
कारण यह है कि भारत ने पहले ही ईरान के साथ अपने कारोबारी रिश्तों को काफी कम कर रखा है। पिछले वित्त वर्ष भारत व ईरान के बीच सिर्फ 1.6 अरब डॉलर का द्विपक्षीय कारोबार हुआ है। भारत के कुल निर्यात में ईरान का हिस्सा सिर्फ 0.15 फीसद है। इसके बावजूद भारत की अहम चिंता चाबहार पोर्ट को लेकर है।
ईरान स्थित चाबहार पोर्ट का निर्माण भारत कर रहा है और अमेरिका ने चाबहार पोर्ट के निर्माण को अप्रैल, 2026 तक प्रतिबंधों से छूट दे रखी है। अगर ईरान के साथ अमेरिका के संबंध ऐसे ही तनावपूर्ण होते रहे तो ट्रंप प्रशासन चाबहार पोर्ट को भी प्रतिबंधित कर सकता है।
ईरान के साथ भारत के कारोबारी संबंध भले ही बहुत ही सीमित है लेकिन अमेरिका के भारी दबाव के बावजूद भारत ने ईरान के साथ कूटनीतिक संबंधों को बना कर रखा है। इसी महीने ईरान के विदेश मंत्री नई दिल्ली आने वाले थे लेकिन वहां जारी आंदोलन की वजह से उन्होंने इसे स्थगित कर रखा है।
अमेरिकी प्रतिबंध लगने से पहले ईरान भारत के शीर्ष तीन तेल आपूर्तिकर्ता देशों में एक रहा है। जब भी खाड़ी के क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ती थी तो भारत तेल आपूर्ति के लिए ईरान पर ही आश्रित रहता था। पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी से लेकर पीएम नरेन्द्र मोदी तक ने कई अवसरों पर ईरान के साथ भारत के सांस्कृतिक संबंधों की दुहाई दी है।
पीएम मोदी ने अक्टूबर, 2024 में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान के साथ ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान मुलाकात की थी। वर्ष 2025 में उन्हें नई दिल्ली आना था लेकिन वह अंतिम समय में स्थगित कर दिया गया था।
ईरान से कारोबार करने वाले देशों पर अतिरिक्त 25 फीसद टैक्स लगाने की ट्रंप की नई घोषणा के बारे में भारत के विदेश मंत्रालय और वाणिज्य मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि वह और स्पष्टीकरण का इंतजार कर रहे हैं।
भारत अभी ईरान को चावल (विशेषकर बासमती), चाय, दवाइयां और मसाले निर्यात करता है, जबकि आयात में सूखे मेवे और रसायन प्रमुख हैं। ईरान भारत के शीर्ष 50 कारोबारी साझेदार देशों में भी नहीं है। माना जा रहा है कि इसका सबसे ज्यादा असर चीन, रूस और खाड़ी के कुछ देशों जैसे यूएई पर पड़ेगा, जो ईरान के प्रमुख व्यापारिक साझेदार हैं।
भारत की सबसे अहम चिंता चाबहार पोर्ट को लेकर है जिसे वह अपने रणनीतिक महत्व व हिंद महासागर व अरब महासागर में चीन की बढ़ती सक्रियता की निगरानी के लिए जरूरी है। अमेरिका ने 2018 में ईरान पर प्रतिबंध लगाते हुए चाबहार को छूट दी थी, लेकिन हाल के वर्षों में इस पर प्रतिबंध लगाने की बात कही गई।
अभी भी अमेरिकी सरकारन से इस पोर्ट को ईरानी प्रतिबंध से अलग रखा है। भारत ने पिछले साल ईरान के साथ चाबहार पोर्ट के निर्माण को लेकर लंबी अवधि का समझौता किया था। अमेरिकी प्रतिबंधों की वजह से ईरान वैश्विक तेल बाजार से पहले ही बाहर हो चुका है, लिहाजा नये शुल्क से कच्चे तेल की कीमतों पर कोई खास असर नहीं पड़ने वाला। |
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